भारत में सरोगेसी कानून - नियम, वैधता और माता पिता के अधिकार



भारत में जिन माता पिता को लोगों को बच्चे पैदा करने में दिक्कत आती है, उनके लिए सरोगेसी एक बहुत अच्छा विकल्प है। लेकिन इस प्रक्रिया से कई कानूनी, चिकित्सा और सामाजिक पहलू जुड़े होते हैं, जिनका सही तरीके से पालन न होने पर कानूनी विवाद उत्पन्न हो सकते है। पैसे के लालच और गलत एग्रीमेंट की वजह से यह प्रक्रिया कई बार विवादों में घिर जाती है, जिससे हर दिन नए मामले सामने आते हैं। इसलिए आज के लेख में हम सरोगेसी के विषय से जुड़ी पूरी जानकारी आपको देंगे जैसे कि, सरोगेसी क्या है, यह कब और कैसे की जाती है? भारत में सरोगेसी नियम, कानून और माता पिता के अधिकार?

भारत में जिन माता–पिता को बच्चे होने में दिक्कत आती है, उनके लिए सरोगेसी एक अच्छा विकल्प बन गया है। सरोगेसी में कोई दूसरी महिला (सरोगेट) बच्चे को अपने गर्भ में रखती है और जन्म के बाद वह बच्चा इच्छित माता पिता का होता है। लेकिन भारत में यह प्रक्रिया सख्त नियमों के तहत होती है - क्योंकि अब पैसे देकर सरोगेसी कराना पूरी तरह बंद है और सिर्फ परोपकारी सरोगेसी ही मान्य है। नियमों के अनुसार, सरोगेसी करवाने वाले दंपति भारतीय, शादीशुदा और तय आयु सीमा में होने चाहिए। सरोगेट भी परिवार की करीबी महिला होनी चाहिए और उसकी अपनी एक संतान होनी चाहिए। इसके अलावा, पूरी प्रक्रिया के लिए जिला मेडिकल बोर्ड की अनुमति और एक कानूनी एग्रीमेंट ज़रूरी है। इस आर्टिकल में आप आसान भाषा में जानेंगे कि सरोगेसी क्या है, यह कैसे होती है, इसके क्या नियम - कानून हैं, और इसमें माता पिता व सरोगेट के क्या अधिकार होते हैं।

भारत में सरोगेसी को लेकर कई कानून और नियम बनाये गए हैं, लेकिन इन नियमों और कानूनों के बावजूद आज भी इस प्रक्रिया में एग्रीमेंट का उल्लंघन, बच्चे के अधिकार, और सरोगेट माँ के अधिकारों का हनन होते रहते हैं। बहुत सारे लोग इस प्रक्रिया की सही जानकारी न होने के कारण कानूनी मामलों में फंस जाते है। इसलिए इस लेख में हम सरोगेसी से जुड़े सभी कानूनी पहलुओं और इसकी प्रक्रिया को समझेंगे व साथ ही यह भी जानेंगे कि अगर कोई कानूनी विवाद होता है तो उसका समाधान कैसे किया जा सकता है।


विषयसूची

  1. सरोगेसी क्या होती है?
  2. भारत में सरोगेसी के लिए नियम व पात्रता मापदंड क्या है?
  3. सरोगेसी के लिए भारत में कानून - कानूनी या गैरकानूनी?
  4. सरोगसी में माता-पिता व सरोगेट माँ के क्या कानूनी अधिकार होते है?
  5. सरोगेसी की प्रक्रिया कैसे होती है?
  6. सरोगेसी क्यों व किन कारणों से करवाई जाती है?
  7. इच्छुक माता-पिता के लिए पात्रता व नियम
  8. सरोगेट माँ (Surrogate Mother) के लिए पात्रता व नियम
  9. भारत में वाणिज्यिक सरोगेसी (Commercial Surrogacy) पर प्रतिबंध
  10. परोपकारी सरोगेसी (Altruistic Surrogacy)
  11. सरोगेसी में इच्छुक माँ बाप के अधिकार (Parents Rights)
  12. सरोगेसी में सरोगेट मां के अधिकार (Surrogate Mother​ Rights)
  13. सरोगेसी के लिए किन-किन दस्तावेजों की आवश्यकता पड़ती है?
  14. इंडिया में सरोगेसी के लिए कानूनी प्रक्रिया - Surrogacy Process in India
  15. 1. सरोगेट मां को चुनना
  16. 2. इच्छुक माता-पिता और सरोगेट मां के बीच कानूनी समझौता (Legal Agreement)
  17. 3. मेडिकल प्रक्रिया के लिए मेडिकल बोर्ड की अनुमति लेना
  18. 4. प्रक्रिया का प्रमाणपत्र और अस्पताल की स्वीकृति
  19. 5. न्यायिक मंजूरी के लिए इच्छुक माता-पिता को कोर्ट में आवेदन देना
  20. 6. बच्चे के जन्म के बाद कानूनी दस्तावेज़
  21. 7. सरोगेट मां के अधिकारों का खत्म होना
  22. सरोगेसी से जुड़े कानूनी विवाद और उनके समाधान
  23. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल


