भारतीय संविधान - भारतीय संविधान में वर्णित स्वतंत्रता का अधिकार (Right to Freedom in Hindi)


विवरण

स्वतंत्रता एक ऐसी स्थिति होती है, जिसमें लोगों को बाहरी प्रतिबंधों के बिना बोलने, करने और अपने सुख को प्राप्त करने का अवसर मिलता है, और कई लोगों को स्वतन्त्र होकर जीवन यापन करने में अच्छा लगता है, वे लोग किसी अन्य व्यक्ति से ज्यादा बोलना और न ही किसी से ज्यादा मतलब रखना पसंद करते हैं। स्वतंत्रता हमारे लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि उससे हमें अपने नए विचार, रचनात्मक कला, उत्पादन और जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाने का मौका मिलता है, इसके साथ ही स्वतन्त्र होकर रहने से कोई भी व्यक्ति खुद को अधिक समय दे सकता है, और अपने बारे में विचार कर सकता है, जो कि एक व्यक्ति के जीवन के लिए बहुत ही लाभदायक सिद्ध हो सकता है।

हमारी स्वतंत्रता हमें अत्यंत प्रिय होती है। अगर सही मायने में देखा जाये तो यह आज़ादी की लड़ाई के फलस्वरूप ही हमें प्राप्त हुई है, क्योंकि अंग्रेजों से हमारा वैर केवल इसी लिए था, कि उन्होंने हमारी आज़ादी को हमसे अलग करके रखा था, और हम इस तरह से बंधे हुए थे कि हमें अपनी ही संपत्ति का प्रयोग करने से पहले अंग्रेजों से अनुमति लेनी पड़ती थी, और वे लोग भी आसानी से अनुमति भी नहीं दिया करते थे। अनेक भारतीयों ने अपना सुख एवं जीवन त्याग कर हमें यह आज़ादी भेंट दी है। स्वतन्त्र भारत में हम अपने देश और अपने घर परिवार के साथ - साथ खुद की प्रगति के लिए कार्य कर सकते हैं, जो अंग्रेजों के अधीन रहकर करना संभव नहीं था।

स्वतंत्र होने के कारण हम लोग अपने नए संविधान को गठित कर सके। इसी के कारण हम नागरिकों के अधिकार प्राप्त करने में सफल हुए हैं। समाज में सुधार और सबके लिए सुविधाएं उपलब्ध हो पाई है, और देश में नयी ऊर्जा विकसित हो पायी है, जिसकी वजह से कोई भी व्यक्ति अपनी संपत्ति का प्रयोग अपने मन से कर सकता है, अब उसे किसी से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है। प्रजातंत्र में लोग देश के शासन के लिए सही व्यक्तियों का चुनाव कर सकते हैं, और अपने कार्य सिद्ध करवा सकते हैं। इसलिए स्वतंत्रता का हमारे और हमारे देश के लिए बहुत महत्व है।
 

संविधान में स्वतंत्रता के अधिकार का स्थान

भारतीय संविधान का उद्देश्य विचार - अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वाधीनता सुनिश्चित करना है। इसलिए भारतीय संविधान में अनुच्छेद 19 से लेकर 22 तक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लेख किया गया है। जिसमें देश के सभी वर्ग के लोगों को ध्यान में रखते हुए प्रावधान दिए गए हैं, जिससे कोई भी व्यक्ति अपने मन से कोई भी कार्य कर सके, किन्तु वह कार्य गैर क़ानूनी और असंवैधानिक नहीं होना चाहिए और न ही उस कार्य से किसी अन्य व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होना चाहिए।

इस सम्बन्ध में भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19 सबसे अधिक जरुरी है। मूल संविधान के अनुच्छेद 19 द्वारा नागरिकों को 7 स्वतंत्रताएँ प्रदान की गई थीं, और इनमें से छठी स्वतंत्रता “सम्पत्ति की स्वतंत्रता” थी, जिसे भारतीय संविधान के 44 वें संवैधानिक संशोधन द्वारा संपत्ति के मौलिक अधिकार के साथ - साथ “संपत्ति की स्वतंत्रता” भी समाप्त कर दी गई है, किन्तु संपत्ति के अधिकार को अभी भी भारतीय संविधान से पूर्ण रूप से पृथक नहीं किया गया है, संपत्ति का अधिकार अभी भी एक संवैधानिक अधिकार है, और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 300 'अ' में वर्णित है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 में आज के समय केवल देश के नागरिकों के लिए 6 स्वतंत्रताओं का वर्णन किया गया है, जो कि निम्न हैं

