कंज्यूमर कोर्ट में शिकायत कैसे करें: ग्राहकों के अधिकार और ऑनलाइन केस प्रक्रिया



​आजकल हम सब रोजाना कुछ न कुछ खरीदते ही रहते हैं। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि हमें जो चीज़ मिलती है वो नकली या खराब निकलती है। बहुत बार तो दुकानदार या कंपनी सीधा-सीधा ग्राहक को धोखा दे देती है। आजकल ऐसे बहुत से मामले सामने आ रहे हैं, खासकर ऑनलाइन खरीदारी में। फिर भी लोग चुप रह जाते हैं क्योंकि उन्हें पता ही नहीं होता कि अब क्या करें, कहाँ जाएं। इसी वजह से हर ग्राहक को ये जानना बहुत जरूरी है कि अगर उसके साथ कुछ गलत हो जाए, तो वह अपनी शिकायत कहाँ और कैसे कर सकता है। आज के लेख में हम आपको बताएंगे कि, उपभोक्ता अदालत (Consumer Court) क्या है? उपभोक्ता फोरम (Consumer Forum) में शिकायत कब और कैसे की जा सकती है? कंज्यूमर कोर्ट में ऑनलाइन केस करने की प्रक्रिया क्या है?


विषयसूची

  1. उपभोक्ता अदालत (Consumer Court) क्या है?
  2. उपभोक्ता फोरम (Consumer Court) में केस कैसे करें?
  3. उपभोक्ता या ग्राहक किसे कहा जाता है?
  4. कंज्यूमर कोर्ट ग्राहकों के लिए क्यों ज़रूरी है?
  5. उपभोक्ता फोरम (Consumer Forum) में कब शिकायत की जा सकती है?
  6. भारतीय कानून के अनुसार ग्राहक (Customer) के अधिकार क्या हैं?
  7. Consumer Court में शिकायत (Case) करने के लिए जरूरी दस्तावेज़
  8. क्या ऑनलाइन खरीदे गए खराब सामान पर उपभोक्ता अदालत में केस किया जा सकता है?
  9. कंस्यूमर कोर्ट (Consumer Court) में शिकायत कौन कर सकता है?
  10. Consumer Court में ऑनलाइन शिकायत (Online Complaint) कैसे करें?
  11. शिकायत करने के लिए कौन सा कंस्यूमर फॉर्म चुनें?
  12. Jurisdiction (अधिकार क्षेत्र) क्या होता है?
  13. केस करने की फीस कितनी होती है?
  14. कंस्यूमर कोर्ट में केस फाइल करने की समय-सीमा (Time Limit) क्या है?
  15. क्या उपभोक्ता अदालत में केस करने के लिए वकील जरूरी होता है?
  16. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल


उपभोक्ता अदालत (Consumer Court) क्या है?

उपभोक्ता अदालत जिसे अंग्रेजी भाषा में Consumer Court या Consumer Forum  भी कहा जाता है। यह एक ऐसी अदालत होती है, जहाँ कोई भी आम ग्राहक अपनी शिकायत (Complaint) लेकर जा सकता है। अगर किसी दुकान या कंपनी ने आपको खराब सामान दिया हो या सेवा (Service) सही से न दी हो, तो आप इस अदालत (Court) में जाकर उस दुकानदार या कंपनी की शिकायत कर सकते है। यह कोर्ट आपकी बात सुनती है और अगर आप सही हैं, तो कंपनी या दुकानदार पर सज़ा या जुर्माना लगाती है।

उपभोक्ता अदालत "उपभोक्ता संरक्षण कानून" के तहत चलती है। ये कानून सरकार ने ग्राहकों की सुरक्षा और उनके हक की रक्षा के लिए बनाया है। पहले ये कानून 1986 में बना था, लेकिन अब नया कानून उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 लागू हो चुका है, जो 20 जुलाई 2020 से पूरे देश में लागू है।
 



उपभोक्ता या ग्राहक किसे कहा जाता है?

