घर के सामने देह बादी जमीन से रास्ता कैसे ले
सवाल
उत्तर (2)
हाँ, आप कानूनी तरीके से अपना रास्ता वापस प्राप्त कर सकते हैं और उसे चौड़ा भी करवा सकते हैं। चूंकि आप पिछले 10 सालों से उस रास्ते का उपयोग अपनी गाड़ी लाने के लिए कर रहे हैं, इसलिए आपको भारतीय सुखाचार अधिनियम (Indian Easements Act) के तहत 'सुखाचार का अधिकार' प्राप्त है। कानून कहता है कि यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से किसी रास्ते का उपयोग कर रहा है, तो उसे अचानक रोका नहीं जा सकता।
चूंकि वह जमीन 'देह बादी' (गांव की आबादी वाली भूमि) है, इसलिए वह किसी की निजी संपत्ति नहीं बल्कि सार्वजनिक या ग्राम समाज की संपत्ति मानी जाती है। ऐसी जमीन पर किसी भी व्यक्ति को रास्ता रोकने या उसे छोटा करने का कानूनी अधिकार नहीं है। आप भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 152 के तहत उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (SDM) के पास शिकायत दर्ज करा सकते हैं। यह धारा सार्वजनिक रास्तों में आने वाली बाधाओं को हटाने के लिए उपयोग की जाती है।
इसके अलावा, आप दीवानी न्यायालय (Civil Court) में भारतीय सुखाचार अधिनियम की धारा 35 (Section 35 of Indian Easements Act) के तहत एक मुकदमा दायर कर सकते हैं। आप कोर्ट से 'स्थायी व्यादेश' (Permanent Injunction) की मांग कर सकते हैं ताकि दूसरी पार्टी को रास्ता रोकने से मना किया जाए और रास्ते को उसकी पुरानी स्थिति में बहाल किया जाए। कोर्ट मामले की गंभीरता को देखते हुए एक 'कमिश्नर' नियुक्त कर सकता है जो मौके पर जाकर रास्ते की चौड़ाई की जांच करेगा।
ग्राम पंचायत या तहसीलदार को भी इस मामले की लिखित सूचना दें। उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता (UP Revenue Code) या आपके राज्य के संबंधित भूमि नियमों के तहत, राजस्व अधिकारी (Revenue Officer) के पास यह शक्ति होती है कि वह सार्वजनिक उपयोग की भूमि से अवैध कब्जे को हटवा सके। यदि रास्ता 10 साल से गाड़ी के लिए इस्तेमाल हो रहा था, तो इसे 3 फुट तक सीमित करना गैरकानूनी है।
आपको सलाह दी जाती है कि आप गांव के कुछ अन्य लोगों को भी इस शिकायत में शामिल करें जो उस रास्ते का उपयोग करते हैं। सामूहिक शिकायत होने पर प्रशासनिक अधिकारी अधिक तेजी से कार्रवाई करते हैं।
नमस्कार ,
आपको अपने पास के न्यायालय में जाकर सेक्शन 35 इंडियन इजमेंट एक्ट के तहत याचिका दर्ज करनी चाहिए . यह याचिका दर्ज करने के बाद कोर्ट द्वारा सुनवाई होगी और छानबीन की जाएगी जिसके उपरांत आपको उचित रास्ता दिया जाएगा आने जाने के लिए . आपको अपने पास के न्यायालय में जाकर एक अच्छे वकील से संपर्क करना चाहिए और उनकी सहायता से यह कार्य प्रारंभ करना चाहिए .
धन्यवाद
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- हेलो यदि कोर्ट सुप्रीम कोर्ट अगर किसी भारतीय मामले में कंपटीशनर को ही लाभ दे और बाकी बचे जो नाम पेटीशनर है उनके लिए कोई भी रास्ता ना छोड़े जैसे की कोई भी नया दवा नहीं लिया जाएगा या नया केस भी रजिस्टर नहीं किया जाएगा सुप्रीम कोर्ट में या हाई कोर्ट में कहीं भी तो इस स्थिति में हम क्या कर सकते हैं कहां जा सकते हैं क्योंकि सुप्रीम कोर्ट भी अगर नया दवा हम नहीं लगा और हाई कोर्ट भी नया दवा नहीं लगा और केवल कृष्ण को लाभ दिया जाएगा बाकी नॉन पेटीशनर को नहीं दिया जा रहा है तो नाम एडिशनल को क्या करना चाहिए
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