सरोगेसी क्या होती है?

सरोगेसी (Surrogacy) प्रक्रिया में एक महिला (जिसे सरोगेट माँ कहते हैं) किसी और शादीशुदा दंपत्ति (Married Couple) के लिए गर्भधारण (Pregnancy) करती है और बच्चे को जन्म देती है। यह प्रक्रिया उस समय अपनाई जाती है जब कोई दंपत्ति (इच्छुक माता-पिता) खुद से बच्चे को जन्म देने में असमर्थ होते हैं।

मान लीजिए, कोई पति पत्नी है जो बच्चा चाहते है, लेकिन किसी वजह से वह खुद बच्चा पैदा नहीं कर पा रहे है। ऐसे में वे किसी अन्य महिला से बच्चा पैदा करने के लिए मदद लेते हैं। इस महिला को सरोगेट मां (Surrogate Mother) कहते हैं।



सरोगेसी की प्रक्रिया कैसे होती है?

इस प्रक्रिया में किसी दंपत्ति यानि (इच्छुक माता-पिता) से अंडा और शुक्राणु (Egg & Sperm) लिया जाता है, इन दोनों को मिलाकर एक भ्रूण (Embryo) बनाया जाता है। जिसके बाद इस भ्रूण को सरोगेट माँ के गर्भ (Fetus) में रख दिया जाता है। इस प्रक्रिया के बाद सरोगेट माँ 9 महीने तक बच्चे को अपने गर्भ में पालती है, और फिर बच्चे को जन्म देती है। इस प्रक्रिया के बाद जन्मे बच्चे को सरोगसी प्रक्रिया करवाने वाले शादी शुदा दंपत्ति को सौंप दिया जाता है।



सरोगेसी क्यों व किन कारणों से करवाई जाती है?

सरोगेसी उस स्थिति में करवाई जाती है जब:
 

  • यदि किसी महिला को गर्भधारण में समस्या हो रही हो या गर्भधारण करना उसके स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा हो।
  • पुरुष या महिला में प्रजनन (Reproductive) संबंधित कोई शारीरिक समस्या हो।
  • अगर महिला को गर्भधारण से संबंधित गंभीर बीमारियां, जैसे दिल की बीमारी या किडनी की समस्या है।
  • बार-बार गर्भपात (Abortion) होने की समस्या।
  • जब किसी महिला की उम्र अधिक हो और वह अपनी उम्र ज्यादा होने का कारण बच्चा पैदा करने में सक्षम न हो।
 

भारत में सरोगेसी के लिए नियम व पात्रता मापदंड क्या है?



इच्छुक माता-पिता के लिए पात्रता व नियम

  • भारतीय नागरिक होना: सबसे पहले तो, बच्चे की इच्छा रखने वाले माता-पिता को भारत का नागरिक (Indian Citizen) होना जरूरी है।
  • शादीशुदा होना: दोनों को शादीशुदा (Married) होना चाहिए और उनकी शादी को कम से कम 5 साल हो चुके होने चाहिए।
  • उम्र की सीमा: महिला की उम्र 23 से 50 साल और पुरुष की उम्र 26 से 55 साल के बीच होनी चाहिए।
  • डॉक्टर का बांझपन प्रमाणपत्र: किसी डॉक्टर को यह प्रमाणित (Certified) करना होगा कि यह दंपत्ति प्राकृतिक (Natural) तरीके से बच्चा पैदा नहीं कर सकता।
 

