बेटे का एडमिशन कन्फर्म होने के बाद भी यूनिवर्सिटी ने फाइनल लिस्ट से नाम हटा दिया


सवाल

Mere bete ko TGEPCET ke through Osmania University engineering college me ECE me seat aaya tha humne nirdharit tithi ko college jakar physical reporting kar di thi, Autonomous fee bhi pay Kar diya tha aur certificate aur banki documents bhi submit karke saari formalities bhi poori kar li thi. Baad me University ne excel sheet jaari kiya tha jisme mere bete ka name tha aur online portal per bhi name tha. Lekin 15 Aug ko University ne final list jaari kiya usme mere bete ka name nahi hai. Maine jab TGEPCET me Pata kiya to unhone bataya ki University walo ne final list me mere bete ka name hi nahi bheja isiliye uska seat cancel ho gaya. Jab humne poori formalities as per TGEPCET guidelines ke according kiya tha admission no bhi aa chuka to kya aise me aise arbitrarily admission cancel karna UGC ke guidelines ke hisab se aur legally bhi uchit hai. Kripiya Salah de, kya high court se Rahat milne ki chance hai.

उत्तर (1)


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आपके बेटे ने TGEPCET के नियमों के तहत सारी फॉर्मेलिटी (फीस, डॉक्यूमेंट्स, फिजिकल रिपोर्टिंग) पूरी कर ली थीं। पोर्टल पर नाम आने के बाद फाइनल लिस्ट से नाम गायब होना पूरी तरह से उस्मानिया यूनिवर्सिटी की गलती और लापरवाही है।

क्या यह कानूनी और UGC के हिसाब से सही है?
बिल्कुल नहीं। यह पूरी तरह से गैरकानूनी है। UGC के नियमों और 'नेचुरल जस्टिस' के तहत, एक बार फीस जमा होने और एडमिशन कंफर्म होने के बाद, यूनिवर्सिटी बिना किसी वैध कारण या नोटिस के अपनी मर्जी से एडमिशन कैंसिल नहीं कर सकती। स्टाफ की गलती की सजा छात्र को नहीं दी जा सकती।

क्या हाईकोर्ट से राहत मिलेगी?

ऐसे मामलों में तेलंगाना हाईकोर्ट से राहत मिलने के लगभग 100% चांस हैं। कोर्ट हमेशा छात्रों के भविष्य को प्राथमिकता देता है। कोर्ट यूनिवर्सिटी को आदेश देकर आपके बेटे की ECE सीट तुरंत बहाल करवा सकता है।

अब आपको तुरंत क्या करना चाहिए:

  • लिखित शिकायत: सबसे पहले उस्मानिया यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर (VC), रजिस्ट्रार और TGEPCET को सारे सबूतों के साथ तुरंत ईमेल करें कि यह उनकी गलती है, इसे सुधारें।

  • हाईकोर्ट में रिट: एडमिशन के मामलों में समय बहुत कीमती होता है। अगर यूनिवर्सिटी 24 घंटे में सकारात्मक जवाब नहीं देती है, तो सीधे तेलंगाना हाईकोर्ट में 'रिट याचिका' फाइल करें। कोर्ट से तुरंत 'स्टे' (Interim Order) लें ताकि वह सीट किसी और को अलॉट न कर दी जाए।

यूनिवर्सिटी को लीगल नोटिस भेजने और हाईकोर्ट में रिट याचिका फाइल करके अपना हक लेने के लिए आप हमारी कानूनी मदद ले सकते हैं।


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