भारत में गर्भपात के लिए कानून

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October 10, 2019
एडवोकेट चिकिशा मोहंती द्वारा



गर्भपात का मतलब जानबूझकर गर्भावस्था का समापन करना है, जो गर्भावस्था के पहले 20 सप्ताह के दौरान किया जाता है। भारत एक ऐसा देश है, जहाँ गरीबी और अशिक्षा जैसी समाज की कई प्रकार की बुराइयाँ फैली हुई हैं। 1971 में मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी (एम. टी. पी.) एक्ट को अपनाने के बाद से भारत में गर्भपात केवल कुछ निश्चित प्रावधानों के तहत ही वैध है। इसके साथ ही भारत गर्भपात को वैध बनाने वाले पहले कुछ देशों में से एक बन गया।

इस अधिनियम के माध्यम से गर्भपात को वैध बनाने का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक महिला को गर्भावस्था को समाप्त करने के दौरान प्रचलित स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करना है, सुरक्षित समाप्ति सेवाओं को प्रदान कराना और सामर्थ्य को बढ़ावा देना है। आइये गर्भपात के कानून को संक्षेप में समझते हैं

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गर्भपात कब किया जा सकता है?

  1. अधिनियम की धारा- 3 के तहत
     

  2. चिकित्सक की अनुमति और अनुमोदन द्वारा स्वास्थ्य उपाय के रूप में।

  1. जब महिला के शारीरिक या मानसिक स्वास्थ्य के लिए जान या जोखिम का खतरा हो।

  2. जब गर्भावस्था के दौरान महिला के जीवन के लिए जोखिम अधिक होता है, तो यह समाप्त किया जा सकता है।

  3. जब महिला के मानसिक या शारीरिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर स्थायी चोट से बचने के लिए गर्भपात कराना महत्वपूर्ण हो जाता है।

  4. जब गर्भावस्था की निरंतरता में परेशानी हो सकती है, तो बच्चे और माँ के बेहतर स्वास्थ्य के लिए गर्भपात कराना महत्वपूर्ण हो जाता है।

  5. जब काफी जोखिम हो जाता है, कि बच्चा शारीरिक या मानसिक असामान्यताओं के साथ पैदा हो सकता है, जिसके परिणामस्वरूप गंभीर विकृति हो सकती है।

  6. जब महिला के जीवन को बचाने के लिए या उसके स्वास्थ्य पर स्थायी चोट से बचने के लिए यह आवश्यक हो जाता है।
     

  1. मानवीय आधार पर
     

  2. गर्भावस्था एक यौन अपराध से उत्पन्न होती है, जैसे बलात्कार या महिला के साथ अनुचित संभोग आदि।
     

  3. यूजेनिक आधार पर
     

  4. एक बड़ा जोखिम है, कि अगर बच्चा पैदा होता है, तो विकृति और बीमारियों से पीड़ित होगा।
     

गर्भपात की अनुमति देने पर सुप्रीम कोर्ट की नज़र

शीर्ष अदालत ने 2017 में एक किशोर बलात्कार पीड़िता को उसकी 24 सप्ताह की गर्भावस्था को समाप्त करने की अनुमति दी थी, वास्तव में, अदालत ने बहुमूल्य समय की हानि के लिए खेद व्यक्त किया जिसमे उस लड़की की गर्भावस्था को पहले ही समाप्त किया जा सकता था।
शीर्ष अदालत ने 2016 में एक महिला को 24 सप्ताह के भ्रूण को समाप्त करने की अनुमति दी, जो स्वीकार्य 20 सप्ताह के समय - सीमा के खिलाफ था। कोर्ट ने कहा कि कई गंभीर असामान्यता वाले भ्रूण को जारी रखना भ्रूण और मां दोनों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है, और इसलिए मां को जटिलताओं से बचाने के लिए गर्भपात की अनुमति दी गई।

हालांकि, उपर्युक्त निर्णय का मतलब यह नहीं है, कि गर्भावस्था की समाप्ति हर स्थिति में होने की अनुमति है, वास्तव में, यह सब मामले के तथ्यों पर निर्भर करता है।

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गर्भपात कब नहीं किया जा सकता है?

अधिनियम की धारा- 3 के तहत

  1. एक नाबालिग गर्भवती लड़की उसके कानूनी अभिभावक की लिखित सहमति के बिना समाप्त नहीं कर सकती है।

  2. महिला की सहमति के बिना गर्भपात नहीं हो सकता है।
     

सुप्रीम कोर्ट ने गर्भपात की अनुमति नहीं दी

2017 में, एक गर्भवती महिला ने अपने 26 सप्ताह के भ्रूण को जमीन पर गिराने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसमें बच्चा 'डाउन सिंड्रोम' से पीड़ित था। हालांकि, अदालत ने यह घोषणा करते हुए इनकार कर दिया कि हमारे हाथों में एक जीवन है, और इस प्रकार भ्रूण को मारना उचित विकल्प नहीं है।
 

गर्भपात कहाँ किया जा सकता है?

अधिनियम की धारा- 4 के तहत यह विशेष रूप से उल्लेख किया गया है, कि गर्भावस्था को समाप्त करने के लिए कुछ निश्चित स्थान के अलावा किसी अन्य स्थान पर नहीं किया जाएगा-

सरकार द्वारा स्थापित एक अस्पताल या रखरखाव या सरकार द्वारा अनुमोदित एक जगह या मुख्य चिकित्सा अधिकारी या जिला स्वास्थ्य अधिकारी के साथ सरकार द्वारा गठित एक जिला स्तरीय समिति होती हो।

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क्या गर्भपात के लिए पति की सहमति आवश्यक है?

सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले में जहां पति अपनी पत्नी की सहमति के बिना अपनी पत्नी का गर्भपात कराने के बाद कोर्ट से राहत पाने की कोशिश कर रहा था। तदनुसार, न्यायालय ने कहा कि पत्नी द्वारा वैवाहिक यौन संबंध के लिए सहमति केवल यह नहीं है कि उसने एक बच्चे को भी गर्भ धारण करने के लिए सहमति दी है। इसलिए, यह गर्भधारण करने या समाप्त करने के लिए महिला की पूर्ण स्वतंत्र सहमति महत्वपूर्ण होती है। पुरुष उसे अपने बच्चे को जन्म देने के लिए मजबूर नहीं कर सकता है। इसके अलावा, अदालत ने यह कहते हुए और जोड़ा कि एक महिला ऐसी मशीन नहीं है, जिसमें कच्चा माल रखा जाता है, और तैयार उत्पाद निकलते हैं। गर्भधारण करने और बच्चे को जन्म देने और मां बनने के लिए महिला को मानसिक रूप से तैयार होने की जरूरत है। अवांछित / अनियोजित गर्भावस्था केवल गर्भवती महिला के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करेगी।




 

ये गाइड कानूनी सलाह नहीं हैं, न ही एक वकील के लिए एक विकल्प
ये लेख सामान्य गाइड के रूप में स्वतंत्र रूप से प्रदान किए जाते हैं। हालांकि हम यह सुनिश्चित करने के लिए अपनी पूरी कोशिश करते हैं कि ये मार्गदर्शिका उपयोगी हैं, हम कोई गारंटी नहीं देते हैं कि वे आपकी स्थिति के लिए सटीक या उपयुक्त हैं, या उनके उपयोग के कारण होने वाले किसी नुकसान के लिए कोई ज़िम्मेदारी लेते हैं। पहले अनुभवी कानूनी सलाह के बिना यहां प्रदान की गई जानकारी पर भरोसा न करें। यदि संदेह है, तो कृपया हमेशा एक वकील से परामर्श लें।

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