क्या पैतृक संपत्ति पर गिफ्ट डीड को अदालत में चुनौती दी जा सकती है


सवाल

मेरी पैतृक संपत्ति मेरे दादाजी को उनकी मां से मिली थी। दादाजी के पांच बेटे और एक बेटी हैं। 1993 में दादाजी ने एक दस्तावेज लिखकर संपत्ति केवल दूसरे और चौथे बेटे के नाम कर दी थी। फिर 2014 में उन्होंने वही संपत्ति पांचवें बेटे के नाम कर दी, जिसके आधार पर अब पट्टा भी पांचवें बेटे के नाम है। बाकी तीन बेटों और एक बेटी को कुछ नहीं मिला। मैं यह जानना चाहता हूँ कि हिंदू कानून के अनुसार इस संपत्ति पर किसका हक है? क्या दादाजी अपनी मर्जी से पैतृक संपत्ति किसी एक या दो बेटों को दे सकते हैं या यह सभी छह बच्चों में बराबर बंटेगी?

उत्तर (3)


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पैतृक संपत्ति (Ancestral Property) के मामले में कोई भी व्यक्ति अपनी मर्जी से पूरी संपत्ति किसी एक वारिस को गिफ्ट या दान नहीं कर सकता है।

हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम (Hindu Succession Act) के अनुसार, जो संपत्ति विरासत में चार पीढ़ियों से चली आ रही हो, उसमें परिवार के सभी सदस्यों (बेटों और बेटियों) का जन्म से बराबर का अधिकार होता है। चूंकि यह संपत्ति आपके दादाजी को उनकी मां से मिली थी, इसलिए यह एक पैतृक संपत्ति है। आपके दादाजी इस संपत्ति के केवल एक हिस्सेदार (Coparcener) थे, मालिक नहीं।

कानूनी रूप से आपके दादाजी केवल अपने हिस्से की संपत्ति का ही हस्तांतरण (Transfer) कर सकते थे। पूरी संपत्ति को किसी एक या दो बेटों के नाम कर देना कानूनन गलत है। ऐसी स्थिति में बाकी तीन बेटे और बेटी अदालत में इस गिफ्ट डीड या दस्तावेज को चुनौती दे सकते हैं।

इस मामले में संपत्ति का बंटवारा इस प्रकार होना चाहिए:

  1. संपत्ति के कुल छह हिस्से होने चाहिए (5 बेटे और 1 बेटी)।

  2. दादाजी द्वारा 1993 या 2014 में लिखे गए किसी भी दस्तावेज की वैधता तभी तक है जब तक वह उनके अपने निजी हिस्से तक सीमित हो।

  3. यदि पट्टा पांचवें बेटे के नाम हो गया है, तो भी उसे अदालत में चुनौती दी जा सकती है क्योंकि पैतृक संपत्ति में अन्य हिस्सेदारों की सहमति के बिना किया गया कोई भी बदलाव अवैध माना जाता है।

आपको तुरंत अदालत में विभाजन का मुकदमा (Partition Suit) दायर करना चाहिए और दादाजी द्वारा किए गए पिछले हस्तांतरणों को रद्द करने की मांग करनी चाहिए। अदालत रिकॉर्ड देखने के बाद सभी कानूनी वारिसों को उनका उचित हिस्सा दिला सकती है।

121 votes

दस्तावेजों को देखे बिना मैं केवल एक आम राय दे सकता हूं। आपने जो बताया उससे आपके दादाजी को उनकी मां से विरासत में मिला है और यह उनकी खुद की अर्जित संपत्ति नहीं है और इसलिए वह अपनी इच्छा के अनुसार एक या दो बेटों को उपहार नहीं दे सकते। हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के अनुसार आपके सभी दादा-दादी के बच्चों को आपके दादा-दादी के साथ सहदायिक अधिकार प्राप्त हैं और वह उनके अधिकारों से इनकार नहीं कर सकते हैं। आप कानूनी कदम उठा सकते हैं।

340 votes

यदि यह प्रश्न अभी भी खुला है, तो मैं एक कॉल ले सकता हूं और मान लीजिए कि यह खुला है, यदि यह पूर्वज संपत्ति है तो आपके पास एक मौका है और यदि उपरोक्त संपत्ति दादाजी की स्वयं अर्जित है और यदि आप आवश्यक जोड़कर इसका खंडन करते हैं यह साबित करने के लिए कि आपके दादाजी के पास संपत्ति खरीदने के लिए आवश्यक स्रोत नहीं था, यह पूर्वजों की संपत्ति का दर्जा प्राप्त करता है, इसके विपरीत इसे GF की स्व-अर्जित माना जाएगा और वह जो चाहे कर सकता है, और यह पंजीकृत दस्तावेज के माध्यम से होना चाहिए .


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