क्या मुस्लिम व्यक्ति पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी कर सकता है
सवाल
उत्तर (1)
जी हां, भारत में मुस्लिम पुरुष अपनी पहली पत्नी को तलाक दिए बिना दूसरी शादी कर सकता है। भारत में 'मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरियत) आवेदन अधिनियम, 1937' (Muslim Personal Law (Shariat) Application Act, 1937) लागू है, जो एक मुस्लिम पुरुष को एक समय में चार पत्नियां रखने की अनुमति देता है।
इसलिए, अगर आप दूसरी शादी करते हैं, तो 'भारतीय न्याय संहिता' (Bharatiya Nyaya Sanhita - BNS) की धारा 82 (जो पहले आईपीसी 494 थी) के तहत आप पर 'द्विविवाह' (Bigamy) का मुकदमा नहीं चलेगा, क्योंकि मुस्लिम कानून में इसे अपराध नहीं माना जाता है। इसके लिए आपको कानूनी तौर पर अपनी पहली पत्नी की सहमति लेने की भी बाध्यता नहीं है, हालांकि नैतिक रूप से यह सही माना जाता है।
लेकिन यहां एक बहुत बड़ी सावधानी बरतने की जरूरत है। अगर आप किसी सरकारी नौकरी (Government Job) में हैं, तो आप दूसरी शादी नहीं कर सकते। 'केंद्रीय सिविल सेवा नियम' (CCS Conduct Rules) के अनुसार, कोई भी सरकारी कर्मचारी (चाहे वह मुस्लिम ही क्यों न हो) सरकार की विशेष अनुमति के बिना दूसरी शादी नहीं कर सकता। अगर आप ऐसा करते हैं, तो आपकी नौकरी जा सकती है।
इसके अलावा, भले ही आप पर आपराधिक केस न हो, लेकिन आपकी पहली पत्नी इसे 'मानसिक क्रूरता' (Mental Cruelty) का आधार बनाकर कोर्ट से तलाक और भारी 'भरण-पोषण' (Maintenance) की मांग कर सकती है। साथ ही, वह 'घरेलू हिंसा अधिनियम' (Domestic Violence Act) के तहत अपने रहने के लिए अलग घर और मुआवजे की मांग भी कर सकती है।
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