बहन ने पूरी जमीन बड़ी बहन को दान कर दी क्या बाकी बहनों को हिस्सा मिलेगा


सवाल

उत्तरप्रदेश का मामला 8 महीने पहले का है जिसमें पिता जी की पहले मृत्यु हो गई थी माता जी की अभी एक साल पहले हुई, माता जी मृत्यु हो जाने के बाद उसकी चार लड़की तीन शादी शुदा ओर एक बिना शादी के भाई है नहीं तो सारी जमीन बिना शादी वाली लड़की के नाम आई और बाद में बिना शादी वाली लड़की ने जमीन अपनी एक बड़ी बहन के नाम कर दी दान पत्र के माध्यम से अब जो दो बहने है उसमें से एक बहन आपत्ति लगा रही कि जमीन हमें चाहिए मिल सकती या नहीं या जिसके नाम जमीन हो गई उसी नाम रहेगी

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आपके प्रश्न में उत्तर प्रदेश की पारिवारिक संपत्ति से जुड़ा एक जटिल कानूनी प्रसंग है। सबसे पहले, कानूनी दृष्टि से मूल बात यह है कि माता-पिता की मृत्यु के बाद उनकी संपत्ति का बंटवारा कैसे होता है। चूंकि माता जी की मृत्यु उनके पुत्र और पुत्रियों की उपस्थिति में हुई है, इसलिए सामान्य हिंदू उत्तराधिकार कानून के अनुसार, सभी चारों पुत्रियां माता जी की संपत्ति की समान अधिकारी (बराबर की हिस्सेदार) बनती हैं। यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि पुत्र का न होना किसी भी पुत्री को दूसरों पर अधिकार नहीं देता; बल्कि माता जी का भाग सभी बहनों में बराबर बंटना चाहिए था।

अब आपने जो बताया कि अविवाहित बहन के नाम सारी जमीन आई, उसके बाद उसने अपनी बड़ी बहन के नाम दान-पत्र कर दिया। यहां कानूनी समस्या यह है कि अविवाहित बहन के पास 'सारी' जमीन का अकेला मालिकाना हक कैसे आया? अगर यह जमीन माता जी की थी, तो बाकी दो विवाहित बहनों का भी उसमें कानूनी हिस्सा है। बाकी दो बहनें अगर आपत्ति लगा रही हैं, तो उनका दावा बिल्कुल सही है, क्योंकि माता जी की संपत्ति पर उनका भी जन्मसिद्ध अधिकार है। यानी अविवाहित बहन अकेली वारिस नहीं थी, इसलिए उसने जो पूरी जमीन का दान-पत्र अपनी बड़ी बहन के नाम किया, वह कानूनी रूप से कमजोर है, क्योंकि वह अपने से अधिक हिस्से का ही दान कर सकती थी, बाकी बहनों के अधिकार का नहीं। न्यायालय की दृष्टि में, वर्तमान में भूमि जिसके नाम पर है (बड़ी बहन), वह कागजी मालिक अवश्य है, लेकिन विवादित मामलों में, अगर दो बहनें अपना हिस्सा मांगती हैं तो उन्हें यह साबित करना होगा कि माता की मृत्यु के समय संपत्ति का बंटवारा नहीं हुआ था। अंतिम फैसला अदालत का होगा, लेकिन बाकी दो बहनें बंटवारे का मुकदमा दायर करके अपना हिस्सा प्राप्त कर सकती हैं। कुल मिलाकर, सारी जमीन उसी के नाम नहीं रह सकती जिसके कागजात में है, कानून वास्तविक अधिकारियों को न्याय दिलाता है। अतः आपत्ति लगाने वाली बहनों को वकील से सलाह लेकर बंटवारे के लिए मुकदमा दायर करना चाहिए।


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