सरोगेट माँ (Surrogate Mother) के लिए पात्रता व नियम

  • उम्र की सीमा: सरोगेट मां की उम्र 25 से 35 साल के बीच होनी चाहिए।
  • शादीशुदा होना: उस महिला को शादीशुदा होना चाहिए और पहले से कम से कम एक स्वस्थ बच्चा हो।
  • रिश्तेदार होना: सरोगेट माता इच्छुक माता-पिता की रिश्तेदार होनी चाहिए।
  • स्वस्थ होना: सरोगेट माँ को शारीरिक और मानसिक (Physically or Mentally) रूप से स्वस्थ होनी चाहिए ताकि वह गर्भावस्था को सहन कर सके।
 

सरोगेसी के लिए भारत में कानून - कानूनी या गैरकानूनी?

सरोगेसी (Surrogacy) एक संवेदनशील और जटिल प्रक्रिया है, भारत में इस प्रक्रिया को नियंत्रित करने के लिए "सरोगेसी (रेगुलेशन) एक्ट, 2021" लागू किया गया। यह अधिनियम सरोगेट माताओं की सुरक्षा और बच्चों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करता है। आइए इस अधिनियम के प्रमुख बिंदुओं को विस्तार से समझते हैं:



भारत में वाणिज्यिक सरोगेसी (Commercial Surrogacy) पर प्रतिबंध

भारत में "सरोगेसी (रेगुलेशन) एक्ट, 2021" के तहत कमर्शियल सरोगेसी पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया गया है। इस प्रकार की सरोगेसी में लिए सरोगेट मां को बच्चा पैदा करने के लिए बहुत सारे पैसे या कोई अन्य लाभ देकर यह काम करवाया जाता था। इसमें चिकित्सा खर्च (Medical Expenses) के अलावा अलग से बहुत सारे पैसे उस महिला को दिए जाते है, जो सरोगेसी को व्यावसायिक धंधा (Commercial business) बना सकता था। इसका मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को सरोगेसी के लिए मजबूर होने से बचाना है।



परोपकारी सरोगेसी (Altruistic Surrogacy)

परोपकारी सरोगेसी (नि:स्वार्थ सरोगेसी) का मतलब है कि कोई महिला बिना किसी पैसों के लालच के केवल इंसानियत के लिए, भावनाओं या रिश्ते की मजबूती के लिए किसी अन्य व्यक्ति या शादीशुदा जोड़े के लिए बच्चे को जन्म देती है। इस प्रक्रिया में, सरोगेट मां को सिर्फ गर्भावस्था और बच्चे पैदा होने तक लगने वाले सभी चिकित्सा खर्चों और अन्य आवश्यकताओं के लिए पैसे दिए जाता है, लेकिन इससे अलग कोई अतिरिक्त पैसा नहीं दिया जाता। परोपकारी सरोगेसी में सरोगेट मां को इच्छुक माता-पिता के परिवार का करीबी रिश्तेदार (Close Relative) होना चाहिए।
 



सरोगसी में माता-पिता व सरोगेट माँ के क्या कानूनी अधिकार होते है?

इस प्रक्रिया के द्वारा बच्चा प्राप्त करने की चाहत रखने वाले दंपत्ति व सरोगेट माँ को कानूनी रुप से कई अधिकार दिए जाते है। इन अधिकारों को समझकर कर भविष्य में आने वाले विवादों (Dispute) से बचा जा सकता है। आइए इन अधिकारों को आसान भाषा में समझते है:-
 



सरोगेसी में इच्छुक माँ बाप के अधिकार (Parents Rights)

