Mere dada ji d Bhai Thea mere dada ji ke bhai apni jamin k bech ke apan sasral me rahne lage r Mera


सवाल

Mere dada ji do Bhai Thea mere dada ji ke bhai apni jamin ko bech ke apan sasural me rahne lage or Mera dada ji ne o jamin ko wapsi karwaye or ab 30-35 salo baad dada ji ke bhai ke bete sab ne aa ke hak mang rahe hai to hame Kiya karna hoga kiu ki mere dada ji ko notice Diya thaa jab unhone bech ke Gaye tab or yah bhi bole hai notice me ki ham na hi jotenge jamin or na hi kabhi dekhne aayenge or ab aiye hai ki hame Hamra hak do aise bol ke mangne or to or hamare gharwale ko sab mil ke Dara dhamka rahe hai Cort chalne bolte hai to nahi jarahe hai

उत्तर (2)


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आपकी स्थिति को समझने पर यह स्पष्ट होता है कि आपके दादा जी के भाई ने अपनी भूमि बेचकर अपनी ससुराल में रहने का फैसला लिया था, और उस समय उन्होंने लिखित रूप से यह भी बताया था कि वे न तो उस भूमि को जोतेंगे और न ही कभी उसे देखने आएंगे। आपके दादा जी ने कानूनी रूप से उस भूमि को वापस अपने नाम करवा लिया, और अब पैंतीस साल बाद उनके बेटे आपसे उसी भूमि पर अपना हक मांगने आए हैं, साथ ही आपको धमका भी रहे हैं। इस परिस्थिति में आपको बिल्कुल भी घबराना नहीं चाहिए, क्योंकि कानूनी दृष्टि से आपका पक्ष अत्यंत मजबूत है।

सबसे पहली और महत्वपूर्ण बात यह है कि भूमि के स्वामित्व का मामला पूरी तरह से दस्तावेजों (खसरा, खतौनी और बैनामा) पर आधारित होता है। जब आपके दादा जी ने उस भूमि को वापस अपने नाम करवाया था, तो यह एक पूर्ण कानूनी प्रक्रिया थी, जिसमें राजस्व विभाग और उप-पंजीयक का रिकॉर्ड आपके पक्ष में होना चाहिए। भूमि की बिक्री के बाद उसका पूर्व मालिक उस पर कोई दावा नहीं कर सकता, जब तक कि वह बिक्री को चुनौती देने के लिए निर्धारित कानूनी समय सीमा के भीतर अदालत न जाए। चूंकि उन्होंने बिक्री के समय एक नोटिस देकर पूरी तरह से त्यागपत्र दे दिया था, और अब तीस से पैंतीस साल बीत चुके हैं, इसलिए उनके द्वारा अब हक मांगना कानूनी रूप से बिल्कुल अमान्य है।

आपके दादा जी के भाई के बेटों की यह मांग न केवल कानूनी रूप से निराधार है, बल्कि वे आपको और आपके परिवार को डरा-धमका भी रहे हैं, जो कि एक आपराधिक कृत्य है। वे अदालत जाने की बात भी कर रहे हैं, लेकिन अगर वे अदालत जाते हैं, तो सबसे पहले उन्हें यह साबित करना होगा कि बिक्री के तीस-पैंतीस साल बाद उनका भूमि पर क्या कानूनी अधिकार बचा है, जो कि किसी भी स्थिति में संभव नहीं है क्योंकि भूमि का पंजीकरण हो चुका है। अदालत ऐसे मामलों में, जहाँ वर्षों पहले ही लेन-देन हो चुका हो, फिर से उसी भूमि पर अधिकार का दावा करने की अनुमति बहुत कम ही देती है, क्योंकि समय बीत जाने के कारण दावा समाप्त हो जाता है।

इस स्थिति में आपको सबसे पहले शांत रहना होगा। अपनी भूमि के सभी पुराने और नए दस्तावेज, जिनमें आपके दादा जी के नाम का बैनामा, खतौनी, और उनके भाई द्वारा दिया गया नोटिस शामिल है, को इकट्ठा करके सुरक्षित रखें। चूंकि आपके घर वालों को डराया-धमकाया जा रहा है, इसलिए आप इस धमकी की शिकायत स्थानीय पुलिस थाने में लिखित रूप में दे सकते हैं, ताकि आपकी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। अगर वे बलपूर्वक भूमि पर कब्जा करने की कोशिश करते हैं, तो तुरंत पुलिस को सूचना दें। कानूनी रूप से, उनकी मांग पूरी तरह से गलत और अवैध है, इसलिए आपको कोई अदालती नोटिस या वारंट मिलने पर ही कानूनी जवाब देना चाहिए, अन्यथा उनकी बातों को गंभीरता से न लें और अपने परिवार के साथ अपनी भूमि पर शांति से अपना जीवन व्यतीत करें। अगर जरूरत पड़े, तो आप अपने गाँव के पटवारी या राजस्व अधिकारी से भी इस बारे में बात कर सकते हैं, ताकि भू-अभिलेखों में आपके नाम की स्थिति स्पष्ट रहे।


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