दूसरी शादी करने पर क्या सजा होती है


सवाल

हिंदू धर्म में पहली पत्नी के होते हुए दूसरी शादी करने पर कितनी सजा मिलती है? अगर दूसरी पत्नी को पहले से सब पता था और उनका एक बच्चा भी है, तो क्या ऐसी स्थिति में पति को जमानत मिल सकती है? पति को मुआवजे के रूप में कितनी राशि देनी होगी?

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हाँ, हिंदू कानून के अनुसार पहली पत्नी को तलाक दिए बिना दूसरी शादी करना एक गंभीर अपराध है। BNS की धारा 82 के तहत इसे द्विविवाह (Bigamy) कहा जाता है। इस अपराध के लिए पति को 7 साल तक की जेल और जुर्माना दोनों हो सकते हैं।

कानूनी रूप से दूसरी शादी पूरी तरह से अमान्य (Void) मानी जाती है, यानी कानून की नजर में उस शादी की कोई कीमत नहीं है। भले ही दूसरी पत्नी को पहली शादी के बारे में सब पता था, फिर भी वह पति को कानूनी सजा से नहीं बचा सकती। हालांकि, दूसरी पत्नी से पैदा हुए बच्चे को पिता की संपत्ति में कानूनी वारिस माना जाता है और उसे अपना हक मिलता है।

जहाँ तक जमानत (Bail) का सवाल है, यह एक जमानती अपराध (Bailable Offence) है। इसका मतलब है कि पति को गिरफ्तारी के बाद कोर्ट से जमानत मिल सकती है। यदि पहली पत्नी समझौता करने के लिए तैयार हो जाए या परिस्थितियां सुधर जाएं, तो कानूनी प्रक्रिया थोड़ी आसान हो सकती है, लेकिन अपराध तब भी बना रहता है।

धनराशि या मुआवजे (Compensation) का कोई एक तय नियम नहीं है। यह पति की कुल कमाई, संपत्ति और पहली पत्नी की जरूरतों पर निर्भर करता है। कोर्ट पहली पत्नी के लिए गुजारा भत्ता (Maintenance) तय करता है, जो पति की सैलरी का लगभग 20 से 30 प्रतिशत तक हो सकता है। इसके अलावा, यदि पहली पत्नी चाहे तो वह एकमुश्त बड़ी राशि (Alimony) की मांग भी कर सकती है।

यदि पति सरकारी नौकरी में है, तो दूसरी शादी करने पर उसे अपनी नौकरी से भी हाथ धोना पड़ सकता है। पहली पत्नी पुलिस में शिकायत करने के अलावा सीधे मजिस्ट्रेट के पास जाकर भी केस दर्ज करा सकती है।

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भारतीय दंड संहिता की धारा 494 के तहत - यदि कोई व्यक्ति पहली पत्नी के जीवित रहते हुए द्विविवाह करता है तो यह एक दंडनीय अपराध है, जिस के लिए पति को सात साल तक की अवधि के लिए दंडित किया जा सकता है और जुर्माना भी हो सकता है। कानून के तहत दूसरी शादी की वैधता शून्य होती है हालांकि, कुछ अपवाद हैं जो मामले के तथ्यों पर निर्भर करते हैं।


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