पैक्स अध्यक्ष ने धान खरीद में धोखा दिया और 20 लाख की देनदारी मुझ पर आ गई है मैं क्या करूं


सवाल

मैं वर्तमान में वरीय सहकारिता प्रसार पदाधिकारी के पद पर बरबीघा प्रखंड में पदस्थापित हूं, धान अधिप्राप्ति वर्ष 2025-26 में सर्वा पैक्स में 15 feb 2026 से जिला सहकारिता पदाधिकारी के आदेश से प्रशासक नियुक्त किया गया धान अधिप्राप्ति का कार्य 15 नवंबर 2025 से 31 मार्च 2026 तक चला 14 फरवरी 2026 तक संपूर्ण धान खरीद तत्कालीन पैक्स अध्यक्ष द्वारा किया गया। उसके बाद 15 फरवरी 2026 से 31 मार्च 2026 तक मेरे और प्रबंधक के हस्ताक्षर से धान खरीद 743 क्विंटल हुआ जिसे तत्कालीन अध्यक्ष विजय कुमार सिंह के द्वारा ही मौखिक वादा के साथ खरीद किया गया कि मैं उसका शत प्रतिशत चावल sfc को जमा के दूंगा मुझे बिस्वास दिलाया गया उनके द्वारा किंतु 29 अप्रैल 2026 को चुनाव परिणाम आने पर वो अध्यक्ष हार गया और अब वो चावल गिराने से मुकर रहा है और मुझे ही लोगों के सामने दोषी साबित कर रहा है मुझे लगातार बिस्वास देता रहा कि sir चावल जमा कर देगें किंतु अब वो पूरी तरह मुकर गया है मामला 20 लाख का आ गया है मैं क्या करूँ

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आपने अपनी समस्या का विवरण बहुत स्पष्ट रूप से दिया है, जो संगठनात्मक कार्यप्रणाली और वित्तीय अनियमितता से जुड़ा है। आपकी स्थिति अत्यंत संवेदनशील है क्योंकि इसमें विश्वासघात, पद का दुरुपयोग और बीस लाख रुपये की बड़ी राशि शामिल है। सबसे पहले, यह समझना आवश्यक है कि आपने अपने कर्तव्यों का पालन पूर्ण ईमानदारी से किया, जिसमें अध्यक्ष के आश्वासन के आधार पर धान खरीद और गोदाम में जमा करना शामिल था। परंतु, जब अध्यक्ष चुनाव में पराजित हो गए, तो उन्होंने अपनी वाचा को भंग कर दिया और अब आपको ही दोषी ठहराने का प्रयास कर रहे हैं। यह स्पष्ट रूप से एक संगठित षड्यंत्र है।

इस गंभीर मामले में आपको तत्काल और सतर्क रहने की आवश्यकता है। आप का पहला कदम यह होना चाहिए कि आप अपने सभी अधिकारिक अभिलेखों को सुरक्षित रखें। जब से आपने धान खरीद का काम शुरू किया, उसकी पूरी लिखित प्रक्रिया, दैनिक प्रतिवेदन, प्रबंधक के साथ किए गए हस्ताक्षर, और सभी दस्तावेजों की प्रतियां अपने पास रख लें। किसी भी प्रकार की मौखिक बातचीत के स्थान पर अब लिखित संवाद को प्राथमिकता दें, क्योंकि यही आपकी सबसे बड़ी रक्षा कवच होगी।

अब, आपको अपने अधिकारी मंडल को पूरी वास्तविकता से अवगत कराना चाहिए। चूंकि आपको जिला सहकारिता पदाधिकारी के आदेश से तैनात किया गया था, इसलिए उन्हीं के कार्यालय में एक स्पष्ट लिखित शिकायत दर्ज कराएं। इस शिकायत में स्पष्ट रूप से उल्लेख करें कि चौदह फरवरी से पहले की खरीद प्रक्रिया पूर्व अध्यक्ष के नेतृत्व में हुई थी, और पंद्रह फरवरी के बाद जो खरीद हुई, वह अध्यक्ष के मौखिक वचन पर भरोसा करके की गई थी। उनके द्वारा दिए गए वचन के बारे में कोई भी लिखित प्रमाण हो तो उसे संलग्न करें। साथ ही, अपने प्रबंधक के साथ मिलकर एक संयुक्त बयान तैयार करें, जिसमें रिकॉर्ड में दर्ज खरीद की वास्तविकता को बयां किया गया हो।

कानूनी दृष्टिकोण से, आपको इस मामले को संघ या सहकारी समिति की ऊपरी स्तर की बैठक में उठाना चाहिए। कोशिश करें कि कोई अप्रत्याशित कदम न उठाएं, बल्कि सभी तथ्यों को संगठित करके वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष रखें। चूंकि मामला बीस लाख का है, इसलिए लेखा परीक्षा विभाग को इस मामले का विस्तृत ऑडिट करने के लिए आदेशित किया जाना चाहिए। ऑडिट से यह स्पष्ट हो जाएगा कि धान की आवाजाही और जमा करने की प्रक्रिया किसकी देखरेख में हुई थी। किसी भी सूरत में, आप अपनी निर्दोषता साबित करने के लिए, उसी समयावधि के बैंकिंग लेनदेन और आधिकारिक रसीदों को भी साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत कर सकते हैं। पूर्व अध्यक्ष द्वारा आपको बार-बार भरोसा दिलाया गया था, जिसका आपके मन में प्रमाण है, इसलिए आपको घबराना नहीं चाहिए। सुनिश्चित करें कि आपके सभी कार्य पारदर्शी हैं और जरूरत पड़ने पर वरिष्ठ अधिकारियों की स्वीकृति प्राप्त करते रहें। मानसिक रूप से शांत रहें और अपने काम के प्रति दृढ़ता बनाए रखें, क्योंकि आधिकारिक रिकॉर्ड ही अंतिम सत्य का प्रमाण होगा, वह आपको किसी भी आरोप से मुक्त करेगा।


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