  1. बच्चे पर पूरा अधिकार: इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद जन्मे बच्चे पर माता-पिता का पूरा अधिकार होता है। बच्चे के जन्म के बाद सरोगेट मां का बच्चे से कोई कानूनी अधिकार या संबंध नहीं रहता है।
  2. कानूनी अनुबंध का अधिकार: इच्छुक माता-पिता के पास यह अधिकार होता है कि वे सरोगेट मां के साथ एक कानूनी एग्रीमेंट (Legal Agreement) बनवा ले, जिसमें सभी शर्तें, दायित्व और अधिकारों के बारे में सभी बाते लिखी होती है। इस एग्रीमेंट में बच्चे की देखभाल, खर्चों की जिम्मेदारी जैसी बातें भी शामिल होता है।
  3. गोपनीयता का अधिकार: इच्छुक अभिवावक के पास अपनी पहचान और इस प्रक्रिया से संबंधित सभी जानकारी गोपनीय (Confidential) रखने का अधिकार होता है।
  4. चिकित्सा निर्णय लेने का अधिकार: इस प्रक्रिया से बच्चा पाने की चाहत रखने वाले माता-पिता को यह अधिकार होता है कि वे सरोगेसी प्रक्रिया के दौरान गर्भावस्था से संबंधित चिकित्सा निर्णय (Medical Decision) ले सकें।
  5. सरोगेट के खर्चों को देने का अधिकार: इच्छुक अभिवावक को यह अधिकार होता है कि वे सरोगेट मां के चिकित्सा, पोषण और अन्य गर्भावस्था से संबंधित खर्चों को खुद देंगे।
  6. बच्चे का पंजीकरण और कानूनी दस्तावेज: बच्चे के जन्म के बाद माता-पिता के पास बच्चे का जन्म प्रमाणपत्र (Birth Certificate) अपने नाम पर बनवाने का अधिकार होता है।


सरोगेसी में सरोगेट मां के अधिकार (Surrogate Mother​ Rights)

  1. चिकित्सा देखभाल का अधिकार: सरोगेट मां को गर्भावस्था के दौरान अच्छी चिकित्सा देखभाल और सुविधाएं पाने का अधिकार होता है। कानून के तहत उस महिला का पूरा ख्याल रखने की जिम्मेदारी बच्चे के असली माँ बाप की जिम्मेदारी होती है।
  2. सुरक्षा और सम्मान का अधिकार: सरोगेट मां को शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक सुरक्षा का अधिकार होता है। उस महिला पर किसी भी प्रकार का दबाव नहीं बनाया जा सकता है। इस प्रक्रिया के दौरान अगर किसी महिला पर दबाव बनाया जाता है या अपमान किया जाता है, तो कानूनी कार्यवाही की जा सकती है।
  3. वित्तीय सुरक्षा का अधिकार: सरोगेट मां को गर्भावस्था और प्रसव के दौरान होने वाले सभी खर्चों की भरपाई का अधिकार होता है। इसमें चिकित्सा खर्च, यात्रा खर्च, पोषण, और अन्य आवश्यक खर्च शामिल हैं।
  4. कानूनी सुरक्षा का अधिकार:- सरोगेट मां को एग्रीमेंट के अनुसार कानूनी सुरक्षा का अधिकार भी प्राप्त होता है। यदि इच्छुक माता-पिता किसी भी नियम या शर्तों का उल्लंघन करते हैं, तो सरोगेट मां को न्याय (Justice) पाने का अधिकार होता है।
  5. स्वास्थ्य से संबंधित निर्णयों का अधिकार:- सरोगेट मां को अपने स्वास्थ्य से संबंधित सभी आवश्यक निर्णय लेने का अधिकार होता है। किसी भी चिकित्सा प्रक्रिया या समस्या के दौरान उसकी सहमति (Consent) आवश्यक होती है।
  6. गोपनीयता का अधिकार:- सरोगेट प्रक्रिया से बच्चा पैदा करने वाली महिला को अपनी पहचान और इस प्रक्रिया से संबंधित सभी जानकारी गोपनीय यानि अन्य लोगों से इस बात को छिपा कर रखने का अधिकार है।


सरोगेसी के लिए किन-किन दस्तावेजों की आवश्यकता पड़ती है?

