रेगुलर बीटेक के साथ दूसरी स्टेट में जॉब की क्या यह डिग्री सरकारी नौकरी के लिए वैध है
सवाल
उत्तर (2)
आपके मित्र की स्थिति कोरोना महामारी की असाधारण परिस्थितियों से उत्पन्न हुई है, जिसका न्यायिक एवं शैक्षणिक दृष्टिकोण से गंभीरता से मूल्यांकन करना आवश्यक है। कानूनी रूप से, किसी भी डिग्री की वैधता का आधार उसके पाठ्यक्रम का पूर्णता से पूरा होना तथा परीक्षाओं का निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आयोजित होना है। आपके मित्र ने अपनी नियमित बी.टेक. की पढ़ाई मध्य प्रदेश के किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से की है। महामारी के दौरान सरकारी दिशा-निर्देशों के कारण अधिकांश विश्वविद्यालयों ने ऑनलाइन कक्षाएं संचालित कीं। यह उस समय की अनिवार्यता थी, न कि किसी छात्र का अपना निर्णय। इसलिए, ऑनलाइन कक्षाओं के दौरान अनुपस्थिति को कोई दोष नहीं माना जा सकता, विशेषकर तब जब आपका मित्र उसी अवधि में झारखंड में अनुबंध आधारित नौकरी कर रहा था। यह महामारी के दौरान जीविका के लिए उठाया गया एक आवश्यक कदम था, जो उसकी शैक्षिक प्रतिबद्धता को कम नहीं आंकता।
डिग्री की वैधता के लिए सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उसके सातवें और आठवें सेमेस्टर में, जब कक्षाएं फिर से ऑफलाइन हो गईं, तब उन्होंने प्रायोगिक कार्यों को किया तथा परीक्षा केंद्र पर भौतिक रूप से उपस्थित होकर अपनी परीक्षाएं दीं। उनके संस्थान ने उन्हें कक्षाओं में भौतिक उपस्थिति की बाध्यता से छूट देकर परीक्षा में बैठने की अनुमति दी, इसका अर्थ यह है कि विश्वविद्यालय ने स्वयं उनकी स्थिति को स्वीकार कर लिया। जब कोई मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय किसी छात्र को परीक्षा में सम्मिलित होने की अनुमति देता है, उसकी मार्कशीट जारी करता है, तथा उसे डिग्री प्रदान करता है, तो वह डिग्री कानूनी दृष्टि से पूर्णतः वैध और मान्य हो जाती है। विश्वविद्यालय का प्रमाणपत्र ही अंतिम और प्रभावी साक्ष्य होता है।
अब प्रश्न यह है कि वह सरकारी नौकरी कर सकता है या नहीं। सरकारी सेवाओं के लिए डिग्री की वैधता का निर्णय संबंधित विश्वविद्यालय या उच्च शिक्षा विभाग द्वारा दी गई मान्यता के आधार पर होता है। यदि उसके विश्वविद्यालय को सरकारी नौकरियों के लिए मान्यता प्राप्त है, और उन्होंने उसकी डिग्री प्रदान कर दी है, तो कोई भी सरकारी भर्ती आयोग उस डिग्री को अवैध घोषित नहीं कर सकता। केवल कक्षाओं में न बैठने के कारण उनकी डिग्री को रद्द नहीं किया जा सकता, क्योंकि विश्वविद्यालय ने स्वयं उस पर मुहर लगाई है। हां, नौकरी के लिए दस्तावेजों के सत्यापन के समय यदि किसी प्रकार का प्रश्न उठता है, तो उन्हें विश्वविद्यालय से प्राप्त ऑनलाइन कक्षाओं के आदेश, तथा नौकरी करने का कारण बताते हुए अपना पक्ष रखना होगा। सरकारी नौकरियां नियमों पर चलती हैं, परंतु महामारी जैसी वैश्विक आपदा के दौरान किसी छात्र पर कठोर नियम लागू नहीं किए जा सकते। यदि किसी चयन के बाद सत्यापन के दौरान कोई आपत्ति आती है, तो वे उच्च स्तर पर अपील कर सकते हैं। अतः उन्हें किसी भी सरकारी परीक्षा में शामिल होने से पीछे नहीं हटना चाहिए, क्योंकि उनकी सभी परीक्षाएं विश्वविद्यालय की मान्यता के अनुसार पूर्ण रूप से संपन्न हुई हैं।
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