पोस्को के तहत झूठे आरोपों को कैसे संभालें


सवाल

मेरे भाई को पोस्को के झूठे मामले में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने एफआईआर की कॉपी देने से मना कर दिया है। घटना के 5 दिन बाद शिकायत दर्ज कराई गई है कि स्टोर मैनेजर भाई ने ट्रायल रूम के पास बच्ची को गलत तरीके से छुआ या निजी अंग दिखाए, जबकि सीसीटीवी में ऐसा कुछ नहीं है। इस स्थिति में जमानत और केस से बाहर निकलने के लिए हमें क्या कानूनी कदम उठाने चाहिए?

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पोस्को (POCSO) कानून बेहद सख्त है और इसमें गिरफ्तारी के बाद जमानत मिलना चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन झूठे आरोपों के मामले में कानून रक्षा के विकल्प भी देता है। सबसे पहले आपको यह समझना होगा कि पुलिस एफआईआर (FIR) की कॉपी देने से कानूनी रूप से मना नहीं कर सकती। चूंकि पुलिस सहयोग नहीं कर रही है, इसलिए आपको तुरंत एक वकील के माध्यम से संबंधित मजिस्ट्रेट की अदालत में एफआईआर की प्रमाणित कॉपी के लिए आवेदन करना चाहिए।

झूठे आरोपों से निपटने के लिए आपको निम्नलिखित रणनीतियों पर काम करना चाहिए:

  1. जमानत की अर्जी: पोस्को मामलों की सुनवाई विशेष अदालतों (Special Courts) में होती है। आपको सत्र न्यायालय (Sessions Court) में नियमित जमानत (Regular Bail) के लिए आवेदन करना होगा। चूंकि घटना 19 मई की है और शिकायत 25 मई को दर्ज हुई है, यह 6 दिनों की देरी आपके बचाव का एक मजबूत बिंदु है। अदालत में तर्क दें कि यह देरी किसी रंजिश या साजिश का परिणाम हो सकती है।

  2. सीसीटीवी और डिजिटल साक्ष्य: आपके भाई के निर्दोष होने का सबसे बड़ा सबूत स्टोर का सीसीटीवी फुटेज होगा। आप तुरंत स्टोर प्रबंधन से उस दिन का पूरा फुटेज सुरक्षित रखने को कहें। यदि पुलिस फुटेज को साक्ष्य के रूप में शामिल नहीं करती है, तो आप अदालत में धारा 94 बीएनएसएस (पुरानी 91 सीआरपीसी) के तहत फुटेज को रिकॉर्ड पर लेने के लिए आवेदन दे सकते हैं।

  3. झूठी शिकायत और विरोधाभास: पोस्को कानून की धारा 22 के तहत यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी को फंसाने के लिए झूठी शिकायत करता है, तो उसे भी सजा का प्रावधान है। वकील के जरिए बच्ची के पिता के बयानों में विरोधाभास ढूंढें, जैसे कि सार्वजनिक स्थान (स्टोर) पर ऐसी घटना की संभावना कितनी कम है और पिता ने 5 दिन तक इंतजार क्यों किया।

  4. सीडब्ल्यूसी (CWC) की भूमिका: आमतौर पर पोस्को में एफआईआर से पहले बाल कल्याण समिति (Child Welfare Committee) बच्चे की काउंसलिंग करती है। आप वकील के माध्यम से यह पता लगाएं कि क्या वहां बच्चे ने वही बात कही है जो एफआईआर में लिखी है।

  5. हाई कोर्ट में क्वैशिंग (Quashing): यदि आपके पास पुख्ता सबूत (जैसे सीसीटीवी) हैं जो साबित करते हैं कि ऐसी कोई घटना हुई ही नहीं, तो आप हाई कोर्ट में एफआईआर को रद्द (Quash) करवाने के लिए याचिका दायर कर सकते हैं।

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सब कुछ के पीछे कारण होना चाहिए, और 6-7 साल के बच्चे को एक विशेष व्यक्ति का नाम क्यों दिया जाएगा पीओसीएसओ के तहत प्राथमिकी से पहले भी अन्यथा सिफारिश की जाती है, सीडब्ल्यूसी - बाल कल्याण समिति बच्चे को सुनती है और केवल तभी एफआईआर पंजीकृत होती है पीओसीएसओ के तहत एक झूठे मामले के लिए भी, कुछ गठबंधन है ऐसा लगता है कि पुलिस ने पीओसीएसओ अधिनियम की धारा 8 या 10 लागू करनी होगी यदि आप पुलिस से एफआईआर प्राप्त करने में सक्षम नहीं हैं, तो कुछ वकील से संपर्क करें, वह अदालत से एफआईआर की प्रति प्राप्त कर सकता है, क्योंकि प्रत्येक प्राथमिकी की प्रति संबंधित मजिस्ट्रेट को भेजी जाती है


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