भारत में लिव-इन रिलेशनशिप - कानून, नियम और पार्टनर के अधिकार
आज के समय में हर चीज में इतनी तेजी से बदलाव हो रहे है कि इस बदलते समय ने रिश्तों को व रिश्ते निभाने के तरीकों को भी पुरी तरह से बदल दिया है। आजकल के युवा लड़के व लड़कियाँ पुरानी सोच से हटकर अपने जीवन के लिए नई सोच व नए तरीकों से फैसले करते है। इन बदलावों में सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में से एक है लिव-इन रिलेशनशिप। लिव-इन रिलेशनशिप एक ऐसा रिश्ता है जिसमें दो बालिग (18 साल से ऊपर के) लोग बिना शादी किए एक साथ पति-पत्नी की तरह रहते हैं। आज के इस लेख में हम लिव-इन रिलेशनशिप के सभी पहलुओ के बारे में बात करेंगे जैसे कि, लिव-इन रिलेशनशिप क्या होता है (Live-in relationship in India)? भारत में लिव-इन रिलेशनशिप कानून, पार्टनर के अधिकार और अन्य जानकारी?
हमारा यह लेख उन सभी लोगों के लिए बहुत ही फायदेमंद होगा जो 'Live in Relationship' के बारे में अधिक जानना चाहते हैं। क्योंकि यह एक ऐसा विषय जिसके बारे में सोचकर हमारे माता-पिता की उम्र के लोग चिंतित हो जाते है और आज की युवा पीढ़ी इसे अपने भविष्य के लिए सही मानती है। इसलिए ऐसे किसी भी रिश्ते में आने से पहले उसकी सारी जानकारी होना बहुत ही आवश्यक है, जो हमें भविष्य में आने वाली किसी परेशानी से भी बचा सकती है। इसलिए इस लेख में दी गई प्रत्येक जानकारी को अंत तक जरुर पढ़े।
विषयसूची
- लिव इन रिलेशनशिप क्या होता है (What is live-in relationship)?
- भारत में लिव इन रिलेशनशिप के लिए क्या कानून है (live-in relationship law in India)?
- लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के फायदे और नुकसान क्या हो सकते है?
- घरेलू हिंसा अधिनियम लिव-इन रिलेशनशिप�के मामले में किस प्रकार मदद करती है?
- Live in Relationship में पैदा हुए बच्चों के अधिकार क्या होते है?
- लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिला व पुरुष के संपत्ति �से जुड़े अधिकार
- लिव-इन रिलेशनशिप में पार्टनर को क्या�सावधानियां बरतनी चाहिए
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
लिव इन रिलेशनशिप क्या होता है (What is live-in relationship)?
लिव-इन रिलेशनशिप एक ऐसा संबंध है जिसमें दो वयस्क (लड़का लड़की जिनकी आयु 18 वर्ष या उससे अधिक होती है) दोनों एक साथ बिना शादी (Marriage) के एक ही घर में एक साथ रहते हैं और एक-दूसरे के साथ भावनात्मक, शारीरिक और सामाजिक रुप से जुड़े होते है। इस प्रकार की कोई भी परंपरा या रिवाज हमारे देश में नहीं थी, लेकिन आज कल के लड़का लड़की एक दूसरे के साथ पूरा जीवन बिताने से पहले एक दूसरे को जानने समझने के लिए लिव-इन रिलेशनशिप में आते है। ऐसे मामलों में कई बारे दोनों के बीच बात आगे बढ़ जाती है जिसके बाद वे शादी कर लेते है और कई मामलों में समय बिताकर एक दूसरे को छोड़ दिया जाता है।
भारत में लिव इन रिलेशनशिप के लिए क्या कानून है (live-in relationship law in India)?
भारत में लिव-इन रिलेशनशिप के लिए कोई विशेष कानून नहीं है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे एक कानूनी दर्जा दिया है, जो इसे एक आपराधिक या गैरकानूनी गतिविधि नहीं मानता हैं। लिव-इन पार्टनर को घरेलू हिंसा कानून, भरण-पोषण और बच्चों के अधिकार जैसे कानून के तहत कुछ सुरक्षा मिलती है। सुप्रीम कोर्ट ने कई बार कहा है कि लिव-इन रिलेशनशिप भी एक तरह का रिश्ता है और इस रिश्ते में रहने वाले लोगों के भी कुछ अधिकार (Rights) होते हैं, जैसे:
- सुरक्षा: अगर कोई व्यक्ति अपने लिव-इन पार्टनर (यानि साथ रहने वाले व्यक्ति) के द्वारा हिंसा (Violence) का शिकार होता है तो वह घरेलू हिंसा अधिनियम (Domestic Violence Act) के तहत सुरक्षा ले सकता है।
- संपत्ति के अधिकार: अगर दोनों पार्टनर ने मिलकर कोई संपत्ति (Property) खरीदी है तो दोनों का उस पर बराबर का अधिकार हो सकता है।
- बच्चों के अधिकार: अगर लिव-इन रिलेशनशिप में बच्चा होता है तो दोनों पार्टनर उस बच्चे की देखभाल और पालन-पोषण के लिए जिम्मेदार होंगे।
लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के फायदे और नुकसान क्या हो सकते है?
