बिजली अधिनियम की धारा 135 जमानती है या गैर-जमानती और इसमें जमानत कैसे मिलती है


सवाल

बिजली अधिनियम (Electricity Act) की धारा 135 जमानती है या नहीं? क्या इसमें समझौता किया जा सकता है? और अगर केस दर्ज हो जाए तो जमानत मिलने की क्या प्रक्रिया है?

LawRato

उत्तर (3)


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बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 135 'बिजली चोरी' से संबंधित है। यह एक गंभीर अपराध माना जाता है, लेकिन इसकी कानूनी प्रकृति बिजली चोरी की मात्रा और जुर्माने पर निर्भर करती है।

यहाँ आपकी स्थिति के लिए मुख्य कानूनी जानकारियां दी गई हैं:

1. क्या यह जमानती है? (Bailable or Non-Bailable)

बिजली अधिनियम की धारा 135 के तहत अपराध जमानती (Bailable) होता है। इसका मतलब है कि आप गिरफ्तारी के बाद अधिकार के रूप में जमानत मांग सकते हैं। हालांकि, यदि चोरी की गई बिजली का लोड बहुत ज्यादा है या यह मामला बार-बार दोहराया गया है, तो प्रक्रिया थोड़ी कठिन हो सकती है, लेकिन सामान्य मामलों में जमानत मिल जाती है।

2. क्या इसमें समझौता हो सकता है?

हाँ, यह अपराध कंपाउंडेबल (Compoundable) है। इसका मतलब है कि आप बिजली विभाग द्वारा निर्धारित 'कंपाउंडिंग फीस' (Compounding Fee) और बकाया बिल का भुगतान करके मामले को कोर्ट के बाहर रफा-दफा कर सकते हैं।

  • एक बार जब आप विभाग का पूरा पैसा और जुर्माना भर देते हैं, तो विभाग आपके खिलाफ कानूनी कार्यवाही वापस ले लेता है।

3. जमानत कैसे मिलती है?

यदि आपके खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज हो गई है और गिरफ्तारी की संभावना है, तो जमानत की प्रक्रिया इस प्रकार है:

  • जमानत के लिए आवेदन: आपको अपने वकील के माध्यम से संबंधित विशेष बिजली अदालत (Special Electricity Court) में जमानत की अर्जी देनी होगी।

  • शर्तें: कोर्ट अक्सर इस शर्त पर जमानत देता है कि आप बिजली विभाग द्वारा की गई जुर्माने की मांग (Assessment Amount) का एक हिस्सा (आमतौर पर 30% से 50%) तुरंत जमा करें।

  • निस्तारण: रसीद कोर्ट में पेश करने पर आपको मुचलके (Bail Bond) पर रिहा कर दिया जाता है।

अगर बिजली विभाग ने छापा मारा है और चोरी पकड़ी गई है, तो सबसे अच्छा तरीका है कि आप तुरंत विभाग से मिलकर समझौता (Compounding) कर लें। इससे आप लंबी कोर्ट कार्यवाही और गिरफ्तारी से बच सकते हैं।

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खैर, भारतीय विद्युत अधिनियम की धारा 135 प्रकृति में गैर-जमानती है और प्राथमिकी बिल के भुगतान के अधीन समझौता योग्य है। प्राथमिकी के अनुसार, सबसे पहले आपने बिल की उक्त राशि का भुगतान किया और जमानत याचिका दायर करते हुए जमानत प्राप्त करने के लिए उक्त भुगतान की रसीद संलग्न की। धन्यवाद आदित्य कुमार एडवोकेट गुमला

278 votes

भारतीय विद्युत अधिनियम की धारा 135 एक समझौता योग्य धारा है और यह प्रकृति में एक गैर-जमानती है, लेकिन यदि आप सभी जुर्माना और बकाया राशि जमा करते हैं, तो माननीय अदालत विचार करती है और जमानत की अनुमति देती है। लेकिन यह अनिवार्य नहीं है कि जमानत लेने से पहले आपको सारा बकाया और जुर्माना जमा करना होगा। आप ऐसा किए बिना अपनी जमानत दाखिल कर सकते हैं। आप मामले के अमृत पर अपनी जमानत याचिका दायर कर सकते हैं।


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