पत्नी द्वारा किए गए मेंटेनेंस केस से कानूनी रूप से कैसे बचें
सवाल
उत्तर (2)
हाँ, ऐसी कुछ कानूनी स्थितियाँ और आधार हैं जिनके माध्यम से आप भरण-पोषण (Maintenance) की राशि को कम करवा सकते हैं या उससे बच सकते हैं। कानून का सामान्य नियम यह है कि सक्षम पति को अपनी पत्नी का खर्च उठाना चाहिए, लेकिन यह अनिवार्य नहीं है कि हर मामले में पति को भुगतान करना ही पड़े। यदि आपकी पत्नी शिक्षित है और कमाने में सक्षम है, तो आप अदालत में उसकी योग्यता और आय के स्रोतों के प्रमाण पेश कर सकते हैं।
यदि आपकी पत्नी पहले से ही किसी नौकरी या व्यवसाय से अच्छी आय प्राप्त कर रही है, तो आप अदालत को यह बता सकते हैं कि वह अपना गुजारा करने में पूरी तरह समर्थ है। इसके अलावा, यदि वह बिना किसी उचित कारण के आपसे अलग रह रही है और आपने उसे साथ रहने के लिए बुलाया है, तो यह भी आपके बचाव का एक मजबूत आधार बन सकता है। भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita) के दौर में भी भरण-पोषण से जुड़े नियम अब काफी हद तक तथ्यों और सबूतों पर आधारित होते हैं।
चूंकि आप आपसी सहमति से तलाक के लिए तैयार हैं, तो सबसे बेहतर तरीका यह है कि आप अपनी पत्नी के साथ बातचीत करें और एकमुश्त स्थायी गुजारा भत्ता (Alimony) देकर मामले को हमेशा के लिए सुलझा लें। इससे आप हर महीने पैसे देने की जिम्मेदारी और लंबे समय तक चलने वाले मुकदमों से बच जाएंगे। अदालत अक्सर ऐसे समझौतों को प्राथमिकता देती है जहाँ दोनों पक्ष आपसी तालमेल से विवाद खत्म करना चाहते हों।
आपको अपनी वित्तीय स्थिति और खर्चों का सही विवरण अदालत में हलफनामे (Affidavit) के जरिए देना चाहिए। यदि आपके पास कोई कर्ज है या परिवार की अन्य जिम्मेदारियाँ हैं, तो अदालत उन पर विचार करते हुए भरण-पोषण की राशि तय करेगी। ध्यान रखें कि अदालत में गलत जानकारी देने से बचें, क्योंकि इससे आपके खिलाफ दंडात्मक कार्यवाही (Contempt of Court) हो सकती है। एक कुशल वकील आपके मामले के तथ्यों के आधार पर उचित बचाव तैयार करने में आपकी मदद कर सकता है।
कानून के तहत ऐसा कोई कानून नहीं है जिससे कि पति मेंटेनेंस देने से बच सके, सेकंड टेस्ट कर सकते हैं पर इसके लिए किस पूरी तरह से समझना जरूरी है और यह भी ध्यान में रखना जरूरी है कि पत्नी कम आ रही है कि नहीं या वे पति से ज्यादा कमा रही है
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