क्या शारीरिक संबंध बनाने से मना करना तलाक का आधार बन सकता है?


सवाल

मेरी शादी को दो साल हो गए हैं और शादी से पहले भी हम एक-दूसरे को जानते थे। लेकिन शादी के बाद से मेरे पति की शारीरिक संबंध बनाने में कोई इच्छा नहीं है। हम कई डॉक्टरों के पास गए, पर वो न तो इलाज पूरा कराते हैं और न ही फ़ॉलो-अप लेते हैं। अब मैं बहुत परेशान हूँ और सोच रही हूँ कि क्या मुझे तलाक लेना चाहिए। मुझे शक होने लगा है कि कहीं उनकी सेक्सुअल ओरिएंटेशन में भी समस्या तो नहीं। हमारी शादी अब बस साथ रहने जैसा लगती है, पति-पत्नी के रिश्ते जैसी नहीं। क्या इस स्थिति में बिना सेक्स के रहना तलाक का आधार बन सकता है? कृपया सलाह दें।

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भारतीय कानून के अनुसार “सेक्स न करना” तलाक का कानूनी आधार नहीं माना गया है। लेकिन अगर कोई पति या पत्नी बिना किसी सही कारण के लंबे समय तक शारीरिक संबंध बनाने से इंकार करता है, तो इसे मानसिक क्रूरता (mental cruelty) माना जा सकता है। हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के अनुसार मानसिक क्रूरता तलाक का एक मान्य आधार है।

यदि अदालत में यह साबित हो जाए कि पति-पत्नी के बीच शारीरिक संबंध न होने से वैवाहिक जीवन प्रभावित हुआ है और यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो कोर्ट इसे गंभीर मुद्दा मान सकती है और तलाक दिया जा सकता है। ऐसे मामलों में आमतौर पर विवादित तलाक (एकतरफा तलाक) होता है, जहाँ सबूत और परिस्थितियों के आधार पर अदालत फैसला देती है। मेरी सलाह है कि आप बिना देरी किए मामलों के किसी अच्छे तलाक वकील से कानूनी सलाह ले।


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