पगड़ी प्रणाली से किराये की दुकान को सब लेट कैसे करें


सवाल

हमारी दुकान दिल्ली में पगड़ी प्रणाली पर आधारित है और हम इसे आगे किसी और को किराये पर देना चाहते हैं। जब हमने मकान मालिक से इस बारे में बात की और अनुमति मांगी, तो उन्होंने साफ मना कर दिया कि यह गैरकानूनी है। हम जानना चाहते हैं कि क्या नए किरायेदार के साथ साझेदारी समझौता (Partnership Agreement) करके दुकान किराये पर दी जा सकती है? साथ ही, अगर हम इसे पट्टे पर देते हैं, तो मकान मालिक को कितना प्रतिशत हिस्सा देना होगा? इसके अलावा, पगड़ी सिस्टम के नियम कहाँ मिलेंगे ताकि हम मकान मालिक के उत्पीड़न से बच सकें, क्योंकि वह दुकान की मरम्मत भी नहीं करवा रहा है और छत की हालत बहुत खराब हो चुकी है।

उत्तर (2)


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पगड़ी प्रणाली (Pagdi System) में दुकान को किसी और को किराये पर देना यानी सब लेट (Sub-let) करना थोड़ा पेचीदा मामला है। कानून के अनुसार, आप बिना मकान मालिक की लिखित सहमति के दुकान किसी और को नहीं सौंप सकते। अगर आप ऐसा करते हैं, तो मकान मालिक को आपको दुकान से बेदखल करने का कानूनी आधार मिल जाता है।

जहाँ तक साझेदारी समझौते (Partnership Agreement) की बात है, तो कई लोग इसका इस्तेमाल किरायेदारी को छिपाने के लिए करते हैं। आप नए व्यक्ति के साथ एक बिजनेस पार्टनरशिप कर सकते हैं, जिसमें आप खुद भी व्यापार का हिस्सा हों। हालांकि, अगर मकान मालिक कोर्ट में यह साबित कर दे कि यह सिर्फ नाम की पार्टनरशिप है और असल में आपने दुकान किराये पर दे दी है, तो आपको परेशानी हो सकती है। इसलिए, सबसे सुरक्षित तरीका यही है कि आप मकान मालिक को भरोसे में लेकर मुनाफे का कुछ हिस्सा देने की बात करें ताकि वह लिखित अनुमति दे दे।

पगड़ी सिस्टम में दुकान को आगे सब लेट करने पर मकान मालिक को कितना प्रतिशत देना होगा, इसका कोई तय कानूनी पैमाना नहीं है। यह पूरी तरह से आपके और मकान मालिक के बीच आपसी बातचीत और सहमति पर निर्भर करता है। आमतौर पर, बाजार के चलन के हिसाब से लोग किराए का 25 से 35 प्रतिशत हिस्सा मकान मालिक को देने का प्रस्ताव रखते हैं ताकि विवाद न हो।

पगड़ी प्रणाली के नियम और किरायेदार के अधिकार भारतीय किराया नियंत्रण अधिनियम (Rent Control Act) के तहत आते हैं। चूंकि आप दिल्ली या महाराष्ट्र जैसे राज्यों की बात कर रहे हैं, तो वहां के विशिष्ट किराया कानून लागू होंगे। इसमें स्पष्ट है कि अगर दुकान की हालत जर्जर है और मकान मालिक मरम्मत नहीं करवा रहा है, तो आप उसे कानूनी नोटिस भेज सकते हैं।

अगर नोटिस के बाद भी मकान मालिक मरम्मत नहीं करवाता, तो आप रेंट अथॉरिटी या कोर्ट में अर्जी दे सकते हैं। कोर्ट मकान मालिक को मरम्मत का आदेश दे सकता है या आपको खुद मरम्मत करवाकर उसका खर्च किराये में से काटने की अनुमति दे सकता है। हमारी सलाह है कि आप सीधे टकराव के बजाय एक कानूनी नोटिस (Legal Notice) के जरिए अपनी बात रखें।

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आपको मेरा यह जवाब है: 1. हम दुकान को किराए पर कैसे दे सकते हैं क्या कोई रास्ता है ... क्या नए किराएदार और हमारे बीच एक साझेदारी समझौता किया जा सकता है उत्तर: आपको मकान मालिक से एनओसी प्राप्त करने की आवश्यकता होगी। अन्यथा यह कठिन होगा; 2. साथ ही दुकान लीज पर देने की स्थिति में मकान मालिक को कितना प्रतिशत देय है। उत्तर: यह कुछ ऐसा है जिसे आप व्यक्तिगत रूप से मकान मालिक के साथ तय कर सकते हैं और सहमत शर्तों के अनुसार आप उसे भुगतान कर सकते हैं; 3. कृपया यह भी भेजें या मुझे बताएं कि मुझे पगड़ी प्रणाली के सभी नियम और कानून कहां से मिल सकते हैं ताकि मकान मालिक के उत्पीड़न से बचा जा सके क्योंकि वह मरम्मत का काम भी नहीं कर रहा है क्योंकि कॉलम और बीम में स्टील जंग खा गया है। इस हद तक गिरना शुरू हो गया है उत्तर: महाराष्ट्र किराया नियंत्रण अधिनियम है, कृपया इसे देखें: https://housing.maharashtra.gov.in/Sitemap/housing/pdf/actsrules/ THE_MAHARASHTRA_RENT_CONTROL_ACT.pdf आप कर सकते हैं निम्नलिखित: 1. मकान मालिक से संपर्क करें और उप-पट्टे के लिए अनुमति मांगें; 2. उसे उसी का हिस्सा बनने और किराए का हिस्सा प्राप्त करने के लिए मनाएं; 3. विनम्रतापूर्वक उससे मरम्मत करने के लिए कहें; 4. अगर वह फिर भी नहीं मानता है तो उसे लीगल नोटिस भेज दें।


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अनुवादित किया गया मूल उत्तर यहां पढ़ा जा सकता है।


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