विषय मेरे बेटे शंकर मौत जिम्मेदार दोष


सवाल

विषय : मेरे बेटे शंकर की मौत के जिम्मेदार दोषियों को गिरफ्तार करवाने बारे । (FIR-403) महोदय, उपर्युक्त विषय के संदर्भ में निवेदन यह है कि मैं बेगराज सुपुत्र श्री मेहरचंद, जाति कुम्हार, तहसील ऐलनाबाद,जिला सिरसा,  हरियाणा का निवासी हूँ । मेरा बेटा शंकर, उम्र 21 वर्ष एस.एस.जैन सुबोध पी.जी. कॉलेज, जयपुर में MCA पार्ट-2 का विद्यार्थी था । वह लगभग तीन साल से जयपुर में रहकर पढ़ाई कर रहा था । वह 14 अगस्त, 2019 से श्री दिलीप कालड़ा के घर 105, रामगली नं. 6, राजा पार्क, जयपुर में किराए का कमरा लेकर रह रहा था । पिछले काफी दिनों से उसे आरती सुपुत्री श्री महेंद्र सिंह यादव, लोकेश, विकास व उनके कुछ अन्य साथी परेशान कर रहे थे । आरती तथा उसके कई दोस्तों ने झूठे प्यार का नाटक करके शंकर को अपने जाल में फंसाया । इन्होंने मेरे बेटे से कई बार पैसे लिए तथा मारपीट भी की । इनकी ज्यादतियों से तंग आकर मेरे बेटे शंकर ने 28.08.2019 को अपने कमरे में ही फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली । इस घटना जी जानकारी भी हमें पुलिस ने बहुत देर से दी। जब जयपुर के मेरे रिश्तेदार घटना स्थल पर पहुँचे तब तक लाश को मोर्चरी में भेजा जा चुका

उत्तर (2)


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जी , आपके बेटे की लाश का अभी भी , नए सिरे से पोस्टमार्टम पोस्ट मॉर्टम हो सकता है, और यह पता लगाया जा सकता है, आपके बेटे शंकर का कत्ल हुआ था या उसने आत्महत्या की थी. पुलिस ने अपनी तरफ से शंकर का पोस्टमार्टम तो कराया होगा ही, जब उन्हें शंकर की लाश मिली होगी, तो उस पोस्टमॉर्टम के दौरान, हॉस्पिटल वालों ने विसकेरा प्रिजर्व किया होगा, उस वीसकैरा की जांच करके, आपको वीसकैरा रिपोर्ट प्राप्त होगी , उसके आधार पर यह प्रमाणित हो जाएगा कि आपके बेटे की आत्महत्या हुई थी या उसे कत्ल कर मारा गया था, इसके बाद ही, आपके बेटे के दोषियों के खिलाफ अदालत में मामला चलाया जा सकेगा. अगर आपके बेटे को, जिन लोगों का आपने जिक्र किया, उन्होंने उसे मानसिक रूप से अगर प्रताड़ित करते आए थे, इसकी वजह से आपके बेटे शंकर ने आत्महत्या की, तो उन पर अबेटमेंट ऑफ सुसाइड का मुकदमा चलेगा जो इंडियन पेनल कोड, एटीन सिक्सटी के अंतर्गत जघन्य अपराध की श्रेणी में आता है अथवा अगर आपके बेटे का कत्ल हुआ था, यह बात पोस्ट मॉर्टम रिपोर्ट या विसकेरा रिपोर्ट से साबित हो जाती है तो, आपके बेटे के दोषियों के खिलाफ मर्डर करने का मामला चलाया जाएगा, जिसके तहत उन्हें, मृत्युदंड अथवा आजीवन कारावास अथवा 7 से लेकर 10 साल के बीच के कारावास का फैसला कोर्ट द्वारा सुनाया जा सकता है.


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