  1. विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता

  2. अस्त्र - शस्त्र रहित और शांतिपूर्ण सम्मलेन की स्वतंत्रता

  3. समुदाय और संघ निर्माण की स्वतंत्रता

  4. भ्रमण की स्वतंत्रता

  5. निवास की स्वतंत्रता

  6. व्यवसाय की स्वतंत्रता
     

विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता

भारत के सभी नागरिकों को भारतीय संविधान के अनुसार किसी बात का विचार करने, भाषण देने और अपने व अन्य व्यक्तियों के विचारों के प्रचार की स्वतंत्रता प्राप्त है। प्रेस भी विचारों के प्रचार का एक साधन होने के कारण इसी में प्रेस की स्वतंत्रता भी सम्मिलित है। नागरिकों को विचार और अभिव्यक्ति की यह स्वतंत्रता असीमित रूप से प्राप्त नहीं है, बल्कि इसका भी अधिकार क्षेत्र सीमित है, कोई व्यक्ति केवल तब तक ही स्वतन्त्र है, जब तक उसके क्रियाकलाप से किसी अन्य व्यक्ति के मौलिक अधिकारों या उसकी स्वतंत्रता का हनन नहीं हो रहा है।
 

अस्त्र - शस्त्र रहित और शांतिपूर्ण सम्मलेन की स्वतंत्रता

व्यक्तियों के द्वारा अपने विचारों के प्रचार के लिए शांतिपूर्वक और बिना किन्हीं शस्त्रों के सभा या सम्मलेन का आयोजन भी किया जा सकता है, और उनके द्वारा जुलूस या प्रदर्शन का आयोजन भी किया जा सकता है। यह स्वतंत्रता भी असीमित नहीं है, और राज्य के द्वारा सार्वजनिक सुरक्षा के हित में किसी व्यक्ति की इस स्वतंत्रता को सीमित भी किया जा सकता है।
 

समुदाय और संघ निर्माण की स्वतंत्रता

संविधान के द्वारा सभी नागरिकों को समुदायों और संघों के निर्माण की स्वतंत्रता भी प्रदान की गई है, परन्तु यह स्वतंत्रता भी उन प्रतिबंधों के अधीन है, जिन्हें राज्य साधारण जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए लगाता है, इस स्वतंत्रता की आड़ में व्यक्ति ऐसे समुदायों का निर्माण नहीं कर सकता जो षड्यंत्र करें अथवा सार्वजनिक शान्ति और व्यवस्था को भंग करें, या ऐसा करने का प्रयास करे।
 

भ्रमण की स्वतंत्रता

भारत के सभी नागरिक बिना किसी प्रतिबंध या विशेष अधिकार - पत्र के सम्पूर्ण भारतीय क्षेत्र में घूम सकते हैं, यह अधिकार भारत के प्रत्येक नागरिक को प्राप्त है, कोई भी व्यक्ति या संस्था किसी व्यक्ति के इस अधिकार को छीन नहीं सकता है, यदि कोई व्यक्ति या संस्था ऐसा करता है, तो पीड़ित व्यक्ति बिना किसी रूकावट के सीधे अपनी बात रखने और अपना मौलिक अधिकार प्राप्त करने के लिए देश के माननीय सर्वोच्छ न्यायालय में अपील कर सकता है, जहां से उस व्यक्ति को इंसाफ प्रदान कराया जायेगा।
 

निवास की स्वतंत्रता

भारत के प्रत्येक नागरिक को भारत में कहीं भी रहने या बस जाने की स्वतंत्रता है। भ्रमण और निवास के सम्बन्ध में यह व्यवस्था संविधान द्वारा अपनाई गई इकहरी नागरिकता के अनुरूप है। भ्रमण और निवास की इस स्वतंत्रता पर भी राज्य सामान्य जनता के हित और अनुसूचित जातियों और जनजातियों के हितों में उचित प्रतिबंध लगा सकता है। जैसा कि 5 अगस्त 2019 से पहले तक भारत के किसी अन्य राज्य में रहने वाला कोई भी व्यक्ति जम्मू और कश्मीर में अपनी जमीन नहीं खरीद सकता था, किन्तु भारत की संसद में एक नया कानून पारित करके 5 अगस्त 2019 को इस प्रावधान को हटा दिया था, अब कोई भी व्यक्ति जम्मू और कश्मीर में भी अपनी खुद की संपत्ति का आनंद उठा सकता है।
 

व्यवसाय की स्वतंत्रता

भारत में सभी नागरिकों को इस बात की स्वतंत्रता है, कि वे अपनी आजीविका के लिए कोई भी पेशा, व्यापार या कारोबार कर सकते हैं, किन्तु वह कार्य गैरकानूनी या असंवैधानिक नहीं होना चाहिए, अन्यथा आपको भारत के कानून के अनुसार उचित दंड दिया जा सकता है। राज्य साधारणतया किसी व्यक्ति को न तो कोई विशेष नौकरी, व्यापार या व्यवसाय करने के लिए बाध्य करेगा और न ही उसके इस प्रकार के कार्य में बाधा डालेगा। किन्तु इस सबंध में भी राज्य को यह अधिकार प्राप्त है, कि वह कुछ व्यवसायों के सम्बन्ध में आवश्यक योग्यताएं निर्धारित कर सकता है, जिससे कि किसी विशेष कार्य को करने के लिए उस क्षेत्र में जानकार और अनुभवी लोग ही चुने जाएँ, तो वह कार्य भी सरलता से किया जा सकेगा, अथवा सरकार किसी कारोबार या उद्योग को पूर्ण अथवा आंशिक रूप से भी अपने हाथ में ले सकता है।


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