प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में काम के घंटे और कर्मचारियों को निकालने के नियम क्या हैं


सवाल

एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में कर्मचारियों के लिए काम के कितने घंटे तय हैं और इससे जुड़े श्रम नियम क्या कहते हैं? यदि कोई कंपनी बिना किसी ओवरटाइम के हर दिन 10 घंटे काम करवा रही है, तो कर्मचारी के पास क्या अधिकार हैं? इसके अलावा, क्या कोई कंपनी किसी भी कर्मचारी को बिना नोटिस दिए केवल मौखिक रूप से नौकरी से निकाल सकती है? यदि नियुक्ति पत्र में 2 महीने के नोटिस की अवधि लिखी हो, फिर भी कंपनी परिवीक्षा अवधि के दौरान बिना नोटिस दिए कर्मचारी को निकाल दे, तो इस पर श्रम कानून क्या कहता है?

उत्तर (2)


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भारत के श्रम कानूनों और कारखाना अधिनियम के अनुसार, एक कर्मचारी से एक दिन में अधिकतम 9 घंटे और एक सप्ताह में कुल 48 घंटे से अधिक काम नहीं लिया जा सकता है। यदि आपकी कंपनी आपसे 10 घंटे काम करवा रही है, तो वह अतिरिक्त समय के लिए आपको ओवरटाइम मजदूरी (Overtime Wages) देने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है। यदि कंपनी बिना अतिरिक्त भुगतान के ज्यादा काम करवाती है, तो आप श्रम आयुक्त (Labour Commissioner) या स्थानीय श्रम प्रवर्तन अधिकारी (LEO) के पास शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

जहाँ तक नौकरी से निकालने का सवाल है, कोई भी कंपनी मौखिक रूप से कर्मचारी को बर्खास्त नहीं कर सकती है। इसके लिए एक लिखित संचार या बर्खास्तगी पत्र (Termination Letter) अनिवार्य है। यदि आपके नियुक्ति पत्र में स्पष्ट रूप से २ महीने के नोटिस की अवधि (Notice Period) का उल्लेख है, तो कंपनी उस अनुबंध से बंधी हुई है। भले ही आप परिवीक्षा अवधि (Probation Period) में हों, यदि नियुक्ति पत्र में नोटिस की शर्त लिखी है, तो कंपनी को उसका पालन करना होगा या उसके बदले में २ महीने का वेतन देना होगा।

हालांकि, कानूनी रूप से परिवीक्षाधीन (Probationer) कर्मचारियों के अधिकार थोड़े सीमित होते हैं। यदि नियुक्ति पत्र में लिखा है कि परिवीक्षा अवधि के दौरान बिना नोटिस दिए निकाला जा सकता है, तो कंपनी के पास वह शक्ति होती है। लेकिन आपके मामले में चूंकि लिखित अनुबंध में २ महीने के नोटिस की बात कही गई है, इसलिए कंपनी अपनी ही शर्तों का उल्लंघन नहीं कर सकती। अनुबंध की शर्तों के विरुद्ध की गई कोई भी कार्रवाई अवैध मानी जाती है।

यदि आपको बिना किसी लिखित कारण और बिना नोटिस अवधि के वेतन दिए निकाला गया है, तो आप कानूनी नोटिस भेजकर अपने वेतन या नोटिस अवधि के पैसे की मांग कर सकते हैं। श्रम न्यायालय (Labour Court) ऐसे मामलों में कर्मचारी के हितों की रक्षा करता है, विशेषकर तब जब नियुक्ति पत्र की शर्तों का उल्लंघन कंपनी द्वारा किया गया हो।

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एक निजी कंपनी एक दिन में 8 घंटे में अपने कर्मचारियों की सेवा ले सकती है। और यह श्रम नियम है कि कर्मचारी को ओवरटाइम मजदूरी लेने का अधिकार है और अगर कंपनी ओवरटाइम के पैसे का भुगतान करने के लिए सहमत नहीं है, तो कर्मचारी श्रम आयुक्त और एलईओ के समक्ष शिकायत दर्ज कर सकता है और कंपनी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई कर सकता है। कंपनी अस्थायी कर्मचारी या परिवीक्षाधीन को बिना किसी नोटिस के समाप्त कर सकती है। प्रोबेशनर को कोई अधिकार नहीं है। नियमों और विनियमों के विरुद्ध जारी कोई भी नियुक्ति लागू करने योग्य नहीं है और उसे निष्पादित नहीं किया गया है


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