चेक बाउंस पुलिस कंप्लेंट कैसे और कहां दर्ज करनी चाहिए
सवाल

उत्तर (1)
चेक बाउंस के मामलों को परक्राम्य लिखत अधिनियम (Negotiable Instruments Act), 1881 की धारा 138 के तहत दर्ज किया जाता है। हालांकि, सीधे पुलिस शिकायत दर्ज करने के बजाय, पहले चेक जारीकर्ता को एक कानूनी नोटिस (Demand Notice) भेजना जरुरी होता है।
चेक बाउंस की शिकायत कहां और कैसे दर्ज की जा सकती है?
पुलिस सीधे इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं करती, क्योंकि चेक बाउंस होना एक सिविल-क्रिमिनल मामला होता है। अगर चेक बाउंस में धोखाधड़ी या आपराधिक साजिश का एंगल हो, तो पुलिस एफआईआर दर्ज कर सकती है। आम तौर पर ऐसे शिकायत सीधे मजिस्ट्रेट कोर्ट में दर्ज की जाती है।
शिकायतकर्ता अपनी रहने की जगह के आधार पर केस फाइल नहीं कर सकता। केस वहीं दर्ज होगा जहां चेक बाउंस हुआ या जहां चेक जारी करने वाले की बैंक स्थित है।
आम तौर पर, चेक बाउंस के मामले में पुलिस तुरंत गिरफ्तारी नहीं करती। पहले कोर्ट आरोपी को समन (Summons) जारी करता है। अगर वह अदालत में पेश नहीं होता, तो गिरफ्तारी वारंट जारी किया जा सकता है।
चेक बाउंस केस में होने वाली कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया
- डिमांड नोटिस भेजना – चेक बाउंस होने के 15 दिनों के भीतर कानूनी नोटिस भेजना आवश्यक है।
- कोर्ट में केस दर्ज करना – अगर नोटिस के 30 दिनों के भीतर भुगतान नहीं होता, तो मजिस्ट्रेट कोर्ट में शिकायत दर्ज की जाती है।
- कोर्ट समन जारी करेगा – आरोपी को पेश होने के लिए बुलाया जाता है।
- सजा और जुर्माना – दोषी पाए जाने पर 2 साल तक की जेल या चेक की राशि से दोगुना जुर्माना लगाया जा सकता है।
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