सर मेरे भाई जून 201 रविवार उज्जैन होस्ट


सवाल

सर, मेरे भाई 9 जून 2013 ,रविवार को उज्जैन होस्टल में पढ़ाई कर रहा था,वह उस समय डिपार्टमेंट से m.sc. कर रहा था।उसने होस्टल का किराया भी भरा है।किन्तु गाँव में एक घर की आगजनी‌ के मामले में उसके नाम से fir की गयी। fir में उसका नाम राहुल पिता पुरनसिंह जाति कुशवाह थी।जबकि उसका सही नाम राहुल पिता मोहनलाल कुम्हार है।पुलिस उसे अरेस्ट करने आई तो‌ उसने सही नाम से अग्रिम जमानत ले ली।कोर्ट ने और पुलिस ने नाम में सुधार कर दिया ।दुर्भाग्य से वकील ने यह मामला कोर्ट में नही उठाया और अन्य छह लोगों के साथ उसे भी सात वर्ष की सजा पिछले सप्ताह सुना दी।क्या हाईकोर्ट में उसे राहत मिलेगी या निर्दोष को सजा हो‌ जायेगी?

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अगर आपके भाई को जमानत मिल चुकी है और नाम के बदलाव की वजह से उनको कोर्ट द्वारा सजा सुनाई जा चुकी है तो आप को हाई कोर्ट में जाकर अपील करनी होगी जमानत के पेपर दिखा कर बताना होगा कि यह सब नाम की गलतफहमी की वजह से हुआ है . हाई कोर्ट से आप फिर से जमानत ले सकती है .


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