कोर्ट से बरी होने के फैसले के खिलाफ अपील करने की समय सीमा क्या है


सवाल

मेरे खिलाफ धारा 506 और 509 का एक मुकदमा था जिसमें निचली अदालत (JMFC) ने मुझे निर्दोष साबित करते हुए बरी कर दिया है। मैं यह जानना चाहता हूं कि मेरे बरी होने के बाद दूसरी पार्टी कितने दिनों के भीतर इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती दे सकती है? जिला कोर्ट या हाई कोर्ट में अपील दायर करने की कानूनी समय सीमा और प्रक्रिया क्या है?

उत्तर (2)


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निचली अदालत से बरी होने के बाद, दूसरी पार्टी (शिकायतकर्ता या सरकार) के पास अपील करने के लिए आमतौर पर 60 से 90 दिनों का समय होता है। यह समय सीमा इस बात पर निर्भर करती है कि अपील कौन कर रहा है और केस किस तरह का था।

'परिसीमा अधिनियम' (Limitation Act) के अनुसार, अगर यह 'शिकायत का मामला' (Complaint Case) था, यानी पुलिस एफआईआर के बजाय सीधे कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई गई थी, तो शिकायतकर्ता को हाई कोर्ट में अपील करने के लिए 'विशेष अनुमति' (Special Leave to Appeal) लेनी पड़ती है। इसके लिए समय सीमा 60 दिन है।

अगर यह पुलिस केस था (सरकार बनाम आरोपी), तो राज्य सरकार को बरी होने के आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील करने के लिए 90 दिनों का समय मिलता है। हालांकि, पीड़ित (Victim) के पास भी अपील का अधिकार होता है। अगर अपराध छोटा है तो अपील 'सत्र न्यायालय' (Sessions Court) में हो सकती है, जिसके लिए समय सीमा आमतौर पर 30 से 60 दिन होती है।

नई 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता' (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita - BNSS) या पुरानी सीआरपीसी के तहत, बरी होने के फैसले को चुनौती देने की प्रक्रिया जटिल होती है। कोर्ट आसानी से दोषमुक्ति (Acquittal) के फैसले को नहीं बदलता जब तक कि निचले जज ने कानून की भारी अनदेखी न की हो। इसलिए, अगर 90 दिन बीत चुके हैं और आपको कोई नोटिस नहीं मिला है, तो आप मान सकते हैं कि मामला खत्म हो गया है।

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दोषमुक्ति के आदेश के खिलाफ अपील 90 दिनों के भीतर उच्च न्यायालय मे कि जाती है। आपराधिक प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 378(1) (संक्षिप्त रूप में "सीआरपीसी" कहलाती है) लोक अभियोजक द्वारा बरी किए जाने के आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय के समक्ष राज्य सरकार के निर्देश पर अपील प्रस्तुत करने का प्रावधान करती है, चाहे वह मूल हो या अपीलीय, उच्च न्यायालय के अलावा किसी अन्य न्यायालय द्वारा पारित।
सीआरपीसी की धारा 378(4) में प्रावधान है कि शिकायत पर मामला कायम होने पर शिकायतकर्ता उच्च न्यायालय में अपील पेश कर सकता है। आपराधिक प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 200 के तहत एक शिकायत पर एक मामला स्थापित किया जाता है। लेकिन, अपील पेश करने से पहले, दोषमुक्ति के आदेश के खिलाफ अपील करने के लिए विशेष अनुमति के लिए एक याचिका उच्च न्यायालय के समक्ष दायर की जानी चाहिए। यदि ऐसी विशेष अनुमति प्रदान की जाती है, तो ही अपील गुण-दोष के आधार पर सुनी जाएगी।


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