ट्रेडमार्क क्या होता है? भारत में ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया, फीस और नियम



​अगर आपने कोई बिज़नेस शुरू किया है या कोई नया ब्रांड बनाया है, तो यह सिर्फ आपके मेहनत और सपनों का नतीजा नहीं, बल्कि आपकी पहचान भी है। लेकिन क्या होगा अगर कोई और आपके ब्रांड के नाम का गलत इस्तेमाल करने लगे? ऐसे मामलों में "ट्रेडमार्क" आपके बिज़नेस की पहचान की सुरक्षा करता है, लेकिन भारत में ज्यादातर लोग इस बारे में जागरूक नहीं है। वे सोचते हैं कि सिर्फ बिज़नेस रजिस्ट्रेशन या GST नंबर लेना ही काफी है, लेकिन जब कोई उनकी ब्रांड पहचान चुरा लेता है, तब उन्हें एहसास होता है कि ट्रेडमार्क पंजीकरण (Trademark Registration) कितना जरूरी था। अगर आप चाहते हैं कि आपका ब्रांड सिर्फ आपका रहे और कोई और उसका गलत इस्तेमाल न कर सके, तो ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन की पूरी प्रक्रिया को समझना बेहद जरूरी है। आज के इस लेख में हम आपको ट्रेडमार्क के विषय पर जानकारी देते हुए बताएंगे कि, ट्रेडमार्क क्या है, और यह क्यों जरुरी है? भारत में ट्रेडमार्क रजिस्टर कैसे करे - नियम, डाक्यूमेंट्स, फीस और प्रक्रिया?

ट्रेडमार्क को लेकर जानकारी होना हर बिज़नेस मालिक के लिए जरूरी है, चाहे वह छोटा व्यापारी हो या बड़ी कंपनी। इस लेख को पढ़ने के बाद आपको ट्रेडमार्क से जुड़ी हर जरूरी जानकारी मिल जाएगी, जिससे आप अपने बिज़नेस को कानूनी रूप से सुरक्षित रख सकेंगे। इसलिए अगर आप भी अपने ब्रांड को पहचान दिलाना और उसे कानूनी सुरक्षा देना चाहते हैं, तो इस लेख को पूरा पढ़ें!


विषयसूची

  1. ट्रेडमार्क क्या है? और यह क्यों जरुरी है?
  2. भारत में ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन के कानून और नियम क्या है?
  3. भारत में ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन कैसे करें?
  4. भारत में ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन की ज़रूरत क्यों पड़ती है?
  5. ट्रेडमार्क कितने प्रकार के होते हैं?
  6. इंडिया में ट्रेडमार्क रजिस्टर कराने के लिए जरुरी डाक्यूमेंट्स?
  7. भारत में ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन में कितना खर्चा होता है?
  8. ऐसे कौन से ट्रेडमार्क है जिनको रजिस्टर नहीं किया जा सकता?
  9. ट्रेडमार्क कानून का उल्लंघन करने पर सजा और जुर्माना
  10. अगर कोई आपका ट्रेडमार्क इस्तेमाल कर रहा है, तो क्या करें?
  11. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल


ट्रेडमार्क क्या है? और यह क्यों जरुरी है?

ट्रेडमार्क किसी भी कंपनी, बिज़नेस या ब्रांड की पहचान (Identity) होता है। यह कोई नाम, लोगो (Logo), नारा (Slogan), चित्र, डिज़ाइन या खास निशान (Special Marks) हो सकता है, जिससे लोग आपके ब्रांड को तुरंत पहचान सकें।

सरल भाषा में कहे तो, जिस तरह हर इंसान की पहचान उसके नाम और चेहरे से होती है, उसी तरह किसी बिज़नेस की पहचान उसका ट्रेडमार्क होता है। उदाहरण: जैसे आप किसी व्यक्ति के फोन पर दूर से 'Apple' का कटा हुआ सेब यानि उसका लोगो देखते है, तो बिना नाम पढ़े भी समझ जाते है, कि यह फोन Apple कंपनी का है।
 



भारत में ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन की ज़रूरत क्यों पड़ती है?

ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन कराना बहुत फायदेमंद होता है और इसकी छोटे से लेकर बड़े बिजनेसमैन तक सभी को आवश्यकता पड़ती है। आइए, इसे सरल भाषा में विस्तार से समझते हैं।

अपनी पहचान की सुरक्षा

जब कोई व्यक्ति किसी नए बिज़नेस को शुरू करता है, तो वह अपनी पहचान बनाने के लिए बहुत मेहनत करता है। लेकिन उसने अपने बिजनेस का ट्रेडमार्क रजिस्टर नहीं किया होगा, तो कोई और व्यक्ति उसे कॉपी कर सकता है और उसके नाम का गलत इस्तेमाल कर सकता है।

उदाहरण: मान लीजिए आपने " Krishna Sweets" नाम से एक मिठाई की दुकान खोली और कुछ समय बाद वह बहुत ज्यादा मशहूर हो गई। अब कोई और व्यक्ति " Krishna Sweets " नाम से दुकान खोल ले और घटिया मिठाइयाँ बेचे, तो लोग उसे आपकी ही दुकान समझ लेंगे। इसलिए उस नाम का ट्रेडमार्क रजिस्टर होने पर आप इस नकल (Copy) करने वाले व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं।

बाज़ार में अलग पहचान बनती है

आजकल एक ही तरह के बहुत सारे ब्रांड होते हैं। अगर आपकी कंपनी का ट्रेडमार्क रजिस्टर होगा, तो वह भीड़ में भी अलग नजर आएगी।

कानूनी सुरक्षा मिलती है

अगर आपका ट्रेडमार्क रजिस्टर है और कोई दूसरा आपकी कंपनी का नाम, लोगो या पहचान चुराने की कोशिश करता है, तो आप उसके खिलाफ कोर्ट में मुकदमा (Court Case) कर सकते हैं।



ट्रेडमार्क कितने प्रकार के होते हैं?

  1. शब्द वाले ट्रेडमार्क (Word Mark): ये वो ट्रेडमार्क होते हैं जिनमें सिर्फ शब्द (Word) लिखे होते हैं। जैसे, "गूगल" या "अमूल"। इनमें कोई चित्र या डिज़ाइन नहीं होता, सिर्फ नाम होता है। यह नाम ही किसी ब्रांड की पहचान बनता है।
  2. चित्र वाले ट्रेडमार्क (Logo Mark): ये वो ट्रेडमार्क होते हैं जिनमें कोई खास चित्र (Picture) या डिज़ाइन होता है। जैसे, Nike का लोगो आदि। ये चित्र या डिज़ाइन उस ब्रांड को पहचानने में मदद करते हैं।
  3. आवाज़ वाले ट्रेडमार्क (Sound Mark): ये वो ट्रेडमार्क होते हैं जिनमें कोई खास आवाज़ (Special Voice) होती है, जो उस ब्रांड की पहचान बन जाती है। जैसे, नोकिया की रिंगटोन आदि।
  4. रंग वाले ट्रेडमार्क (Color Trademark): ये वो ट्रेडमार्क होते हैं जिनमें कोई खास रंग (Special Colour) उस ब्रांड की पहचान बन जाता है। जैसे, कैडबरी का बैंगनी रंग। यह रंग देखकर ही लोग पहचान जाते हैं कि यह किस ब्रांड का सामान है।
  5. 3D वाले ट्रेडमार्क (3D Trademark): ये वो ट्रेडमार्क होते हैं जिनमें किसी चीज़ का 3D डिज़ाइन होता है। जैसे, कोका-कोला की बोतल की खास बनावट। यह बनावट देखकर ही लोग उस ब्रांड को पहचान लेते हैं।


इंडिया में ट्रेडमार्क रजिस्टर कराने के लिए जरुरी डाक्यूमेंट्स?