शादी किए बिना एक साथ रहना आजकल के युवा लड़का लड़की के लिए एक आम सी बात हो गई है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस रिश्ते में रहने के फायदे और नुकसान दोनों हो सकते है जिसके बारे में जानकर ही एक साथ रहने का फैसला लेना चाहिए।
फायदे
- इस रिश्ते में शादी से लड़का व लड़की दोनों एक साथ एक ही घर में एक साथ रहते है, वो भी बिना किसी कानूनी रिश्ते के।
- इस दौरान वो एक साथ रहकर एक दूसरे की आदतें, पसंद-नापसंद और जीवन जीने के तरीके को समझ सकते है।
- एक साथ रहने से दोनों पार्टनर एक-दूसरे पर निर्भर रहना सीखते हैं और आत्मनिर्भर बनते हैं।
- एक-दूसरे के साथ रहकर वे शारीरिक व मानसिक (Physically Or Mentally) दोनों तरह से जुड़ कर अपने संबंधों को मजबूत बना सकते है।
- अगर कभी दोनों अलग होना चाहे तो उन्हें किसी कानूनी अनुमति (Legal Permission) की आवश्यकता भी नहीं पड़ती है। जैसे शादी के बाद तलाक लेना आदि।
नुकसान
- लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले लड़का लड़की को समाज व लोगों की तरफ से बहुत सारी बाते सुनने को मिलती है।
- ऐसे ज्यादातर मामलों में परिवार वाले ही इस रिश्ते को स्वीकार नहीं करते हैं, जिसके कारण कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
- कई बार ऐसे मामलों में देखा जाता है कि लड़का लड़की दोनों एक दूसरे के साथ संबंध बनाकर या फायदा उठाकर दिल से जुड़े इंसान को छोड़ देते है।
- भारत में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर कोई विशेष कानून (Special Law) नहीं है इसलिए बहुत से मामलों में कानूनी समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है।
घरेलू हिंसा अधिनियम लिव-इन रिलेशनशिप के मामले में किस प्रकार मदद करती है?
हमारे देश में एक कानून है जिसे घरेलू हिंसा अधिनियम (Domestic Violence Act) कहते हैं। इस कानून का मकसद उन लोगों को बचाना है जो अपने घर में हिंसा (Violence) का शिकार होते हैं। इस कानून में लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले लोगों को भी शामिल किया गया है। यानी अगर कोई व्यक्ति अपने लिव-इन पार्टनर के साथ मारपीट करता है या अन्य तरीके से किसी भी प्रकार की हिंसा करता है तो ऐसे मामले में पीड़ित को इस कानून के तहत सुरक्षा मिलेगी।
Live in Relationship में पैदा हुए बच्चों के अधिकार क्या होते है?
यदि लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे पुरुष व महिला को कभी बच्चे पैदा होते हैं, तो उन्हें कानूनी रुप से वैध (Legally Valid) माना जाता है। ऐसे मामलों में जन्में बच्चे अपनी माता और पिता दोनों से भरण-पोषण (Maintenance) के लिए कानूनी अधिकार की माँग कर सकते है। अगर किसी कारण एक साथ रह रहे दोनों लोग अलग होते है तो बच्चे के संरक्षण (Guardianship) की जिम्मेदारी कोर्ट बच्चे के हितों को देखते हुए ही फैसला लेता है कि बच्चा माँ के पास रहेगा या पिता के पास। उन दोनों में से जो भी बच्चे को संभालने लायक व जिम्मेदार होगा कोर्ट उसे ही बच्चे की कस्टडी देगा।
लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिला व पुरुष के संपत्ति से जुड़े अधिकार
बिना शादी के एक साथ रहने वाले दोनों पार्टनर्स को संपत्ति के अधिकारों (Property Rights) के लिए कानूनी सुरक्षा (Legal Protection) नहीं होती है। यदि कोई पार्टनर अपने जीवन साथी की संपत्ति में हिस्सेदारी चाहता है, तो उसे इसे साबित करना होगा की उसने भी इस संपत्ति को लेने में अपने पैसे लगाए है या उसका भी इसमें कोई हिस्सा है। यदि एक पार्टनर की मृत्यु (Death) हो जाती है, तो दूसरा पार्टनर को अपने पार्टनर की संपत्ति के लिए कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ती है।
