पुलिस को लगातार झूठी शिकायत करने पर क्या कार्रवाई की जा सकती है


सवाल

एक व्यक्ति आपराधिक मानसिकता के साथ मेरे खिलाफ बार-बार पुलिस और अन्य सरकारी कार्यालयों में झूठी शिकायतें कर रहा है। पुलिस जांच में ये शिकायतें झूठी पाई गई हैं। ऐसे व्यक्ति को रोकने और उसके खिलाफ कानूनी सबक सिखाने के लिए पुलिस और प्रशासन को क्या कदम उठाने चाहिए?

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अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर और गलत इरादे से पुलिस या सरकारी विभागों को गुमराह करता है, तो कानून में उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही के प्रावधान हैं। सबसे पहले आपको यह समझना होगा कि अब पुराने आईपीसी (IPC) की जगह भारतीय न्याय संहिता (BNS) लागू हो चुकी है। बार-बार झूठी सूचना देकर सरकारी मशीनरी का समय बर्बाद करने वाले व्यक्ति के खिलाफ पुलिस खुद भी एक्शन ले सकती है और आप भी अपनी तरफ से कानूनी मोर्चा खोल सकते हैं।

आप उस व्यक्ति के खिलाफ निम्नलिखित कानूनी कदम उठा सकते हैं:

  1. सरकारी कर्मचारी को झूठी सूचना देना: भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 217 (पुरानी आईपीसी धारा 182) के तहत पुलिस उस व्यक्ति पर मुकदमा दर्ज कर सकती है। यदि कोई व्यक्ति किसी सरकारी अधिकारी को ऐसी झूठी जानकारी देता है जिससे अधिकारी अपनी शक्ति का इस्तेमाल किसी बेगुनाह को परेशान करने के लिए करे, तो दोषी को जेल या जुर्माना हो सकता है। आपको उन सभी मामलों की क्लोजर रिपोर्ट (Closure Report) की कॉपी लेकर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को एक शिकायत देनी चाहिए कि इस व्यक्ति पर धारा 217 के तहत कार्रवाई की जाए।

  2. झूठा आपराधिक मामला दर्ज कराना: यदि उसने आपके खिलाफ गंभीर अपराध की झूठी प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई है, तो आप धारा 248 (पुरानी आईपीसी धारा 211) के तहत मामला दर्ज करा सकते हैं। यह धारा विशेष रूप से उन लोगों के लिए है जो किसी को नुकसान पहुँचाने के इरादे से झूठी कानूनी कार्यवाही शुरू करते हैं।

  3. मानहानि और दीवानी मुकदमा: आप उस व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मानहानि (Criminal Defamation) का केस दर्ज कर सकते हैं, क्योंकि वह झूठे आरोप लगाकर समाज और दफ्तर में आपकी छवि खराब कर रहा है। इसके साथ ही, आप दीवानी अदालत (Civil Court) में द्वेषपूर्ण अभियोजन (Malicious Prosecution) के लिए हर्जाने का मुकदमा भी कर सकते हैं, जिसमें आप मानसिक उत्पीड़न और कानूनी खर्च के मुआवजे की मांग कर सकते हैं।

  4. उच्च अधिकारियों को आवेदन: चूंकि वह व्यक्ति अन्य सरकारी कार्यालयों में भी शिकायतें कर रहा है, इसलिए आपको उन विभागों के प्रमुखों को एक लिखित आवेदन देना चाहिए। इसमें पुलिस जांच की उन रिपोर्टों को संलग्न करें जिनमें शिकायतें झूठी पाई गई हैं। इससे भविष्य में उसकी किसी भी नई शिकायत पर विभाग पहले से सतर्क रहेगा और उसे गंभीरता से नहीं लेगा।

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दर्ज किए गए झूठे मामले के संबंध में, आपको मामले के तथ्यों को बताते हुए पुलिस को एक लिखित सूचना भेजनी चाहिए और यह भी कि आप मामले की जांच में पूरा सहयोग देने के लिए तैयार हैं। इसके अलावा, आप दुर्भावनापूर्ण अभियोजन के लिए एक सिविल मुकदमा दायर कर सकते हैं (केवल एक बार जब आप अदालत से बरी हो जाते हैं) और मानहानि का दावा करते हैं और आपके द्वारा उत्पीड़न के लिए क्षतिपूर्ति का मुआवजा। विकल्प में, आप किसी के खिलाफ चोट या आपराधिक मानहानि के लिए धारा 500 के तहत झूठे आरोप लगाने के लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 211 के तहत भी मामला दर्ज कर सकते हैं।


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