ट्रेडमार्क पंजीकरण (Trademark Registration) के लिए निम्नलिखित दस्तावेजों (Documents) की जरूरत होती है:

1. आवेदक (Applicant) की पहचान से जुड़े दस्तावेज

यदि कोई व्यक्ति खुद के नाम के लिए आवेदन (Application) कर रहा है, तो आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस या पासपोर्ट में से कोई एक दस्तावेज जरूरी होता है। यदि कंपनी के लिए आवेदन किया जा रहा है, तो कंपनी का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, पैन कार्ड, GST रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट की आवश्यकता होती है।

2. ब्रांड नाम और लोगो (Brand Name & Logo)

  • यदि आप किसी नाम का ट्रेडमार्क पंजीकरण (Trademark Registration) कराना चाहते हैं, तो वह नाम साफ-साफ लिखा हुआ होना चाहिए।
  • यदि आप लोगो (Logo Mark) का रजिस्ट्रेशन कराना चाहते हैं, तो उस लोगो की एक हाई-क्वालिटी फोटो (JPEG या PNG Image Format) की जरूरत होगी।
  • यदि आपका ट्रेडमार्क किसी विशेष रंग (Color Mark) से जुड़ा है, तो उस रंग की सही पहचान (Color Code) देनी होगी।


भारत में ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन में कितना खर्चा होता है?

ट्रेडमार्क रजिस्टर कराने में कितना खर्चा आएगा यह दो बातों पर निर्भर करता है, एक तो सरकार को कितनी फीस देनी है, और दूसरा किसी वकील या एजेंट से मदद ले रहे हैं, तो उनकी फीस क्या होगी?

1. सरकार की फीस:

अगर आप अपने खुद के नाम पर या आपकी किसी छोटी कंपनी (Startup) के लिए ट्रेडमार्क का आवेदन कर रहे हैं, तो आपको ₹4,500 फीस देनी होगी। लेकिन अगर आपकी बड़ी कंपनी है, तो उसके लिए आपको 9,000 रुपये देने होंगे।

2. वकील या एजेंट की फीस:

अगर आप खुद ही ऑनलाइन आवेदन कर रहे हैं, तो सिर्फ उपर बताई गई सरकारी फीस ही आपको देनी होगी। लेकिन अगर आप किसी वकील या एजेंट से मदद ले रहे हैं, तो उनकी फीस अलग से लगेगी। यह फीस अलग-अलग काम के लिए अलग-अलग हो सकती है, जैसे:

  • ट्रेडमार्क ढूंढना: 1,000 से 3,000 रुपये
  • आवेदन भरना: 3,000 से 10,000 रुपये
  • अगर कोई परेशानी आती है, तो उसे ठीक करवाना: 5,000 से 25,000 रुपये
  • ट्रेडमार्क पर नज़र रखना: 2,000 से 10,000 रुपये हर साल
 

3. अन्य खर्चे:

हर 10 साल में ट्रेडमार्क को फिर से रजिस्टर करवाना पड़ता है, जिसके लिए 9,000 रुपये देने होते हैं।



भारत में ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन के कानून और नियम क्या है?

भारत में ट्रेडमार्क रजिस्टर कराने का काम 'ट्रेडमार्क अधिनियम, 1999' के तहत होता है। यह कानून आपके बिज़नेस, सामान या सर्विस के नाम, लोगो या टैगलाइन को कानूनी सुरक्षा (Legal Protection) देता है।

ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन के ज़रूरी नियम:

  • सही ट्रेडमार्क: कोई भी नाम, लोगो, रंग या निशान जो आपके बिज़नेस को दूसरों से अलग दिखाए, उसे ट्रेडमार्क के रूप में रजिस्टर कराया जा सकता है।
  • पहले आओ, पहले पाओ: जो पहले आवेदन करेगा, ट्रेडमार्क उसी को मिलेगा।
  • सबसे अलग होना ज़रूरी: अगर कोई ट्रेडमार्क पहले से रजिस्टर है, तो वैसा ही या मिलता-जुलता नाम रजिस्टर नहीं हो सकता।
  • ट्रेडमार्क की वैधता: एक बार रजिस्टर होने के बाद ट्रेडमार्क 10 साल तक मान्य (Valid) रहता है। इसके बाद, इसे फिर से रजिस्टर करवाना पड़ता है।
  • आपत्ति और विरोध: अगर किसी और को आपके ट्रेडमार्क से परेशानी है, तो वह आपत्ति (Objection) कर सकता है, जिससे आपका रजिस्ट्रेशन रुक सकता है।


ऐसे कौन से ट्रेडमार्क है जिनको रजिस्टर नहीं किया जा सकता?

ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन के लिए कुछ नियम (Rules) ऐसे भी होते हैं, जिनके तहत हर नाम या लोगो को मंजूरी (Approval) नहीं मिलती। नीचे दिए गए ट्रेडमार्क को रजिस्टर नहीं किया जा सकता:

  • सामान्य शब्द (Generic Words) – कोई ऐसा शब्द जो खुद ही किसी चीज़ या सेवा (Product or Service) का मतलब बताता हो, उसे ट्रेडमार्क नहीं बना सकते। जैसे – "MILK" (दूध के लिए), "SUGAR" (चीनी के लिए) या "WATER" (पानी के लिए)।
  • पहले से रजिस्टर किया गया नाम – अगर कोई नाम पहले से किसी और के नाम पर रजिस्टर है, तो वही नाम या उससे मिलता-जुलता नाम किसी और को नहीं मिल सकता। जैसे – "Nikee" या उससे मिलता जुलता नाम।
  • आपत्तिजनक नाम– कोई ऐसा नाम जो गंदा, अपमानजनक हो या धर्म और समाज के खिलाफ हो, उसे ट्रेडमार्क नहीं बना सकते। इसी तरह अगर कोई नाम लोगों को धोखा देने वाला हो या झूठा दावा (False Claim) करता हो, तो वह भी मंजूर (Approved) नहीं होगा।
  • राष्ट्रीय प्रतीक या सरकारी चिह्न – भारतीय संविधान, सरकारी संस्थानों या देश के प्रतीकों (जैसे अशोक चक्र, तिरंगा, महात्मा गांधी की छवि) का इस्तेमाल ट्रेडमार्क के रूप में नहीं किया जा सकता।


भारत में ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन कैसे करें?

अगर आप अपने बिजनेस के नाम, लोगो, या ब्रांड को कानूनी रूप से सुरक्षित करना चाहते हैं, तो ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन (Trademark Registration) रजिस्ट्रेशन की पूरी प्रक्रिया को समझना बहुत जरुरी है, जो कि इस प्रकार है:-

1. ट्रेडमार्क रजिस्टर करने से पहले जरूरी बातें

ट्रेडमार्क रजिस्टर करने से पहले कुछ महत्वपूर्ण चीजें ध्यान में रखनी चाहिए:

  • अलग नाम या लोगो चुने – आपका ट्रेडमार्क किसी और के ब्रांड से मिलता-जुलता नहीं होना चाहिए।
  • सही क्लास चुनें – ट्रेडमार्क को अलग-अलग तरह के बिज़नेस के हिसाब से 45 समूहों व श्रेणियों (Group & Categories) में बांटा गया है। मतलब, कपड़ों से जुड़े ट्रेडमार्क की अलग श्रेणी होगी, खाने-पीने की चीजों की अलग और दवाइयों की अलग।
 

2. ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया

स्टेप 1: ट्रेडमार्क सर्च (Trademark Search) करें

  • सबसे पहले यह जांच करें कि जो ट्रेडमार्क आप रजिस्टर करवाना चाहते हैं, वह पहले से किसी और के नाम पर तो नहीं है।
  • इसके लिए IP India की ऑफिसियल वेबसाइट (https://ipindia.gov.in) पर जाकर "Trademark Public Search" ऑप्शन में सर्च करें। अगर नाम पहले से मौजूद नहीं है, तो आप आगे बढ़ सकते हैं। लेकिन, अगर नाम पहले से मौजूद है, तो आपको नया व अलग नाम (Unique Name) चुनना होगा।
 

स्टेप 2: ट्रेडमार्क आवेदन तैयार करें (Prepare the Application)

ट्रेडमार्क रजिस्टर करने के लिए आवेदन (Application) तैयार करना होता है। इसमें आपको निम्नलिखित जानकारी देनी होती है:

  • आपके बिज़नेस का नाम और पता – यानी आपकी कंपनी या दुकान का पूरा नाम और उसका पता।
  • ट्रेडमार्क की जानकारी –यह कोई नाम, चिन्ह (Logo) या नारा (Slogan) हो सकता है।
  • ट्रेडमार्क की कैटेगरी (Class) – आपको बताना होगा कि आपका ट्रेडमार्क किस चीज़ से जुड़ा है, जैसे कपड़े, दवा, इलेक्ट्रॉनिक सामान आदि।
  • सामान या सेवा की जानकारी – यानी आप कौन-सा सामान बेचते हैं या कौन-सी सेवा (Service) देते हैं।
  • पहले से उपयोग कर रहे हैं या नया है – अगर आप पहले से इस नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो उसकी तारीख (Date) बतानी होगी। अगर नया है, तो नए आवेदन (New Application) के रूप में दर्ज होगा।

जरूरी दस्तावेज:

  1. बिजनेस का रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र (अगर कोई हो)
  2. लोगो या ब्रांड का डिज़ाइन (अगर कोई हो)
  3. आधार कार्ड, पैन कार्ड (व्यक्तिगत आवेदन के लिए)

स्टेप 3: ऑनलाइन आवेदन जमा करें (File the Application Online)

  1. सबसे पहले IP India की आधिकारिक वेबसाइट (https://ipindia.gov.in/) पर जाएं।
  2. इसके बाद "Trademark Application" सेक्शन में जाएं।
  3. आगे TM-A फार्म को भरें। इसमें आपको व्यवसाय (Business) का नाम, पता, ट्रेडमार्क की जानकारी, और सभी दस्तावेज अपलोड (Documents upload) करने होंगे।
  4. फीस का भुगतान करें: इसके बाद आपको इस प्रक्रिया में लगने वाली फीस का भुगतान (Fees Payment) करना होगा। जैसे स्टार्टअप, लघु उद्योग (Small Business) के लिए – ₹4,500 बड़ी कंपनियों और बड़ी फर्मों के लिए – ₹9,000
  5. अंत में फॉर्म को जमा(Submit) करें और रसीद (Acknowledgment Receipt) डाउनलोड करें।

स्टेप 4: आवेदन की जांच (Examination by Registrar)

आवेदन जमा (Application Submit) करने के बाद ट्रेडमार्क रजिस्ट्रार इसकी जांच करता हैं। अगर आवेदन में कोई गलती या विरोध नहीं होता, तो इसे मंजूरी मिल जाती है। अगर कोई आपत्ति (Objection) आती है, तो आपको जवाब देना होता है। इस प्रक्रिया में आमतौर पर 1 से 2 महीने तक का समय लग सकता है।

स्टेप 5: ट्रेडमार्क जर्नल में पब्लिकेशन (Publication in Trademark Journal)

अगर आपका आवेदन मंजूर (Application Approved) हो जाती है, तो इसे ट्रेडमार्क जर्नल (Trademark Journal) में प्रकाशित (Published) किया जाता है। यह इसलिए किया जाता है ताकि कोई अन्य व्यक्ति या कंपनी आपत्ति (Opposition) दर्ज कर सके। अगर 4 महीने तक कोई विरोध नहीं होता, तो ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन के लिए आगे बढ़ता है।

स्टेप 6: ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (Trademark Registration Certificate)

अगर किसी ने कोई विरोध (Opposition) नहीं किया, तो आपका ट्रेडमार्क स्वीकृत (Approved) हो जाता है और आपको रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट मिल जाता है। अब आपका ट्रेडमार्क कानूनी रूप से सुरक्षित हो जाता है। इस पूरी प्रक्रिया को पूरा होने में 12 से 18 महीने लग सकते हैं।



ट्रेडमार्क कानून का उल्लंघन करने पर सजा और जुर्माना

अगर कोई व्यक्ति बिना अनुमति (Permission) किसी और के रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क (Trademark) का इस्तेमाल करता है, तो यह कानून के खिलाफ होता है। इसे ट्रेडमार्क उल्लंघन (Trademark Infringement) कहा जाता है। भारत में यह एक गंभीर अपराध है, जिसके लिए कानूनी सजा का प्रावधान (Provision of Punishment) है।

ट्रेडमार्क उल्लंघन पर सजा क्या है?