इस बात को इस तरह से समझते है कि जैसे शादी के बाद किसी महिला के पति की मृत्यु हो जाती है तो वह अपने पति की संपत्ति को पाने के लिए कानूनी रुप से उस संपत्ति की उत्तराधिकारी बन सकती है। लेकिन लिव-इन में रहने वाली महिला के लिए अपने पार्टनर की संपत्ति को कानूनी रुप से पाना आसान नहीं होता है।
लिव-इन रिलेशनशिप में पार्टनर को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए
- एक साथ रहने वाले महिला व पुरुष दोनों अगर कोई संपत्ति खरीदते हैं, तो इसके लिए एक लिखित समझौता (Written Agreement) जरुर करें। जिसमें संपत्ति के लिए दोनों के अधिकारों का ध्यान रखें।
- अगर आप अपनी कोई संपत्ति अपने साथी को देना चाहते हैं, तो वसीयत (Will) बनाना न भूलें।
- यदि आप अपने साथी के साथ रहते हैं, तो अपनी सुरक्षा (Safety) का ध्यान रखें। अगर कभी आपको महसूस हो कि आप असुरक्षित हैं, तो अपने परिवार या दोस्तों से मदद मांगें।
- हमेशा खुद को इस बात के लिए तैयार रखे की कभी आपका रिश्ता खत्म हुआ तो आप खुद को संभाल पाए और अपने जीवन में आगे बढ़ पाए।
- अपने रिश्ते और कामों के बीच संतुलन (Balance) बनाकर रखें। हमेशा अपने परिवार, दोस्तों और करियर के लिए भी समय निकालें।
- अगर लिव इन रिलेशन से बच्चा पैदा होता है तो दोनों पार्टनर को बच्चे के भविष्य के बारे में सोचना चाहिए और उसके अधिकारों का ध्यान रखना चाहिए।
- किसी भी कानूनी समस्या के लिए एक वकील (Lawyer) से सलाह लेना दोनों लोगों के लिए बेहतर होता है।
अगर आप लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े किसी कानूनी मुद्दे पर फँसे हैं या अपने अधिकारों को लेकर कंफ्यूज हैं, तो आप नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके इस विषय से जुड़े अनुभवी वकीलों से सीधे करके कानूनी सलाह ले सकते है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
लिव-इन रिलेशनशिप क्या होता है?
लिव इन रिलेशनशिप का मतलब होता है कि दो लोग शादी किए बिना एक साथ एक ही घर में एक साथ रहते हैं। वे एक-दूसरे के साथ एक दूसरे की मर्जी से शारीरिक संबंध भी बनाते है, लेकिन कानूनी रूप से पति-पत्नी नहीं होते हैं।
क्या लिव इन रिलेशनशिप शादी में बदल सकता है?
हाँ, कई बार लिव इन रिलेशनशिप शादी में बदल जाता है। लेकिन यह जरूरी नहीं है कि हर बार ऐसे मामले शादी में बदले।
भारत में लिव-इन रिलेशनशिप के लिए क्या नियम व कानून है?
भारत में अभी तक लिव-इन रिलेशनशिप के लिए कोई एक विशेष कानून नहीं है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कई मामलों में live-in relationship को मान्यता दी है और इन रिश्तों में रहने वाले लोगों के अधिकारों पर फैसले सुनाए हैं।
क्या भारत में हिंदू, मुस्लिम या अन्य धर्म के लोग भी Live in Relationship में रह सकते है?
हाँ, इंडिया में अलग-अलग धर्म के लोग भी लिव-इन रिलेशनशिप में रह सकते हैं। यह एक व्यक्तिगत निर्णय है और इसमें कोई कानूनी रोक नहीं है।
क्या लिव-इन रिलेशनशिप को समाप्त करना आसान है?
हां, बिना शादी के एक साथ रहने वाले इस रिश्ते को खत्म करना बहुत ही आसान होता है। इसमें कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती। दोनों पार्टनर्स अपनी सहमति से संबंध को समाप्त कर सकते हैं। हालांकि, यदि संपत्ति या बच्चे का मामला हो इसमें भी कानूनी सलाह लेना बेहतर होता है।
लिव-इन रिलेशनशिप में पार्टनर के संपत्ति अधिकार क्या होते हैं?
अगर दोनों पार्टनर ने मिलकर कोई संपत्ति खरीदी है तो संपत्ति के बंटवारे को लेकर विवाद हो सकते हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के कुछ फैसलों में कहा गया है कि अगर दोनों पार्टनर ने मिलकर कोई संपत्ति खरीदी है तो दोनों का उस पर बराबर का अधिकार हो सकता है।