मेरे पिताजी दुकान 187 ली बतौर ₹100000 पकड़ी


सवाल

मेरे पिताजी ने एक दुकान 1987 में ली थी बतौर ₹100000 पकड़ी देखें अब मकान मालिक के मन में लालच आ गया है वह उसे खाली कराना चाहता है और हमारे पास पगड़ी की कोई लिखा तो नहीं है किराया हम समय से दे रहे हैं और हमने किराए के लिए एक बार नोटिस विजेता वकील द्वारा उसके लिए क्या समाधान है जो हमारी दुकान खाली ना हो और हमारा कब जाएगी रहे उस पर मकान मालिक और दुकान कौन से हथियाना चाहता है बिजली का मीटर हमारे नाम है पानी का कोई कनेक्शन नहीं है 2006 तक किराया हम टाइम टू टाइम मरते रहे थे पहले उनकी माताजी लेती थी फिर पिताजी लेते थे उसके बाद लड़के के पिताजी के मरने के बाद लड़के का मन में बेईमानी आ गई तो उसने किराया लेना बंद कर दिया फिर 2006 में अपने वकील द्वारा नोटिस भिजवाया नोटिस भिजवाने के बाद उसने तीन तीन साल की 200 साल की रसीदें एक साथ काटी 6 से 2006 से 2012 तक की 2233 साल की रसीदें एक साथ इकट्ठे घाटी 2012 के बाद उसने रसीदें काटने बंद कर दिए फिर बीच में 1 दिन 20 या 21 में एक बार इकट्ठा कर आया लेकर गया और रसीद नहीं दी उसके बाद उसने किसी वकील से हमारे पास दुकान खाली करवाने के लिए नोटिस डाल दिया

उत्तर (2)


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आपको अतिशीघ्र नोटिस का जवाब देना चाहिए जिसमें कि आपको अपनी सारी हसीनों के बारे में किराए के बारे में माताजी पिताजी के वक्त से था सब बताना होगा राजू आपके साथ गलत हो रहा है उसे भी आपस में लिखिए जब आपको अतिशीघ्र भेजना चाहिए यह एडवाइस है


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