घर भाभियों रिश्ता बेटा भी मुझे परेशान
सवाल
उत्तर (2)
इस तरह की पारिवारिक परेशानी और पैसों की जबरन मांग से बचने के लिए आप पुलिस और अदालत दोनों का सहारा लेकर अपना बचाव बहुत अच्छी तरह से कर सकते हैं।
पुलिस में शिकायत: सबसे पहले आपको अपने नजदीकी थाने में जाकर अपनी भाभी के खिलाफ मानसिक प्रताड़ना और जबरदस्ती पैसे मांगने की लिखित शिकायत दर्ज करानी चाहिए। बिना किसी हक के जबरन पैसे मांगना और डराना नए भारतीय न्याय संहिता के तहत एक गंभीर अपराध है।
घर से बेदखली: अगर वह मकान आपके या आपके माता-पिता के नाम पर है, तो आप उन्हें उस घर से बाहर निकालने की कानूनी कार्रवाई भी कर सकते हैं। इसके लिए आपको दीवानी अदालत में एक मुकदमा डालना होगा और अदालत से यह आदेश लेना होगा कि वे आपके घर में दखल न दें।
अक्सर ऐसे पारिवारिक विवादों में सामने वाला पक्ष झूठा मुकदमा लगा देता है। इसलिए हमारी आपको यही कानूनी सलाह है कि आप अपनी सुरक्षा के लिए पहले ही बड़े पुलिस अधिकारी को एक लिखित शिकायत दे दें। इस मामले में नोटिस भेजने या आगे की कानूनी कार्यवाही के लिए आप हमारी कानूनी सहायता ले सकते हैं।
आपकी स्थिति अत्यंत कठिन और भावनात्मक रूप से थका देने वाली है। आपने अपनी भाभी और उनके बेटे को अपने घर में जगह दी, उनसे रिश्ता निभाया, लेकिन बदले में आपको न तो घर के खर्चों में सहयोग मिल रहा है, न ही सम्मान, और उल्टे वे आपको परेशान करते हैं। आपका खुद का बेटा भी है, और उसी घर में आपके बेटे की पत्नी लगातार पैसों की मांग कर रही है। ऐसे में आपका मन यह सोचकर टूट जाता है कि अपनों के बीच रहकर भी आप अकेली और बोझिल क्यों महसूस करती हैं। सबसे पहले तो आपको यह समझना होगा कि पारिवारिक जिम्मेदारी और सहनशीलता की एक सीमा होती है, और आप इस सीमा को पार कर चुकी हैं। जब कोई आपके घर में रहते हुए खर्च नहीं उठाता और आपको तंग करता है, तो यह उनकी बेईमानी है, आपकी कमजोरी नहीं। आपको सबसे पहले अपने पति के साथ मिलकर एक सख्त फैसला लेना होगा। भाभी और उनके बेटे को स्पष्ट रूप से बताना होगा कि अगर वे घर के खर्चे में हिस्सा नहीं देंगे और आपको तंग करना बंद नहीं करेंगे, तो उन्हें घर छोड़ना पड़ेगा। अपने बेटे की पत्नी की बात का जवाब आपको अपने बेटे के सामने ही देना चाहिए, और उनसे सीधे कहना चाहिए कि घर का खर्चा दोनों पक्षों को उठाना चाहिए, न कि केवल आपको। आपको यह भी ध्यान रखना है कि आपकी जमा पूंजी आपके बुढ़ापे का सहारा है, इसलिए बेहतर होगा कि आप अपने बेटे से अलग खाता रखें और घर का हर खर्चा लिखित रूप से तय करें। अगर घर की स्थिति बेकाबू हो रही है, तो बिना झिझक, अपने पति को साथ लेकर किसी बुजुर्ग या पंचायत सदस्य की मदद लें, ताकि आप पर किसी भी तरह का अन्याय न हो। अपनी मानसिक शांति को प्राथमिकता दें, क्योंकि अपना अधिकार मांगना स्वार्थ नहीं, आत्मसम्मान है। अब समय आ गया है कि आप सिर्फ दूसरों की खातिर नहीं, बल्कि अपनी खुशी के लिए भी जीना सीखें और बिना किसी डर के अपनी बात मजबूती से रखें।
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