यदि दो वसीयतें हैं तो कौन सी वैध होगी
सवाल
उत्तर (5)
भारतीय कानून के अनुसार, अगर एक ही व्यक्ति ने एक ही संपत्ति के लिए दो वसीयत बनाई हैं, तो हमेशा आखिरी वसीयत (Last Will) ही मान्य होती है। इसका सीधा मतलब यह है कि वसीयतकर्ता ने अपनी मृत्यु से ठीक पहले जो सबसे नई वसीयत बनाई थी, वही प्रभावी मानी जाएगी और पुरानी वसीयत अपने आप रद्द समझी जाएगी।
हालांकि, आखिरी वसीयत को वैध मानने के लिए उसका सही तरह से बना होना जरूरी है। वसीयत पर वसीयतकर्ता के साफ हस्ताक्षर होने चाहिए और कम से कम दो गवाहों (Witnesses) के भी साइन होने चाहिए। यदि दूसरी वसीयत रजिस्टर्ड है और पहली वाली नहीं, तो रजिस्टर्ड वसीयत को अदालत में साबित करना ज्यादा आसान होता है, लेकिन कानूनन बिना रजिस्टर्ड वसीयत भी आखिरी होने पर मान्य हो सकती है।
वसीयत के आधार पर संपत्ति अपने नाम करवाने के लिए आपको अदालत से प्रोबेट (Probate) लेना पड़ सकता है। प्रोबेट अदालत द्वारा दिया गया एक प्रमाण पत्र होता है जो वसीयत की शुद्धता की पुष्टि करता है। मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे शहरों में अचल संपत्ति के लिए प्रोबेट लेना अनिवार्य होता है। अन्य जगहों पर भी यदि वसीयत को लेकर विवाद हो, तो प्रोबेट लेना सबसे सुरक्षित तरीका है।
यदि आपको लगता है कि आखिरी वसीयत धोखाधड़ी से या दबाव में बनाई गई है, तो आप उसे अदालत में चुनौती (Challenge) दे सकते हैं। ऐसी स्थिति में आपको अदालत में यह साबित करना होगा कि वसीयतकर्ता उस समय मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं था या उस पर किसी तरह का अनुचित प्रभाव (Undue Influence) डाला गया था।
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