कोर्ट के आदेश पर दर्ज झूठे मुकदमे में गिरफ्तारी से कैसे बचें


सवाल

मेरे खिलाफ कोर्ट के आदेश पर धारा 156(3) के तहत धोखाधड़ी और जालसाजी का एक झूठा मुकदमा दर्ज हो गया है। शिकायतकर्ता ने फर्जी सबूतों के आधार पर धारा 420, 467 और 468 जैसी गंभीर धाराएं लगवाई हैं। पुलिस एफआईआर दर्ज कर चुकी है। मैं जानना चाहता हूं कि क्या पुलिस मुझे गिरफ्तार करके जेल भेज सकती है और क्या मुझे गिरफ्तारी से बचने के लिए स्टे या जमानत मिल सकती है?

उत्तर (3)


365 votes

जी हां, पुलिस आपको गिरफ्तार कर सकती है और यह मामला आपके लिए काफी गंभीर है। आपके खिलाफ जो धाराएं (420, 467, 468, 471) लगाई गई हैं, वे सभी 'संज्ञेय' (Cognizable) और 'गैर-जमानती' (Non-bailable) अपराध की श्रेणी में आती हैं। विशेष रूप से धारा 467 (अब भारतीय न्याय संहिता धारा 338) बहुत सख्त है जिसमें आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। ऐसे मामलों में पुलिस को वारंट की जरूरत नहीं होती और वे आपको कभी भी गिरफ्तार कर सकते हैं।

गिरफ्तारी से बचने के लिए आपके पास दो मुख्य कानूनी रास्ते हैं। पहला रास्ता है कि आप तुरंत सत्र न्यायालय (Sessions Court) या उच्च न्यायालय (High Court) में 'अग्रिम जमानत' (Anticipatory Bail) के लिए आवेदन करें। नई 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता' (BNSS) की धारा 482 (जो पहले सीआरपीसी 438 थी) के तहत आपको यह राहत मिल सकती है। अगर कोर्ट को लगता है कि आपको फंसाया जा रहा है, तो वे गिरफ्तारी पर रोक लगा देंगे।

दूसरा और सबसे प्रभावी रास्ता उच्च न्यायालय जाने का है। अगर आपके पास पक्के सबूत हैं कि शिकायतकर्ता ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर यह केस किया है, तो आप उच्च न्यायालय में एफआईआर रद्द (Quashing) करवाने की याचिका दायर कर सकते हैं। इसे 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता' की धारा 528 (जो पहले सीआरपीसी 482 थी) के तहत दायर किया जाता है।

जब आप क्वेशिंग के लिए हाई कोर्ट जाते हैं, तो आप साथ में 'गिरफ्तारी पर स्टे' (Stay on Arrest) की मांग भी कर सकते हैं। अगर हाई कोर्ट आपकी दलीलों से सहमत होता है, तो वह पुलिस को निर्देश दे सकता है कि जांच पूरी होने तक या अगली सुनवाई तक आपको गिरफ्तार न किया जाए। इसलिए, पुलिस के आने का इंतजार न करें और तुरंत किसी अनुभवी वकील के जरिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाएं।

186 votes

Apke bataye anusar agar apke upar koi case darz hua hai to aap ko dharao ki gambheerta ko dekhte hue jamanat le leni chahiye ...dursra ye ke aap sambandhit High Court me quashing petition Dal Kar muqadama kharij bhi kara Sakte hai ...
jyada Jan kari ke lie apni pasand ke qabeel adhiwakta bandhu se sampark kare..
dhanyawad,
Adv. Abdul Kader,
( Delhi High Court)

174 votes

आप को जेल भेज सकती है उससे पहले आप न्यायालय में याचिका के माध्यम से ऑर्डर तथा निचली अदालत के देश को चेंज कर सकते हैं आप जेल जाने से बच सकते हैं लेकिन जब तक आप रावत के आदेश को चैलेंज नहीं करोगे तब को राहत नहीं मिलेगी आपको यह साबित करना आवश्यक है कि आपके ऊपर 156 3 के अंतर्गत नाजायज


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