ग्राहक या उपभोक्ता वह व्यक्ति होता है जो अपनी ज़रूरत के लिए कोई सामान खरीदता है या किसी सेवा का इस्तेमाल करता है। जैसे - अगर कोई व्यक्ति मोबाइल, कपड़े, दवाइयाँ या राशन खरीदता है, तो वह ग्राहक (Costumer) कहलाता है। इसी तरह अगर वह बिजली, इंटरनेट, गैस, हॉस्पिटल या स्कूल जैसी सेवाओं का उपयोग करता है, तो भी वह ग्राहक ही माना जाता है।



कंज्यूमर कोर्ट ग्राहकों के लिए क्यों ज़रूरी है?

भारत में हर दिन करोड़ों लोग चीजें खरीदते हैं या किसी न किसी सेवा (Service) का इस्तेमाल करते हैं, जैसे मोबाइल रीचार्ज कराना, गैस लेना, दवा खरीदना या इलाज कराना। लेकिन कई बार दुकानदार, कंपनी या सेवा देने वाले लोग ग्राहकों को खराब चीज़ें देते हैं या सही सेवा नहीं देते। ऐसे में आम आदमी के लिए पुलिस या बड़े वकील के पास जाना मुश्किल होता है। इसलिए सरकार ने उपभोक्ता अदालत (Consumer Court) बनाई है, जो ग्राहकों को आसानी से और जल्दी न्याय दिलाने में मदद करती है।



उपभोक्ता फोरम (Consumer Forum) में कब शिकायत की जा सकती है?

  • खराब या नकली सामान मिलने पर: अगर आपने किसी दुकान से या किसी अन्य जगह से कोई चीज़ खरीदी है और वह टूटी हुई, खराब या नकली निकली तो आप कंज्यूमर कोर्ट में शिकायत कर सकते हैं।
  • ज़रूरत से ज़्यादा पैसे वसूलने पर: अगर दुकानदार या कंपनी सामान के तय दाम (Fixed Price) से ज़्यादा पैसे लेती है, तो आप शिकायत कर सकते हैं। जैसे - पैकेट पर ₹50 लिखा है लेकिन आपसे ₹70 लिए गए।


भारतीय कानून के अनुसार ग्राहक (Customer) के अधिकार क्या हैं?

जब भी हम किसी सामान को खरीदते हैं या कोई सेवा (Service) लेते हैं, तो हमें अपने अधिकारों के बारे में पता होना बहुत ज़रूरी है। हमारे पास कुछ खास अधिकार होते हैं, जो हमें धोखा या खराब चीज़ें मिलने से बचाते हैं। आइए, जानते हैं ये अधिकार क्या हैं:

  • अच्छा और सुरक्षित सामान पाने का अधिकार: जब आप कोई चीज़ खरीदते हैं, तो वह पूरी तरह ठीक और सुरक्षित होनी चाहिए।
  • सही जानकारी पाने का अधिकार: जिस सामान को आप ले रहे है उसके बारे में आपको पूरी जानकारी मिलनी चाहिए। मतलब, आपको पता होना चाहिए कि यह सामान कितना महंगा है, इसे कैसे इस्तेमाल करना है, इसकी गारंटी कितनी है और इसके क्या नुकसान हो सकते हैं।
  • अपनी मर्जी से सामान या सेवा चुनने का अधिकार: आप अपनी पसंद और जरूरत के हिसाब से अपना सामान ले सकते है इसके लिए आपके साथ जबरदस्ती नहीं की जा सकती।
  • शिकायत करने का अधिकार: अगर आपको कोई खराब सामान मिला या सेवा में धोखा हुआ, तो आप अपनी बात कंज्यूमर कोर्ट या कंज्यूमर फोरम में रख सकते हैं।
  • मुआवजा माँगने का अधिकार: अगर आपके साथ कोई धोखा हुआ है या आपको नुकसान हुआ है, तो आप उस नुकसान का मुआवजा (Compensation) माँग सकते हैं।
  • बीमा क्लेम न मिलने पर: अगर आपने बीमा लिया है और समय आने पर कंपनी आपको पैसा देने से मना कर देती है या बहुत देर करती है, तो ऐसे में भी आप कंज्यूमर कोर्ट में शिकायत कर सकते हैं।


