क्या पति का दूसरी औरत को घर में रखना अपराध है और पत्नी उसे कैसे बाहर निकाले
सवाल
उत्तर (2)
आप एक बहुत ही कठिन परिस्थिति में हैं, लेकिन कानून पूरी तरह से आपके साथ है। सबसे पहले आप पुलिस के इस सवाल से घबराएं नहीं कि आपने दो साल तक इंतजार क्यों किया। घरेलू हिंसा (Domestic Violence) एक 'निरंतर चलने वाला अपराध' (Continuing Offense) है। आप पुलिस को स्पष्ट बताएं कि आपको जान से मारने की धमकी दी गई थी और आप डर के कारण चुप थीं, जो कि देरी का एक वैध कारण है।
उस दूसरी महिला को घर से निकालने और अपनी सुरक्षा के लिए आपको 'घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005' (Protection of Women from Domestic Violence Act) का सहारा लेना होगा। यह कानून आपको सबसे तेज राहत देगा। आपको तुरंत एक वकील के जरिए मजिस्ट्रेट के सामने आवेदन देना चाहिए।
इस कानून की धारा 19 के तहत आप कोर्ट से 'निवास आदेश' (Residence Order) की मांग कर सकती हैं। कोर्ट तुरंत आदेश देगा कि उस बाहरी महिला को आपके वैवाहिक घर से बाहर निकाला जाए, क्योंकि उस घर में रहने का कानूनी हक सिर्फ आपका है। साथ ही, आप धारा 18 के तहत 'संरक्षण आदेश' (Protection Order) भी मांगें, जिससे कोर्ट पति को आपके साथ मारपीट करने या आपसे दूर रहने का सख्त निर्देश देगा।
इसके अलावा, पति द्वारा मारपीट करने और मानसिक प्रताड़ना देने के लिए आप उन पर आपराधिक मुकदमा भी दर्ज करवा सकती हैं। नई 'भारतीय न्याय संहिता' (Bharatiya Nyaya Sanhita - BNS) की धारा 85 (जो पहले आईपीसी 498A थी) के तहत पति पर 'क्रूरता' (Cruelty) का केस दर्ज होगा। किसी दूसरी महिला को पत्नी के साथ उसी घर में रखना 'मानसिक क्रूरता' का सबसे गंभीर रूप है। आप अपने और अपने बच्चों के लिए पति से तुरंत भरण-पोषण (Maintenance) भी मांग सकती हैं।
प्रथम पत्नी के पास कानूनी तौर पर कई सारे उपाय एवं रास्ते उपलब्ध है जिसमें से सर्वप्रथम अपने नजदीकी पुलिस थाने अथवा महिला थाने के अंतर्गत एक रिपोर्ट आपके पति के द्वारा की जा रही घरेलू हिंसा के विरुद्ध दर्ज करवाई एवं साथ ही उसे रिपोर्ट के अंतर्गत धाराएं जैसे की 498 ए भी शामिल करवा
इसके अतिरिक्त आप मजिस्ट्रेट के समक्ष घरेलू हिंसा से बचाव कानून के अंतर्गत घर से ना निकाले जाने की आवेदन पत्र को प्रस्तुत कर घर में अपने संरक्षण की मांग कर सकते हैं कि आप अपने पति के विरुद्ध भरण पोषण की राशि के लिए भी आवेदन लगा सकते हैं अपने भरण पोषण की राशि अपने पति के विरुद्ध विवाह विच्छेद का आवेदन भी दर्ज करवा सकते हैं
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- मेरे पिताजी पाँच भाई थे। उनमें से एक बड़े चाचा की कोई संतान नहीं थी। परिवार में सभी भाइयों के बीच संपत्ति का बँटवारा हो चुका था। वर्ष 2006 में मेरे चाचा का निधन हो गया। अपने निधन से पहले उन्होंने अपनी संपत्ति और अपनी पत्नी, यानी मेरी बड़ी चाची की जिम्मेदारी मेरे पिताजी को सौंप दी थी। चाचा के निधन के बाद मेरी चाची ने अपनी पूरी जमीन मेरी माँ के नाम कर दी थी, लेकिन मकान अपने नाम पर ही रखा था। उन्होंने कोर्ट के माध्यम से एक वसीयत भी बनवाई थी, जिसमें लिखा था कि उनकी मृत्यु के बाद यह मकान मेरे पिताजी का हो जाएगा। लेकिन मेरे पिताजी का निधन वर्ष 2012 में ही हो गया, जबकि मेरी चाची का निधन वर्ष 2021 में हुआ। पिताजी के निधन के बाद मैंने अपनी माँ और चाची, दोनों को अपने पास रखा और लगभग 10–12 वर्षों तक शहर में किराए के मकान में उनके रहने, खाने-पीने, इलाज और अन्य सभी जरूरतों का ध्यान रखा। मैंने और मेरी पत्नी ने मिलकर चाची की पूरी सेवा की। हमारा पैतृक मकान हमारे गाँव में है। फिलहाल उस मकान में हम रहते हैं और बिजली का बिल भी मेरी माँ के नाम पर आता है। मेरी माँ अभी जीवित हैं। हम तीन भाई हैं और मैं स
- नमस्कार, दिवाणी दाव्यामध्ये प्रतिवादीचा सध्याचा पोस्टल पत्ता मिळत नसल्यामुळे कोर्टाची नोटीस/समन्स बजावण्यात अडचण येत आहे. कृपया प्रतिवादीचा पत्ता कायदेशीर मार्गाने शोधण्यासाठी आणि नोटीस/समन्स बजावण्यासाठी योग्य ती कायदेशीर प्रक्रिया करता येईल का, याबाबत मार्गदर्शन करावे. धन्यवाद.
- Namaste sir mera jo case Hai 2015 ka hai yah case close ho gaya hai aur yah jhutha case ka chakkar mein Hai ismein se naam hatwana hai kyunki mujhe clearance certificate banvane mein problem aati Hai application rejected ho jati h
- Sir ji Mera case act ka hai jismein mera bhai fasaya gaya hai usko Saja ho gai hai 25 sal ki usmein criminal appeal karni hai ki jankari chahie Thi iske liye help chahie Thi aapki main bahut Garib aadami hun mujhe aapki help chahie