सरोगेसी प्रक्रिया में कानूनी और चिकित्सा नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है। इसके लिए कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेजों (Important Documents) की आवश्यकता होती है, आइए इन्हें विस्तार से समझते हैं:
 

  • मेडिकल प्रमाणपत्र यानि बांझपन का सबूत :- यह प्रमाणपत्र डॉक्टर द्वारा जारी किया जाता है, जिसमें यह लिखा होता है कि बच्चे के चाहत रखने वाले माता-पिता में से कोई एक या दोनों बांझपन (Infertility) की समस्या से जूझ रहे हैं।
  • शादी का प्रमाणपत्र:- यह दस्तावेज इच्छुक माता-पिता की शादी का वैध सबूत (Valid proof) है, जिसे सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त किसी संस्था द्वारा जारी किया गया हो। सरोगेसी (रेगुलेशन) एक्ट, 2021 के अनुसार, केवल शादीशुदा दंपत्ति ही इस प्रक्रिया का इस्तेमाल कर सकते है।
  • आधार कार्ड और पते का प्रमाण:- इसमें पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस या अन्य किसी पहचान पत्र की आवश्यकता पड़ती है।  इसके अलावा बिजली बिल, बैंक स्टेटमेंट, या राशन कार्ड को भी रहने के पते के रूप में उपयोग किया जा सकता है।
  • सरोगेसी समझौते की कॉपी:- यह कानूनी दस्तावेज (Legal Document) होता है, जिसमें माता-पिता और सरोगेट मां के बीच हुए सभी नियम और शर्तें दर्ज होती हैं। यह एग्रीमेंट किसी अनुभवी वकील की सहायता से तैयार करवाया जाता है।
  • न्यायालय की स्वीकृति दस्तावेज:- यह दस्तावेज कोर्ट द्वारा जारी किया जाता है, जिसमें सरोगेसी प्रक्रिया को कानूनी मान्यता दी जाती है।  माता-पिता को कोर्ट में आवेदन करना होता है।
 

इंडिया में सरोगेसी के लिए कानूनी प्रक्रिया - Surrogacy Process in India

सरोगेसी की प्रक्रिया के लिए हमारे देश में सख्त कानून बनाए गए है, जिसके लिए एक लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इसलिए इस जानकारी के द्वारा हम सरोगेसी की कानूनी प्रक्रिया को विस्तार से सरल भाषा में समझेंगे।
 



1. सरोगेट मां को चुनना

सरोगेसी के लिए सबसे पहले एक सरोगेट माँ की आवश्यकता पड़ती है, जिसके लिए किसी महिला को चुना जाता है। इसके बाद उस महिला की शारीरिक और मानसिक रुप से जांच की जाती है। कानूनी रूप से सरोगेट मां के लिए किसी रिश्तेदार का होना जरुरी होता है।



2. इच्छुक माता-पिता और सरोगेट मां के बीच कानूनी समझौता (Legal Agreement)

इसके बाद एक कानूनी एग्रीमेंट तैयार किया जाता है, जिसमें सरोगेट मां और इच्छुक माता-पिता दोनों के अधिकारों और नियमों के बारे में लिखा होता है। इस प्रक्रिया के लिए यह एग्रीमेंट बनवाना आवश्यक होता है, और दोनों पक्षों की सहमति के साथ ही उस पर हस्ताक्षर (Signature) किए जाते है।



3. मेडिकल प्रक्रिया के लिए मेडिकल बोर्ड की अनुमति लेना

सरोगेसी की प्रक्रिया में आमतौर पर आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) का उपयोग किया जाता है, जिससे अंडाणु और शुक्राणु को लैब में मिलाकर गर्भधारण किया जाता है। इसके लिए मेडिकल बोर्ड से मंजूरी प्राप्त करना आवश्यक है, ताकि प्रक्रिया पूरी तरह से सुरक्षित और वैध हो।



4. प्रक्रिया का प्रमाणपत्र और अस्पताल की स्वीकृति

आईवीएफ प्रक्रिया के लिए अस्पताल से प्रमाणपत्र लिया जाता है, जिसमें अस्पताल की अनुमति और प्रक्रिया के सभी मेडिकल पहलुओं के बारे में लिखा होता है।



5. न्यायिक मंजूरी के लिए इच्छुक माता-पिता को कोर्ट में आवेदन देना

सरोगेसी प्रक्रिया को कानूनी रूप से वैध (Valid) बनाने के लिए इच्छुक माता-पिता को अदालत में आवेदन देना होता है। इस आवेदन में पूरी प्रक्रिया की सभी जानकारी और आवश्यक दस्तावेज़ शामिल होते हैं। कोर्ट सरोगेसी प्रक्रिया की जांच करता है और सुनिश्चित करता है कि सभी कानूनी नियमों का पालन किया गया है। जज की अनुमति के बिना सरोगेसी प्रक्रिया नहीं हो सकती है।