Consumer Court में शिकायत (Case) करने के लिए जरूरी दस्तावेज़

कंज्यूमर कोर्ट में शिकायत करते समय कुछ जरुरी दस्तावेज (Important Documents) साथ लेकर जाना होता है, ताकि आपका केस मजबूत बने। ये दस्तावेज़ इस प्रकार हैं:

  • जो आपने सामान लिया है उसका रसीद या बिल।
  • गारंटी या वारंटी कार्ड
  • शिकायत से जुड़ी कोई भी बातचीत या ईमेल
  • खराब सामान की फोटो या वीडियो
  • पहचान पत्र - जैसे आधार कार्ड या वोटर आईडी।
  • कोर्ट में दी गई शिकायत की प्रति (Copy) - जब आप केस दर्ज कराएं।


क्या ऑनलाइन खरीदे गए खराब सामान पर उपभोक्ता अदालत में केस किया जा सकता है?

हाँ, अगर आपने कोई सामान ऑनलाइन खरीदा है और वो सामान खराब, नकली या गलत निकला है, तो आप उपभोक्ता अदालत में शिकायत कर सकते हैं। ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले ग्राहकों को भी वही अधिकार मिलते हैं जो दुकानों से सामान खरीदने वालों को मिलते हैं।
 



कंस्यूमर कोर्ट (Consumer Court) में शिकायत कौन कर सकता है?

कंज्यूमर कोर्ट में कोई भी ऐसा इंसान केस कर सकता है, जिसने अपनी जरूरत के लिए कोई सामान या लिया है, और उसमें कोई दिक्कत या खराबी आ जाती है। इसके बाद आपने जहाँ से सामान लिया है, वो उस चीज को ठीक नहीं करता या पैसे नहीं देता तो आप उपभोक्ता फोरम में शिकायत कर सकते है। अगर आप खुद किसी कारण से शिकायत नहीं कर पाते, तो आपका परिवार या कोई वकील आपकी तरफ से केस कर सकता है।

लेकिन ध्यान रखें, ये केस सिर्फ उन्हीं चीज़ों या सेवाओं के लिए हो सकता है, जो आपने अपने निजी काम के लिए खरीदी हैं। अगर आपने कोई सामान व्यापार (बेचने) के लिए खरीदा है, तो उस पर कंज्यूमर कोर्ट में शिकायत नहीं कर सकते।



उपभोक्ता फोरम (Consumer Court) में केस कैसे करें?

अगर आपको कोई खराब सामान मिला है आपके साथ खरीदारी के समय धोखा हुआ है, तो आप कंज्यूमर कोर्ट में शिकायत कर सकते हैं। नीचे हमने उपभोक्ता अदालत में केस करने की आसान प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया है:

1. अपनी समस्या को अच्छे से समझें

सबसे पहले यह समझ लें कि आपको क्या दिक्कत हुई है और आप अब क्या समाधान चाहते हैं, जैसे सामान बदलवाना, पैसा वापस लेना या मुआवजा पाना।

2. दुकानदार या कंपनी से शिकायत करें

सबसे पहले जहां से सामान या सेवा ली है, वहां अपनी शिकायत लिखित (Written) में दें। कोशिश करें कि आपकी समस्या वहां हल हो जाए, लेकिन अगर समाधान नहीं होता तो आप आगे की कार्यवाही कर सकते है।

3. जरूरी कागज़ात इकट्ठा करें

अपने सामान की रसीद, बिल, गारंटी कार्ड, और शिकायत के सबूत (जैसे फोटो, व्हाट्सएप मैसेज) संभाल कर रखें। ये सब आपको कोर्ट में चाहिए होंगे।

4. नजदीकी कंज्यूमर फोरम का पता लगाएं

अपने शहर या जिले में कंज्यूमर कोर्ट या फोरम कहां है, इसका पता लगाएं।

5. लिखित में शिकायत तैयार करें

अब अपनी समस्या को साफ व सरल भाषा में लिखें और यह बताएं कि आप क्या कार्यवाही करना चाहते हैं। इसमें अपने और दुकानदार के नाम, पता और समस्या की पूरी जानकारी दें।

