My self Tripresh Mishra frm Deria Uar pradesh My faher is gv emplyee f Cane deparmen f UP gv He i


सवाल

My self Tripuresh Mishra from Deoria Uttar pradesh My father is govt employee of Cane department of UP govt. He is died in covid 19 in his during service time. My father and cane department between a dispute that post was state govt employ or cane corporate body . My father is filed a sute in high cort of allahabad at lucknow bench that court was decide by the my father is employee of state govt. But department goes appeal of devison bench Devision bench decision agenst of my father and department is not given a proper service benifits of my family. Please advise me Attached judgment copy of single and division bench

उत्तर (2)


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आपके पिता के साथ हुई यह स्थिति अत्यंत दुखद है, और आपके परिवार को सेवा लाभ से वंचित रखना बहुत ही पीड़ादायक है। आपके द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, आपके पिता का मामला न्यायालय में दो चरणों में फैसला हो चुका है, जिसमें एकल पीठ ने आपके पिता के पक्ष में फैसला देते हुए उन्हें राज्य सरकार का कर्मचारी माना, लेकिन खंडपीठ ने अपील सुनने के बाद उस फैसले को पलटते हुए आपके पिता के विरुद्ध निर्णय दे दिया है। इस कारण विभाग आपको सेवा लाभ नहीं दे रहा है। इस समय आपकी कानूनी लड़ाई का मार्ग पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, क्योंकि भारत की न्यायिक प्रणाली में उच्चतम न्यायालय में अपील का अधिकार सुरक्षित है।

आपके लिए पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम यह है कि आप अपने पास उपलब्ध एकल पीठ और खंडपीठ दोनों के निर्णय की प्रतियों को एकत्रित करें। इन दोनों फैसलों में यह स्पष्ट दर्शाया गया होना चाहिए कि न्यायालय ने आपके पिता की नियुक्ति की प्रकृति को किस आधार पर राज्य सरकार या निगम का कर्मचारी माना है। इन दस्तावेजों को लेकर आपको किसी अनुभवी वरिष्ठ अधिवक्ता से संपर्क करना चाहिए, जो उच्चतम न्यायालय में प्रैक्टिस करते हों। उन्हें पूरा मामला बताएं और खंडपीठ के फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर करने के लिए कहें।

इसके अतिरिक्त, कानूनी प्रक्रिया में एक और महत्वपूर्ण बिंदु है। यदि खंडपीठ के फैसले में कानून का कोई गंभीर उल्लंघन हुआ है, या यदि फैसला किसी अन्य न्यायिक मिसाल के खिलाफ है, तो उच्चतम न्यायालय उस फैसले को पलट सकता है। इस बीच, यदि आपके पिता की मृत्यु बिना किसी सेवा लाभ के हुई है, तो आप विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को एक औपचारिक पत्र लिखकर बता सकते हैं कि आप सर्वोच्च न्यायालय जा रहे हैं और वे आपके परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए अंतरिम राहत के रूप में पेंशन जैसी कोई राशि देने पर विचार करें। हालांकि, प्रशासनिक स्तर पर यह संभावना कम है, लेकिन कानूनी मार्ग पर आपको अपनी पूरी ताकत लगानी होगी। उच्चतम न्यायालय जाने के लिए एक निश्चित समय सीमा (लिमिटेशन) होती है, इसलिए बिना देरी किए अपने वकील के साथ सभी आवश्यक कागजात तैयार करें और याचिका दायर करें। यह आपका एकमात्र और अंतिम कानूनी विकल्प है, जिससे आपको न्याय मिलने की पूरी उम्मीद है।


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