क्या अपंजीकृत वसीयत इसके लाभार्थी के लिए स्वामित्व का प्रमाण होगा


सवाल

दिल्ली सरकार की एक अधिसूचना के अनुसार, अपंजीकृत वसीयत को स्वामित्व का पर्याप्त प्रमाण नहीं माना जाता है। क्या लाभार्थी को इसके लिए कोर्ट से प्रोबेट या उत्तराधिकार प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य है? इस प्रक्रिया और वसीयत की वैधता से जुड़े नियमों के बारे में बताएं।

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हाँ, दिल्ली सरकार के हालिया नियमों के अनुसार, यदि आपके पास एक अपंजीकृत वसीयत (Unregistered Will) है, तो केवल उस कागज़ के आधार पर सरकारी रिकॉर्ड या नगर निगम (MCD) में संपत्ति का दाखिल-खारिज (Mutation) आपके नाम पर नहीं होगा। इसके लिए आपको सक्षम न्यायालय से 'प्रोबेट' (Probate) या 'प्रशासन पत्र' (Letters of Administration) प्राप्त करना अनिवार्य कर दिया गया है।

पंजीकरण अधिनियम 1908 के अनुसार, वसीयत का पंजीकरण कराना अनिवार्य नहीं है और एक सादे कागज पर लिखी वसीयत भी कानूनी रूप से मान्य होती है। लेकिन दिल्ली जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में, अपंजीकृत वसीयत की प्रामाणिकता पर अक्सर सवाल उठते हैं। इसलिए प्रशासन ने यह सुनिश्चित करने के लिए कि वसीयत असली है, कोर्ट से 'प्रोबेट' लेने की शर्त रखी है। प्रोबेट का अर्थ है - अदालत द्वारा प्रमाणित वसीयत की वह प्रति जो इसकी सत्यता पर कानूनी मुहर लगाती है।

प्रोबेट प्राप्त करने की प्रक्रिया इस प्रकार है:

  1. याचिका दायर करना: आपको भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम 1925 की धारा 276 के तहत संबंधित जिला अदालत में एक याचिका दायर करनी होगी। इसमें वसीयतकर्ता की मृत्यु का प्रमाण, संपत्ति का विवरण और वसीयत की मूल प्रति लगानी होगी।

  2. नोटिस और सार्वजनिक सूचना: कोर्ट मृतक के अन्य कानूनी वारिसों को नोटिस जारी करता है ताकि वे अपनी आपत्ति (Objection) दर्ज करा सकें। साथ ही, समाचार पत्र में एक सार्वजनिक सूचना भी दी जाती है।

  3. जांच और आदेश: यदि कोई आपत्ति नहीं आती और कोर्ट गवाहों के बयानों से संतुष्ट हो जाता है कि वसीयत सही तरीके से लिखी गई थी, तो वह प्रोबेट आदेश जारी कर देता है।

एक बार प्रोबेट मिल जाने के बाद, अपंजीकृत वसीयत भी पंजीकृत वसीयत के समान शक्तिशाली हो जाती है और उसके आधार पर आप एमसीडी या किसी भी विभाग में संपत्ति को अपने नाम पर ट्रांसफर (Transfer) करवा सकते हैं। हालांकि, यदि वसीयत पहले से ही पंजीकृत (Registered) होती, तो आपको इस लंबी अदालती प्रक्रिया और प्रोबेट की जरूरत नहीं पड़ती।

मेरी सलाह है कि यदि वसीयतकर्ता जीवित हैं, तो भविष्य के विवादों से बचने के लिए वसीयत को रजिस्टर जरूर करवा लें। यदि वसीयतकर्ता की मृत्यु हो चुकी है, तो आपको बिना देरी किए किसी वकील के माध्यम से प्रोबेट के लिए आवेदन कर देना चाहिए, क्योंकि इसके बिना आप संपत्ति को कानूनी रूप से बेच या हस्तांतरित नहीं कर पाएंगे।


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