6. शिकायत कंज्यूमर कोर्ट में जमा करें

अब तैयार की हुई शिकायत को कोर्ट में जमा कर दें। साथ में अपने काग़ज़ात भी लगाएं। इसके बाद आपको कोर्ट में आपको कुछ मामूली फीस भी देनी पड़ सकती है।

7. कोर्ट की तारीख का इंतजार करें

कोर्ट आपकी शिकायत पर सुनवाई करेगा और दोनों पक्षों से बात करेगा। आपको कोर्ट में जाना होगा और अपना पक्ष बताना होगा।

8. न्याय मिलने तक ध्यान रखें

इसके बाद सभी बातों का ध्यान रखते हुए कोर्ट अपना फैसला देगा, जिसमें आपको मुआवजा या सामान  या उसके पैसे वापिस मिल सकते है।



Consumer Court में ऑनलाइन शिकायत (Online Complaint) कैसे करें?

अगर आप घर बैठे ऑनलाइन कंज्यूमर कोर्ट में शिकायत करना चाहते हैं, तो इस प्रक्रिया का इस्तेमाल कर सकते है:

1. सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं

भारत में कंज्यूमर कोर्ट की शिकायत के लिए National Consumer Helpline (https://consumerhelpline.gov.in/public) या आपके राज्य की कंज्यूमर फोरम की आधिकारिक वेबसाइट खोलें।

2. रजिस्ट्रेशन करें

अगर आप पहली बार शिकायत कर रहे हैं, तो वेबसाइट पर अपना नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल और कुछ जरूरी जानकारी देकर रजिस्ट्रेशन करें।

3. लॉगिन करें

रजिस्ट्रेशन के बाद दिए गए यूजरनाम और पासवर्ड से लॉगिन करें।

4. शिकायत फॉर्म भरें

  1. वेबसाइट पर उपलब्ध ‘शिकायत दर्ज करें’ या ‘File Complaint’ वाला फॉर्म खोलें।
  2. अपना नाम और पता भरें।
  3. शिकायत की पूरी जानकारी लिखें।
  4. जिस कंपनी या दुकान से आप परेशान हैं, उसका नाम और पता लिखें।
  5. जो सामान या सेवा आपने खरीदी, उसकी जानकारी दें।

5. जरूरी दस्तावेज अपलोड करें

अपने बिल, रसीद, फोटो या कोई भी सबूत जो आपकी शिकायत के लिए ज़रूरी हो, उन्हें फॉर्म में अपलोड करें।

6. शिकायत जमा करें

सारी जानकारी भरने के बाद फॉर्म को अच्छी तरह चेक करें और ‘Submit’ या ‘जमा करें’ पर क्लिक करें।

7. शिकायत नंबर नोट करें

शिकायत जमा होने के बाद आपको एक शिकायत नंबर मिलेगा। इसे संभाल कर रखें ताकि आगे शिकायत की स्थिति देख सकें।

8. शिकायत की स्थिति (Status) देखें

आप अपनी शिकायत की स्थिति ऑनलाइन वेबसाइट पर लॉगिन करके देख सकते हैं। कोर्ट से कोई सूचना भी आपको मोबाइल या ईमेल पर मिल सकती है।
 



शिकायत करने के लिए कौन सा कंस्यूमर फॉर्म चुनें?

जब आप कंज्यूमर कोर्ट में केस करना चाहते हैं, तो आपको यह समझना जरूरी है कि किस कोर्ट में केस करना है। ये इस बात पर निर्भर करता है कि आपका पैसे का मामला कितना बड़ा है।

  1. जिला फोरम (District Forum): अगर आपका मामला ₹50 लाख तक का है, तो आप जिला फोरम में केस कर सकते हैं। यह सबसे नजदीकी और छोटा फोरम होता है।
  2. राज्य आयोग (State Commission): अगर विवाद की रकम ₹50 लाख से ₹2 करोड़ के बीच है, तो आपका केस राज्य आयोग में जाएगा।
  3. राष्ट्रीय आयोग (National Commission): अगर आपका विवाद ₹2 करोड़ से ऊपर का है, तो आपको राष्ट्रीय आयोग में केस करना होगा।


Jurisdiction (अधिकार क्षेत्र) क्या होता है?

