एसडीएम ने अपना गलत आदेश वापस ले लिया है तो अब सिविल केस का क्या करें


सवाल

SDM ne ek party ko co-owner bna diya tha mere property me galat tarike se. Order challenge krne par SDM ne apna order wapis le liya aur Asli malik ka nam wapis khatauni me dal diya... I mean relief mil gya. Par humane civil court me bhi ek original Suit file kr diya tha, sdm ke order ke khilaf, ye Suit abhi running hai aur isme mere favor me X-party hua hai. Ab jabki SDM court ne hi relief de diya hai to civil suit me hame ab kya krna chahiye ?

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आपकी स्थिति स्पष्ट है: एसडीएम ने अपना गलत आदेश वापस ले लिया है और खतौनी में आपका नाम बहाल कर दिया है, जिससे प्रशासनिक स्तर पर आपको पूर्ण राहत मिल चुकी है। अब प्रश्न यह है कि सिविल कोर्ट में दायर मूल वाद का क्या किया जाए। सिविल कोर्ट में वाद इसलिए दायर किया गया था क्योंकि उस समय एसडीएम का आदेश आपके विरुद्ध था और आपको उसे चुनौती देनी थी। लेकिन अब जबकि एसडीएम ने स्वयं अपना आदेश रद्द करके आपका पक्ष ले लिया है, तो उस वाद का कोई औचित्य नहीं रह गया है, क्योंकि जिस आदेश के विरुद्ध वाद दायर किया गया था, वह अस्तित्व में ही नहीं है। अब विवाद का मूल कारण खत्म हो चुका है और आपका नाम आधिकारिक रिकॉर्ड में बहाल हो चुका है, ऐसी स्थिति में सिविल कोर्ट में वाद को जारी रखना आपके लिए समय, धन और ऊर्जा का अनावश्यक व्यय होगा। कानूनी रूप से जब कोई प्रशासनिक अधिकारी अपने आदेश को वापस ले लेता है, तो उस आदेश के विरुद्ध दायर किया गया वाद निरर्थक हो जाता है। इसलिए, आपको अपने वकील के परामर्श से सिविल कोर्ट में एक आवेदन देना चाहिए जिसमें यह स्पष्ट किया जाए कि एसडीएम के आदेश को वापस लिए जाने के कारण वाद का उद्देश्य समाप्त हो गया है। अदालत आपके इस आवेदन को स्वीकार करते हुए वाद को समाप्त कर सकती है या आपको इसे वापस लेने की अनुमति दे सकती है। हालांकि, एक बात का ध्यान रखें: सिविल कोर्ट में पक्षकार बन चुके अन्य पक्ष को अदालत की कार्यवाही की जानकारी होनी चाहिए, ताकि वह आपके खिलाफ कोई क्षतिपूर्ति का दावा न कर सके। अपने वकील से यह सुनिश्चित कर लें कि वाद वापसी का फॉर्म सही ढंग से भरा जाए और अदालत निर्णय देने से पहले आपकी कानूनी राहत पूर्ण रूप से मिल चुकी है। इस तरह आप इस उलझन से आसानी से बाहर निकल सकते हैं और अपनी संपत्ति का मालिकाना हक शांतिपूर्वक भोग सकते हैं।


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