०१ क्या पुलिस विभाग खाताधारक मृत्यु न


सवाल

०१- क्या पुलिस विभाग किसी भी खाताधारक के मृत्यु के बाद उसके नामिनी को प्राप्त पैसों को मौखिक आदेश पर वारिसदारो में हिस्सा बंटवा सकती है ? ०२- पुलिस चौकी में लिखित शिकायत प्राप्त होने के बाद पत्र प्राप्ति कि रसीद देने व अन्य क्या क्या नियमत करना चाहिये ? ०३- अगर पुलिस कि मध्यस्थता में सुलहनामा पक्ष विपक्ष द्वारा लिखवा कर जोर दबाव में दिया गया हो और पुलिस चौकी से सुलहनामे पर प्रमाणित या पुलिस का मुहर तक ना लगा हो तो मौखिक आदेश कहाँ तक सही है ? ०४- यदि पुलिस के समक्ष कोइ मामला पीडित द्वारा ले जाया गया और अपनी बात से अवगत कराया गया बिना किसी प्रमाण के पुलिस ने कार्यवाही कर दिया जिससे कि भविष्य में पुन: विवाद होने पर यह साबित ना हो सके कि मामला किस दिनांक को अथवा किस प्रभारी के कार्यकाल में सुलहनामा लिखवाया गया ? पीडित कैसे साबित कर पायेगा ? ०५- पुलिस विभाग द्वारा सुलानामा लिखने के क्या नियम हैं व यदि विभाग ने जोर दबाव में बिना पीडित कि पुरी बातों को सुने ही मुकदमा या चालान करने कि धमकी देकर सुलह को मजबूर किया हो व प्रार्थी के साथ अन्याय उसके बाद भी हुवा हो तो पीडित को क्या करे ?

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पुलिस विभाग किसी भी खाता धारक की मृत्यु के बाद उसके नॉमिनी को प्राप्त पैसों में से वारिस धारों में हिस्सा नहीं बटवा सकती है । पुलिस चौकी में लिखित शिकायत की प्राप्ति रिसीविंग दी जाती है यदि शिकायत की रिसीविंग नहीं जाती तो पुलिस को लगता है कि शिकायत किसी संगीन अपराध के बारे में है तो पुलिस तुरंत एफ आई आर दर्ज करती है । अगर पुलिस की मध्यस्था में सुलहनामा पक्ष विपक्ष द्वारा लिखवा कर जोर दबाव में दिया गया है और आप पुलिस की इस कार्यवाही से यदि संतुष्ट नहीं है तू आप इस समझौते के विरुद्ध कोर्ट में अपना आवेदन दे सकते हैं


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