हिन्दू मुस्लिम कोर्ट मैरिज रूल्स क्या है
सवाल

उत्तर (2)
अगर एक मुस्लिम लड़का और हिन्दू लड़की शादी करना चाहते हैं, तो भारत में इसके लिए कानूनी विकल्प मौजूद है। सबसे जरूरी बात यह है कि लड़के की उम्र 21 साल और लड़की की उम्र 18 साल से कम न हो, क्योंकि यह कोर्ट मैरिज की बुनियादी शर्त है। आमतौर पर ऐसे अंतरधार्मिक विवाह के लिए विशेष विवाह अधिनियम, 1954 (Special Marriage Act) लागू होता है, जो दोनों को अपने-अपने धर्म में रहते हुए शादी की इजाजत देता है। कोर्ट मैरिज करने के लिए आपको अपने नजदीकी सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में जाना होगा, एक फॉर्म भरना होगा, और शादी का इरादा जताने के लिए 30 दिन पहले नोटिस देना होगा। यह नोटिस इसलिए जरूरी है ताकि कोई आपत्ति परिवार से हो तो वह पता लग सके। अगर 30 दिन में कोई दिक्कत न आए, तो आपकी शादी रजिस्टर हो जाएगी।
अब धर्म परिवर्तन की बात करें, तो विशेष विवाह अधिनियम में धर्म परिवर्तन जरूरी नहीं है, दोनों अपने धर्म में रह सकते हैं। लेकिन अगर लड़की अपनी मर्जी से इस्लाम अपनाती है, तो इस्लामी शरीयत के तहत निकाह हो सकता है, या लड़का हिन्दू धर्म अपनाए तो हिन्दू रीति से शादी संभव है। यह पूरी तरह आपसी सहमति पर निर्भर करता है। ऐसे मामलों में कानूनी प्रक्रिया (legal process) को सही ढंग से समझना और दस्तावेज तैयार करना जरूरी है, और इसके लिए एक वकील की सलाह बहुत मददगार साबित होती है
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