गंभीर धाराओं में सत्र न्यायालय से जमानत मिलने में कितना समय लगता है


सवाल

मेरे जीजाजी को मानव तस्करी और अनैतिक व्यापार से जुड़ी गंभीर धाराओं के तहत एक झूठे मुकदमे में फंसाया गया है। हमने पिछले सोमवार को सत्र न्यायालय में जमानत की अर्जी लगाई थी लेकिन दस दिन बीत जाने के बाद भी अब तक सुनवाई नहीं हुई है। मैं जानना चाहता हूं कि सत्र न्यायालय में जमानत पर सुनवाई होने में आमतौर पर कितना समय लगता है और क्या उन्हें जल्द जमानत मिलने की कोई उम्मीद है?

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सत्र न्यायालय (Sessions Court) में जमानत अर्जी दाखिल करने के बाद सुनवाई और फैसला आने में आमतौर पर 7 से 15 दिन का समय लग जाता है। यह देरी इसलिए होती है क्योंकि जैसे ही आप अर्जी लगाते हैं, कोर्ट पुलिस को और सरकारी वकील (Public Prosecutor) को 'नोटिस' (Notice) जारी करता है।

कानून के मुताबिक, जमानत पर बहस करने से पहले पुलिस को कोर्ट में 'केस डायरी' (Case Diary) और अपना जवाब पेश करना होता है। चूंकि आपके मामले में धारा 370A (मानव तस्करी - अब बीएनएस धारा 143) और अनैतिक व्यापार (PITA Act) की धाराएं लगी हैं, जो कि बहुत गंभीर और 'गैर-जमानती' (Non-bailable) अपराध हैं, इसलिए कोर्ट पुलिस की रिपोर्ट देखे बिना सुनवाई नहीं करेगा। कई बार पुलिस रिपोर्ट लाने में देरी करती है, जिससे तारीख आगे बढ़ जाती है।

आपके वकील को तुरंत कोर्ट में जाकर मामले को 'मेंशन' (Mention) करना चाहिए और जज साहब से निवेदन करना चाहिए कि पुलिस को जल्द रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया जाए। अगर कोर्ट में बहुत ज्यादा देरी हो रही है, तो यह आपके लिए चिंता का विषय है, लेकिन प्रक्रिया का हिस्सा भी है।

जहां तक जमानत मिलने की संभावना का सवाल है, यह पूरी तरह केस के सबूतों पर निर्भर करता है। अगर एफआईआर में कोई सीधा सबूत नहीं है या गवाहों के बयान कमजोर हैं, तो जमानत मिल सकती है। लेकिन अगर सत्र न्यायालय जमानत खारिज कर देता है, तो निराश न हों। आप तुरंत उच्च न्यायालय (High Court) में अर्जी लगा सकते हैं। अगर केस पूरी तरह झूठा है, तो आप उच्च न्यायालय में एफआईआर रद्द (Quashing) करवाने की याचिका भी डाल सकते हैं।

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आम तौर पर जमानत प्राप्त करने में 7 से 15 दिन का अधिकतम समय लगेगा, जिस तरह से एफआईआर और अन्य मापदंडों में तथ्यों के आधार पर इसे अनुमति दी जा सकती है या खारिज किया जा सकता है। एक बार, सत्र अदालत में जमानत के लिए आवेदन करने के बाद आपको अदालत के आदेश का इंतजार करना होगा जहां जमानत स्थानांतरित हो गई है, तब तक कोई दूसरा विकल्प नहीं है। हालाँकि, आप माननीय उच्च न्यायालय को Cr.P.C की कार्यवाही U / s.482 को रद्द करने की मांग कर सकते हैं। लेकिन प्रथम दृष्टया कानून स्थापित होने की प्रक्रिया का दुरुपयोग होना चाहिए तभी उच्च न्यायालय हस्तक्षेप कर सकता है और न्याय के सिरों को पूरा करने के लिए अदालत प्राथमिकी को रद्द कर सकती है।


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