कैसे साबित करें कि दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर जाली है


सवाल

मेरे पास तीन कागजात हैं। पहले दो पर असली साइन हैं, पर तीसरे पर साइन नकली लग रहे हैं। अजीब बात यह है कि जिस व्यक्ति के साइन हैं, वह खुद कह रहा है कि तीसरा साइन भी उसी का है। क्या मैं हैंडराइटिंग एक्सपर्ट की मदद से कोर्ट में यह साबित कर सकता हूँ कि तीसरा साइन जाली है?

उत्तर (2)


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हाँ, आप इसे साबित करने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन यह मामला थोड़ा पेचीदा है क्योंकि जिस व्यक्ति के हस्ताक्षर (Sign) हैं, वह खुद उन्हें अपना बता रहा है। कानून में इसे "हैंडराइटिंग एक्सपर्ट की राय" के जरिए चुनौती दी जा सकती है।

यहाँ समझने वाली मुख्य बातें ये हैं:

1. हैंडराइटिंग एक्सपर्ट की भूमिका (Section 45)

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Evidence Act) की धारा 45 के तहत, कोर्ट हैंडराइटिंग एक्सपर्ट की राय ले सकता है। एक्सपर्ट तीनों दस्तावेजों का मिलान करेगा और अपनी रिपोर्ट देगा कि तीसरे कागज पर हस्ताक्षर करने का तरीका (जैसे पेन का दबाव, अक्षरों का झुकाव और बनावट) पहले दो कागजों से मिलता है या नहीं।

2. अगर व्यक्ति खुद झूठ बोल रहा हो तो?

अगर हस्ताक्षर करने वाला व्यक्ति खुद कह रहा है कि साइन उसी के हैं, तो कोर्ट आमतौर पर उसकी बात मानता है। लेकिन, अगर आपको लगता है कि वह दबाव में या किसी साजिश के तहत झूठ बोल रहा है, तो आप एक्सपर्ट की रिपोर्ट के आधार पर उसके 'क्रॉस एग्जामिनेशन' के दौरान उसे घेर सकते हैं। आप कोर्ट से कह सकते हैं कि आँखों से देखने पर ही साइन बिल्कुल अलग लग रहे हैं, इसलिए एक्सपर्ट की जांच ज़रूरी है।

3. क्या एक्सपर्ट की रिपोर्ट ही आखिरी फैसला है?

नहीं, हैंडराइटिंग एक्सपर्ट की रिपोर्ट को कोर्ट एक "सहायक सबूत" (Collaborative Evidence) मानता है। यह अपने आप में अंतिम फैसला नहीं होता। जज एक्सपर्ट की रिपोर्ट को मान भी सकता है और नहीं भी। जज खुद भी धारा 73 के तहत हस्ताक्षरों की तुलना कर सकता है।

4. आपको क्या करना चाहिए?

  • एक्सपर्ट के लिए अर्जी दें: अपने वकील के जरिए कोर्ट में आवेदन दें कि दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच (CFSL या किसी प्राइवेट मान्यता प्राप्त लैब से) कराई जाए।

  • गवाहों से पूछताछ: अगर उन कागजों पर किसी गवाह के साइन हैं, तो उनसे पूछताछ करें।

  • उम्र और समय का अंतर: यह भी देखें कि क्या दस्तावेजों के बीच बहुत सालों का अंतर है, क्योंकि उम्र के साथ इंसान के साइन थोड़े बदल सकते हैं।

भले ही वह व्यक्ति अपने साइन स्वीकार कर रहा हो, अगर एक्सपर्ट यह साबित कर दे कि साइन करने की तकनीक बिल्कुल अलग है, तो आप उस दस्तावेज को 'फर्जी' करार दिलवा सकते हैं।

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भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 45 के प्रावधानों के तहत एक हैंड्रेटिंग विशेषज्ञ का विचार एक माध्यमिक साक्ष्य के रूप में माना जाता है। न्यायालय विशेषज्ञ के विकल्प पर निर्भर नहीं हो सकता है क्योंकि यह साक्ष्य का एक अनिवार्य प्रमाण नहीं है। आप क्रॉस एग्ज़ॅमिनेशन के लिए विशेषज्ञ विकल्प का उपयोग कर सकते हैं


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अनुवादित किया गया मूल उत्तर यहां पढ़ा जा सकता है।


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