माता-पिता की मारपीट से परेशान बालिग लड़की घर से अलग कैसे हो


सवाल

मेरी उम्र अठारह वर्ष से अधिक है और मैं अपने माता-पिता और भाई की प्रताड़ना से तंग आकर अपनी मर्जी से घर से अलग होना चाहती हूं। उन्होंने मुझे घर में कैद कर रखा है, मेरे साथ मारपीट करते हैं और मेरे सारे जरूरी दस्तावेज भी छिपा दिए हैं। मैं जानना चाहती हूं कि क्या कानून मुझे परिवार से अलग होने और खुद को उनसे बेदखल करवाने का अधिकार देता है?

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जी हां, अगर आप बालिग हैं (18 वर्ष से ऊपर), तो भारतीय कानून आपको अपनी मर्जी से जीवन जीने और परिवार से अलग रहने का पूर्ण अधिकार देता है। संविधान का अनुच्छेद 21 आपको 'व्यक्तिगत स्वतंत्रता' (Personal Liberty) की गारंटी देता है। कोई भी, चाहे वह माता-पिता ही क्यों न हों, आपको आपकी मर्जी के खिलाफ जबरदस्ती घर में कैद नहीं रख सकता।

घर में बंद करके रखना और मारपीट करना गंभीर अपराध है। नई 'भारतीय न्याय संहिता' (Bharatiya Nyaya Sanhita - BNS) की धारा 127 (सदोष परिरोध/Wrongful Confinement) और धारा 115 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना) के तहत आप अपने परिवार वालों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवा सकती हैं। घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत भी आपको सुरक्षा पाने का अधिकार है।

जहां तक दस्तावेजों (Documents) का सवाल है, वे आपकी निजी संपत्ति हैं। उन्हें छिपाना गैर-कानूनी है। आप पुलिस की मदद से अपने आधार कार्ड, मार्कशीट और अन्य कागजात वापस मांग सकती हैं। परिवार वाले आपको 'बेदखल' (Disown) कर सकते हैं, यानी संपत्ति से हिस्सा नहीं देंगे, लेकिन वे आपको कैद नहीं कर सकते।

घर से निकलने के बाद, अपनी सुरक्षा के लिए आपको तुरंत अपने राज्य के उच्च न्यायालय (High Court) में एक 'सुरक्षा याचिका' (Protection Petition) दायर करनी चाहिए। कोर्ट पुलिस को आदेश देगा कि आपको सुरक्षा दी जाए और परिवार वाले आपके जीवन में दखल न दें। अगर आपको तुरंत मदद चाहिए तो आप महिला हेल्पलाइन नंबर 181 या 112 पर कॉल कर सकती हैं जो आपको पुलिस सुरक्षा के साथ घर से निकालने (Rescue) में मदद करेंगे।

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हमारा कानून हर बालिक इंसान को चाहे वह लड़का हो या लड़की यह हक देता है कि वह अपना जीवन अपनी मर्जी से जी सकें .

यदि आप बालक हैं यानी कि यदि आप की उम्र 18 वर्ष उससे अधिक है तो आप अपना जीवन अपनी मर्जी से जी सकती है .

अगर आपको कोई भी आपका जीवन आपकी मर्जी से जीने से मना करता है या जोर जबरदस्ती करता है तो आप अपने की पुलिस थाने में जाकर कंप्लेंट कराएं .

आप अपने नजदीकी कोर्ट में जाकर भी एक अर्जी दे सकती हैं और न्यायालय माता पिता व भाई को यह आदेश देगा कि आपको आपका जीवन आपकी मर्जी से जीने दिया जाए .


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