6. बच्चे के जन्म के बाद कानूनी दस्तावेज़

यह प्रक्रिया पुरी होने के बाद बच्चे का जन्म प्रमाणपत्र तैयार किया जाता है, जिसमें इच्छुक माता-पिता के नाम होंगे। यह दस्तावेज़ यह प्रमाणित (Certified) करता है कि बच्चे को उसके उन माता-पिता के नाम से कानूनी मान्यता प्राप्त है, जिनके लिए सरोगेट मां ने उसे जन्म दिया था।



7. सरोगेट मां के अधिकारों का खत्म होना

बच्चे के जन्म के बाद सरोगेट मां के सभी अधिकार खत्म हो जाते है। यह कानूनी रूप से आवश्यक होता है ताकि इस प्रक्रिया को करवाने वाले माता-पिता को बच्चे के अधिकार प्राप्त हो सकें।



सरोगेसी से जुड़े कानूनी विवाद और उनके समाधान

सरोगेसी प्रक्रिया में एक कानूनी एग्रीमेंट तैयार किया जाता है, यदि कोई भी पक्ष इस एग्रीमेंट का उल्लंघन करता है, तो कई प्रकार के विवाद व समस्याएं सामने आती है। आइए जानते है कि जब इस प्रक्रिया में कानूनी विवाद होते हैं, तो क्या कदम उठाए जाते हैं और इसके समाधान कैसे होते हैं।
 

  • विवाद होने पर बातचीत करें: अगर दोनों पक्षों में से कोई भी किसी भी नियम या शर्त का उल्लंघन करता है, तो दोनों पक्षों को उसे आपसी बातचीत करके ही सुलझाने की कोशिश करनी चाहिए।  
  • कोर्ट में आवेदन: अगर आपसी बातचीत से भी विवाद नहीं सुलझता, तो कोर्ट में आवेदन करना चाहिए। कोर्ट एग्रीमेंट की शर्तों के उल्लंघन करने पर हुए विवाद का फैसला कर सकता है और उल्लंघन करने वाले पक्ष के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। यदि कोई पक्ष बच्चे के अधिकारों पर दावा करता है या कोई गलत कदम उठाता है, तो यह मामला भी अदालत में दायर किया जा सकता है।
 

सरोगेसी से जुड़े कानूनी विवादों में विशेषज्ञ वकीलों की मदद लेना बहुत महत्वपूर्ण होता है। ऐसे मामलों में वकील न केवल कानूनी प्रक्रियाओं को समझने में मदद करते हैं, बल्कि वे सही कदम उठाने के लिए आपका मार्गदर्शन भी प्रदान करते हैं। अगर आप ऐसे किसी भी मामले से जुड़ी समस्याओं का समाधान या सलाह घर बैठे पाना चाहते है, तो नीचे दिए लिंक पर क्लिक कर अभी हमारे वकीलों से बात कर सकते है।  



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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल


सरोगेसी के लिए महिला का चयन कैसे किया जाता है?

सरोगेट माँ को स्वस्थ, शारीरिक रूप से ठीक, और मानसिक रूप से स्थिर होना चाहिए। उस महिला का कम से कम एक बच्चा पहले से होना चाहिए। उसकी आयु भी आमतौर पर 25 से 35 वर्ष के बीच होनी चाहिए।



क्या सरोगेसी के दौरान कोई कानूनी अधिकार सरोगेट माँ के पास होते हैं?

सरोगेट माँ को गर्भावस्था के दौरान चिकित्सा सहायता और देखभाल प्राप्त करने का अधिकार होता है, लेकिन जन्म के बाद बच्चे का कानूनी अधिकार उस महिला के पास नही होता है।



सरोगेसी के बाद बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र किसके नाम पर होता है?

बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र उस दंपत्ति  के नाम पर बनता है, जिन्होंने बच्चा पैदा करने के लिए सरोगसी की सहायता ली है। 



क्या सरोगेसी के बाद सरोगेट माँ को बच्चे से मिलने का अधिकार होता है?

सरोगेट माँ को जन्म के बाद बच्चे से मिलने का कोई कानूनी अधिकार नहीं होता है।