मूट कोर्ट क्या होता है


सवाल

मूट कोर्ट क्या होता है और इसकी आवश्यकता क्यों होती है?

उत्तर (1)


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मूट कोर्ट एक वास्तविक अदालत का अनुकरण करने जैसा ही होता है, जहां विधि के छात्रों को वास्तविक अदालत में होने वाली कार्यवाही को उसी रूप में एक मॉडल की तरह समझाया जाता है, इसमें विधि के छात्र भाग लेते हैं, और वास्तविक अदालत की प्रक्रिया और उसकी गतिविधियों को सीखते हैं। इसमें पार्टियों के बीच एक काल्पनिक विवाद पर काल्पनिक सुनवाई और सबूत पेश किये जाते हैं, जिससे छात्रों को अदालतों की प्रक्रिया प्रयोगात्मक तरीके से समझ में आ सके। ज्यादातर, लॉ के स्कूलों में मूट कोर्ट आयोजित किए जाते हैं, जहां छात्रों से वकील और जज के रूप में कानून के क्षेत्र में अपने करियर को आगे बढ़ाने की उम्मीद की जाती है। इसलिए आवश्यक कौशल के विकास के साथ-साथ भविष्य के लिए प्रशिक्षित होने के लिए अभ्यास करने के लिए मूट कोर्ट में प्रशिक्षित कराया जाता है।

मूट कोर्ट क्या होती है?


मूट कोर्ट मूल रूप से एक वास्तविक अदालत की प्रतिकृति की होती है, जहां कानूनी कार्यवाही और परीक्षण होता है, और इस प्रकार इसे मॉक कोर्ट के रूप में भी जाना जा सकता है, जहां कानून की पढ़ाई करने वाले छात्र पेशेवर के रूप में कार्य करते हैं, और अपनी भूमिका के अनुसार सभी जिम्मेदारियों और कर्तव्यों को देखते हैं। मूट कोर्ट एक तरह से एक छात्र को एक उचित वकील के रूप में तैयार करता जाता है। यह विधि के छात्रों को व्यवहारिक ज्ञान देने के आधुनिक तरीकों में से एक है, जो उन्हें एक वास्तविक अदालत के समान काल्पनिक स्थिति में डालते हैं, और फिर इसमें एक तरफ की दो पक्ष काल्पनिक मामलों पर बहस करती हैं, और उचित काल्पनिक सबूत और गवाहों को पेश करती हैं। मूट कोर्ट, अब एक सबसे बड़ा और कुशल स्रोत है, जहाँ से विधि के छात्र प्रयोगात्मक रूप में शिक्षा प्राप्त करते हैं, और उन सभी गुणों और कौशलों को आत्मसात करते हैं, जो एक वकील की सर्वोच्च आवश्यकता होती है।

मूट कोर्ट में क्या - क्या होता है?


1. इसमें विधि के छात्रों द्वारा किसी काल्पनिक, विशिष्ट वाद या विषय को चुना जाता है, और फिर उसी वाद/ विषय में वाद विवाद होता है।

2. कुछ विधि के छात्रों के द्वारा अधिवक्ता, वादी प्रतिवादी और साक्षी की भूमिका निभाई जाती है, और वे न्यायालय के समक्ष आते है।

3. विधि के छात्रों में से ही एक कोई छात्र न्यायिक अधिकारी की भूमिका निभाता है, और न्यायालय की कार्यावाही को आगे बढ़ाता है।

4. छात्रों को सिविल केस में वाद पत्र तैयार करने, साक्षियों के परीक्षण एवं प्रतिपरीक्षण करने के साथ जिरह / बहस करने का भी मौका / अवसर होता है।

5. आपराधिक मामलो में परिवाद और आरोप पत्र तैयार करने का ज्ञान प्राप्त होता है,

6. न्यायालय में कैसे पेश होना होता है, कैसे केस दायर किया जाता है, और केस की शुरुआत कैसे करनी इसका भी ज्ञान होता है।

7. न्यायालय के समक्ष बोलने में जो संकोच और डर मन में होता है, वह मूट कोर्ट के जरिये समाप्त हो जाता है।


मूट कोर्ट से विधि के छात्रों को क्या सीखने को मिलता है?


1. न्यायालय में प्रस्तुत होना का ढंग।

2. अभिवचन का प्रारूप।

3. वादपत्र की विरचना।

4. लिखित कथन एवं इसका प्रारूप।

5. विचारण से पहले की तैयारी।

6. विचरण की कार्यावाही।

7. अभिवचन प्रस्तुत करने का ढंग।

8. न्यायालय की कार्यावाही और उससे सम्बंधित शिष्टाचार कैसा होना चाहिए।

9. न्यायालय में न्यायाधीश के समक्ष अपनी बात को प्रस्तुत करने का ढंग।

10. न्यायालयों में होने वाली विभिन्न कार्यवाहियों का ज्ञान।

11. जिरह व् बहस करने का ज्ञान और ढंग।

12. पक्षकारो और साथियों से किये जाने वाले व्यवहार का ढंग।

13. न्यायालय की गरिमा को बनाये रखने का ज्ञान।

14. व्यावसायिक शिष्टाचार का ज्ञान।

15. सुसंगत विधियों का ज्ञान।

16. अधिवक्ताओ की आचार संहिता आदि।


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