क्या झूठे धोखाधड़ी केस और भगोड़ा घोषित होने पर कानूनी बचाव संभव है
सवाल
उत्तर (2)
यह स्थिति काफी गंभीर है क्योंकि आपके खिलाफ धारा 82 की कार्रवाई शुरू हो चुकी है। इसका मतलब है कि कोर्ट ने आपको 'फरार' (Absconder) घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अगर आपने तुरंत कदम नहीं उठाए, तो इसके बाद धारा 83 के तहत आपकी संपत्ति की 'कुर्की' (Attachment of Property) हो सकती है।
चूंकि आप कह रहे हैं कि आपने टिकट बनाकर दिए थे और ग्राहक ने यात्रा भी की थी, तो यह धोखाधड़ी का मामला बनता ही नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कई फैसलों में कहा है कि 'व्यावसायिक लेनदेन' (Commercial Transaction) या पैसे के विवाद को जबरदस्ती आपराधिक रंग नहीं दिया जा सकता। अगर सेवा में कोई कमी थी भी, तो यह 'उपभोक्ता विवाद' (Consumer Dispute) है, न कि धारा 420 (अब भारतीय न्याय संहिता धारा 318) का अपराध।
आपको तुरंत अपने वकील के माध्यम से उच्च न्यायालय (High Court) जाना चाहिए। वहां आपको 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता' BNSS की धारा 528 (जो पहले सीआरपीसी 482 थी) के तहत एफआईआर को रद्द करने की याचिका यानी 'क्वेशिंग पिटीशन' (Quashing Petition) दायर करनी होगी।
उच्च न्यायालय में आप सबूत दिखाएं कि टिकट बुक हुए थे और यात्रा पूरी हुई थी। यह साबित करेगा कि आपकी नीयत शुरुआत से साफ थी और कोई बेईमानी नहीं हुई। हाई कोर्ट को यह शक्ति है कि वह निचली अदालत की धारा 82 की कार्रवाई पर रोक (Stay) लगा सके और झूठी एफआईआर को रद्द कर सके। याद रखें, इस समय निचली अदालत में सरेंडर करने से पहले हाई कोर्ट से सुरक्षा लेना ज्यादा सुरक्षित विकल्प है।
जैसा कि आपने कहा के आप के ऊपर पैसा लेकर के टिकट बनाने बनाने का काम आपने किया आपके जैसे अकाउंट में पैसा जमा किया था पैसा मिलने के बाद आपने उसका टिकट बना दिया और वह घूमने चला गया है टिकट कब दिनेश टाइम गए घूम के आने के बाद केवट 420 आईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया और आपको मुकदमे में फंसा दिया आप ट्रैवल इन से चलाते हैं और आज के टाइम में आप के ऊपर 82 की कार्रवाई हो चुकी है एसएससी में आपको इससे बचने के लिए बहुत ही समझदार सुधारों की आवश्यकता है ताकि आपका मुकदमा में जान पड़ता है और आप इन सब कार्यवाही से बच पाए बस से आपकी जान छूट जाए
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