आपसी समझौते से पुलिस केस वापस लेने की प्रक्रिया क्या है
सवाल
मेरे चचेरे भाई ने पिछले साल मुझ पर लड़ाई-झगड़ा करने और गोली चलाने का झूठा आरोप लगाकर केस दर्ज करवाया था जिसमें मुझे जमानत मिल चुकी है। अब हमारा आपस में समझौता हो गया है और पुलिस ने अभी तक चार्जशीट भी दाखिल नहीं की है। मैं एक छात्र हूं और जानना चाहता हूं कि कोर्ट से यह केस पूरी तरह वापस लेने या खत्म करवाने की क्या प्रक्रिया है ताकि मेरे करियर पर कोई असर न पड़े?
उत्तर (2)
चूंकि आप एक छात्र हैं, इसलिए केस को पूरी तरह खत्म करवाना बहुत जरूरी है। केस वापस लेने की प्रक्रिया इस बात पर निर्भर करती है कि एफआईआर में कौन सी धाराएं लगी हैं।
अगर मामला केवल साधारण मारपीट का है, तो कानून में इसे 'शमनीय अपराध' (Compoundable Offense) माना जाता है। ऐसे मामलों में आप और आपका भाई निचली अदालत में एक 'समझौता आवेदन' (Compromise Application) दे सकते हैं। 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता' (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita - BNSS) की धारा 359 (जो पहले CrPC 320 थी) के तहत कोर्ट समझौते के आधार पर केस वहीं खत्म कर देगा।
लेकिन, आपने 'गोली चलाने' (Shooting) का जिक्र किया है। यह आर्म्स एक्ट और हत्या के प्रयास (धारा 307 या BNS 109) जैसा गंभीर मामला हो सकता है। ऐसे गंभीर अपराध 'गैर-शमनीय' (Non-compoundable) होते हैं, यानी इनमें निचली अदालत समझौता स्वीकार नहीं कर सकती।
ऐसी स्थिति में आपको अपने राज्य के उच्च न्यायालय (High Court) में जाना होगा। वहां आपको BNSS की धारा 528 (जो पहले CrPC 482 थी) के तहत 'एफआईआर निरस्तीकरण' (FIR Quashing) की याचिका दायर करनी होगी। हाई कोर्ट में आपको बताना होगा कि यह पारिवारिक विवाद था और अब दोनों पक्षों में समझौता हो गया है। अगर हाई कोर्ट एफआईआर रद्द (Quash) कर देता है, तो आपके ऊपर से दाग पूरी तरह हट जाएगा और आपके करियर पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा।
चूंकि पुलिस ने अभी चार्जशीट दाखिल नहीं की है, आप जांच अधिकारी (IO) को भी अपने समझौते का लिखित हलफनामा दे सकते हैं। कई बार पुलिस समझौते के आधार पर खुद ही कोर्ट में 'क्लोजर रिपोर्ट' (Closure Report) लगा देती है, जिससे केस बंद हो जाता है।
एफआईआर किस धारा के अंतर्गत दर्ज हुई है अपराध की प्रकृति क्या है यह जाने बिना सलाह देना मुश्किल है फिर भी आप की जानकारी के लिए यह बताना चाहेंगे की आमतौर पर छोटे-मोटे झगड़े और मारपीट आदि में केस करने वाला व्यक्ति अपना केस वापस ले सकते हैं। केस वापस लेने के लिये सीआरपीसी की धारा-320 के तहत कोर्ट में आवेदन किया जा सकता है। इस आवेदन में कोर्ट को बताया जाता है कि वादी और प्रतिवादी के बीच समझौता हो गया है अतः: इस केस को रद्द कर दिया जाए कई मामलों में कोर्ट भी केस रद्द कर सकता है।
गंभीर किस्म के अपराध जिनमें सजा 3 साल से अधिक हो उन में अपनी मर्जी से केस वापस नहीं लिया जा सकता। लेकिन यदि फिर भी दोनों पार्टियों में समझौता हो जाता है तो केस ख़त्म करने के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दी जाती है। इसके लिए वादी को सीआरपीसी की धारा-482 के अंतर्गत कोर्ट को अर्जी देनी होती है कि उसका प्रतिवादी या आरोपी से समझौता हो गया है और दोनों मिलकर केस ख़त्म करना चाहते हैं।
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