Jurisdiction का मतलब होता है उस सही जगह या कोर्ट से जहाँ आपका मामला सुना और सुलझाया जाता है। जब आप कंज्यूमर कोर्ट में शिकायत करते हैं, तो आपको अपने मामले के अनुसार ही केस किसी दूर या गलत कोर्ट में नहीं जाना चाहिए, बल्कि सही जगह के कोर्ट में जाना चाहिए ताकि आपको न्याय मिल सके।



केस करने की फीस कितनी होती है?

जब आप कंज्यूमर कोर्ट में अपनी कोई शिकायत लेकर जाते हो, तो आपको अपने मामले के हिसाब से एक छोटी सी फीस देनी पड़ती है। जो हर मामले के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है। अगर आप गरीब हो या SC/ST (Scheduled Castes/Tribes) से हो तो आपको ये फीस नहीं देनी पड़ती, आपकी फीस माफ़ कर दी जाती है।
 



कंस्यूमर कोर्ट में केस फाइल करने की समय-सीमा (Time Limit) क्या है?

अगर आपने कोई सामान खरीदा है या सेवा ली है और उसमें कोई खराबी या दिक्कत दिखती है, तो आपको 2 साल के अंदर उपभोक्ता अदालत (Consumer Court) में केस करना चाहिए। अगर आप 2 साल से ज्यादा समय बाद केस करना चाहते हैं, तो आपको कोर्ट को बताना होगा कि देर क्यों हुई। बिना वजह देर होने पर केस मंजूर नहीं किया जाता।
 



क्या उपभोक्ता अदालत में केस करने के लिए वकील जरूरी होता है?

कंज्यूमर कोर्ट में शिकायत करने के लिए वकील (Lawyer) रखना ज़रूरी नहीं होता। आप खुद भी अपने केस को अदालत में पेश कर सकते है। अगर आप चाहें तो किसी वकील की मदद ले सकते हैं, इससे केस में थोड़ा फायदा हो सकता है, लेकिन बिना वकील के भी आप आसानी से केस कर सकते हैं।

निष्कर्ष:- अगर आपके साथ किसी दुकान या कंपनी ने खराब सामान देकर धोखा किया है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। कंज्यूमर कोर्ट आपके हक की रक्षा के लिए है। यहाँ आप कम खर्च में और आसानी से न्याय पा सकते हैं। अगर आपको इस कानूनी प्रक्रिया को समझने में परेशानी हो रही है, या आपको यह नहीं समझ आ रहा कि केस कैसे करना है, तो आप अभी नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके घर बैठे हमारे अनुभवी वकीलों से बात कर सकते हैं।



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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल


उपभोक्ता अदालत क्या है?

कंज्यूमर कोर्ट एक ऐसी अदालत है जहाँ ग्राहक अपने साथ हुए धोखे या खराब सेवा के खिलाफ शिकायत कर सकता है।



कंस्यूमर कोर्ट में केस करने की समय सीमा क्या है?

आपको शिकायत मिलने के 2 साल के अंदर Consumer Court में केस करना चाहिए। अगर 2 साल से ज्यादा हो गए हैं, तो देर का कारण बताना पड़ता है।



क्या कंज्यूमर कोर्ट में बिना वकील के खुद से शिकायत कर सकते हैं?

हाँ, बिल्कुल बिना वकील के भी उपभोक्ता अदालत में केस किया जा सकता है, लेकिन एक वकील का होना कानूनी रुप से आपके लिए फायदेमंद होता है। 



क्या फ्लाइट में देरी होने व सामान खो जाने पर उपभोक्ता अदालत में केस किया जा सकता है?

हाँ, अगर एयरलाइन की सेवा में कमी है, जैसे फ्लाइट में देरी, सामान खो जाना या खराब सेवा, तो आप उपभोक्ता अदालत में शिकायत कर सकते हैं।