अगर कोई ट्रेडमार्क कानून का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ The Trademarks Act, 1999 के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इस कानून के तहत दोषी (Guilty) पाये जाने वाले व्यक्ति को 6 महीने से 3 साल तक की जेल हो सकती है। इसके अलावा उस व्यक्ति पर 50,000 रुपये से 2 लाख रुपये तक का जुर्माना (Fine) भी लगाया जा सकता है।

व्यापार पर रोक: इसके साथ ही गलत तरीके से इस्तेमाल किए गए सभी प्रोडक्ट या सर्विस पर प्रतिबंध (Ban) लगाया जा सकता है।



अगर कोई आपका ट्रेडमार्क इस्तेमाल कर रहा है, तो क्या करें?

अगर आपने अपना ट्रेडमार्क (Trademark) रजिस्टर करा लिया है और कोई दूसरा व्यक्ति या कंपनी बिना आपकी अनुमति के उसका इस्तेमाल कर रही है, तो ऐसे में आपको तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।

1. पहले सबूत इकट्ठा करें

  • सबसे पहले इस बात को पक्का करें कि आपकी ट्रेडमार्क की नकल (Copy) हो रही है। इसके लिए:
  • उस व्यक्ति या कंपनी के विज्ञापन, पैकेजिंग या वेबसाइट की तस्वीरें लें।
  • यदि उनके उत्पाद (Product) बाजार में उपलब्ध हैं, तो उनके बिल, रसीद या कोई और सबूत इकट्ठा करें।
  • अपने रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क के दस्तावेज तैयार रखें।

2. कानूनी नोटिस (Legal Notice) भेजें

  • सबसे पहले एक वकील की मदद लें और उल्लंघन करने वाले व्यक्ति या कंपनी को एक कानूनी नोटिस (Legal Notice) भेजें।
  • इस नोटिस में बताया जाएगा कि वे आपके ट्रेडमार्क का गलत तरीके से इस्तेमाल कर रहे हैं और उन्हें तुरंत यह बंद करना होगा।
  • कई बार सिर्फ कानूनी नोटिस भेजने से ही सामने वाला व्यक्ति डर जाता है और ट्रेडमार्क का इस्तेमाल बंद कर देता है।

3. कोर्ट में केस दर्ज करें

अगर कानूनी नोटिस भेजने के बाद भी सामने वाला व्यक्ति ट्रेडमार्क का इस्तेमाल बंद नहीं करता, तो आप कोर्ट में केस दायर कर सकते हैं।

निष्कर्ष: अगर आपने अपना ट्रेडमार्क रजिस्टर नहीं कराया है, तो आपका ब्रांड हमेशा चोरी या गलत इस्तेमाल होने के खतरे में रहेगा। इसलिए, समय रहते अपने ब्रांड को कानूनी रूप से सुरक्षित करना ही समझदारी है। अगर आपको ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन या इससे जुड़ी किसी भी कानूनी सलाह की जरूरत है, तो आप हमारे काबिल और अनुभवी वकीलों से बात करके घर बैठे पूरी कानूनी सहायता प्राप्त कर सकते हैं। 



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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल


ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन कितने समय में होता है?

भारत में ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन की पूरी प्रक्रिया में 6 महीने से 2 साल तक लग सकते है। लेकिन आवेदन जमा करने के बाद, आप इसे ™ चिह्न के साथ इस्तेमाल कर सकते हैं।



ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन कितने साल तक वैध (Valid) रहता है?

एक बार ट्रेडमार्क रजिस्टर होने के बाद यह 10 साल तक वैध रहता है। इसके बाद आप इसे रिन्यू (Renew) कर सकते हैं।



ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन रिजेक्ट होने पर क्या करें?

आपका आवेदन रिजेक्ट हो जाता है, तो आपको रिजेक्शन का कारण समझना होगा (जैसे, पहले से कोई मिलता-जुलता नाम होना)। इसके बाद इसमें जरूरी बदलाव करके दोबारा आवेदन करना होगा।



क्या भारत में ट्रेडमार्क रिन्यू करना जरूरी है?

हाँ, ट्रेडमार्क को हर 10 साल में रिन्यू कराना जरूरी होता है। अगर समय पर रिन्यू नहीं किया गया, तो आपका ट्रेडमार्क खत्म हो सकता है और कोई और इसे रजिस्टर कर सकता है।