गिफ्ट डीड के लिए स्टाम्प ड्यूटी की गणना कैसे करें | भारतीय कानून

गिफ्ट डीड के लिए स्टाम्प ड्यूटी की गणना कैसे करें

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June 07, 2019
एडवोकेट चिकिशा मोहंती द्वारा



जब कोई संपत्ति किसी व्यक्ति को गिफ्ट में दी जाती है, तो कई कानूनी नियम और प्रक्रियाओं का पालन करना आवश्यक होता है। किसी को संपत्ति खरीदने से सम्बंधित कानूनी तथ्यों को ध्यान में रखना चाहिए। यदि आप इसमें शामिल विशिष्ट प्रक्रियाओं को पूरा नहीं करते हैं, तो आपका गिफ्ट अमान्य हो सकता है। ऐसा ही एक कानूनी तथ्य है, स्टाम्प ड्यूटी का भुगतान, जो कि गिफ्ट की गई संपत्ति के स्वामित्व का दावा करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
 

स्टाम्प ड्यूटी क्या है?

आमतौर पर यह, संपत्ति के किसी भी लेनदेन के दौरान सरकार द्वारा लगाए गए कर को दर्शाता है। संपत्ति के लेन-देन के लिए कानूनी दस्तावेजों पर एक भौतिक स्टाम्प संलग्न होता है, जो यह दर्शाता है, कि कर का भुगतान किया जा चुका है। जब कोई संपत्ति आपको गिफ्ट में दी जाती है, तो केवल शारीरिक कब्ज़ा पर्याप्त नहीं होता है, अपितु आपके पास संपत्ति के स्वामित्व का कानूनी सबूत भी होना चाहिए, जो पंजीकरण शुल्क और स्टाम्प ड्यूटी का भुगतान करने के बाद प्राप्त किया जा सकता है।
राज्य सरकार द्वारा स्टाम्प ड्यूटी लगाई और एकत्र की जाती है। यह एक प्रत्यक्ष कर है, जो 'भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899' की धारा 3 के तहत वित्तीय लेनदेन के सभी दस्तावेजों, प्रॉमिसरी नोटों के साथ-साथ संपत्ति के लेन-देन के सभी दस्तावेजों पर देय है। स्टाम्प ड्यूटी सभी राज्यों में अलग-अलग होते हैं।
 

स्टाम्प ड्यूटी देना क्यों आवश्यक है?

राज्य सरकार संपत्ति के पंजीकरण के दौरान स्टाम्प ड्यूटी एकत्र करती है। यह हस्तांतरण के समझौते को मान्य करती है। अदालत में संपत्ति के स्वामित्व को साबित करने के लिए गिफ्ट डीड पर लगा एक स्टाम्प कानूनी दस्तावेज के रूप में मान्य होता है। स्टाम्प ड्यूटी का भुगतान किए बिना, आप कानूनी रूप से एक गिफ्ट की गई संपत्ति पर स्वामित्व का दावा नहीं कर सकते हैं। इस प्रकार, स्वामित्व का दावा करने के लिए पूर्ण स्टाम्प ड्यूटी का भुगतान करना बहुत महत्वपूर्ण है।
 

भारत में स्टाम्प ड्यूटी को प्रभावित करने वाले कारक क्या हैं?

जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है, स्टाम्प ड्यूटी अलग-अलग राज्यों में भिन्न होती है। हालांकि, कुछ कारक हैं, जो स्टाम्प ड्यूटी की राशि निर्धारित करते हैं।-

स्थान- अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग स्टाम्प ड्यूटी की दरें होती हैं। उदाहरण के लिए, यदि आपकी संपत्ति नगरपालिका क्षेत्र में स्थित है, तो आपको एक ग्रामीण क्षेत्र में स्थित संपत्ति की तुलना में अधिक दर का भुगतान करना होगा।

भवन की आयु- चूंकि स्टाम्प ड्यूटी की दरों की गणना संपत्ति के कुल बाजार मूल्य के प्रतिशत के रूप में की जाती है, इसलिए, भवन की आयु एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पुरानी इमारतें आमतौर पर स्टाम्प ड्यूटी को कम करती हैं, और नई इमारतें उच्च स्टाम्प ड्यूटी को आकर्षित करती हैं। इसका कारण यह है कि पुरानी इमारतों के बाजार मूल्य कम होते जाते हैं।

स्वामी की आयु- लगभग सभी राज्य सरकारों ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए स्टाम्प ड्यूटी में छूट दी है। तो, मालिक की उम्र स्टाम्प ड्यूटी निर्धारित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

मालिक का लिंग- वरिष्ठ नागरिकों की तरह, महिलाओं को भी स्टाम्प ड्यूटी पर रियायत मिलती है, अगर संपत्ति उस महिला के नाम पर है।

उद्देश्य- वाणिज्यिक भवन आवासीय भवनों की तुलना में उच्च स्टाम्प ड्यूटी को आकर्षित करते हैं। यह मुख्य रूप से इसलिए है, क्योंकि व्यावसायिक भवनों को अधिक सुविधाओं, फर्श की जगह, और सुरक्षा सुविधाओं की आवश्यकता होती है।
 

भारत में स्टाम्प ड्यूटी का भुगतान कैसे करें?

स्टाम्प ड्यूटी भुगतान के तीन तरीके हैं, जिनके माध्यम से कोई व्यक्ति संबंधित राज्य सरकार को स्टाम्प ड्यूटी का भुगतान कर सकता है-

स्टाम्प पेपर- गैर-न्यायिक स्टाम्प पेपर पर लेनदेन का निष्पादन, पंजीकृत प्राधिकारी को सीधे भुगतान करके संपत्ति प्राप्त करने का एक पारंपरिक तरीका है। इसमें दोनों पक्षों को कागज पर समझौते की शर्तों को लिखना होता है, और इसे हस्ताक्षरित कराना होगा। स्टाम्प विक्रेता, स्टाम्प क्रेता और लेनदेन के बारे में हर विवरण रिकॉर्ड करता है, स्टाम्प पेपर के पीछे सभी विवरण का उल्लेख किया जाता है।

इलेक्ट्रॉनिक स्टाम्पिंग - जाली स्टैंप पेपर से बचने और स्टाम्पिंग को आसान बनाने के लिए, सरकार ने ई-स्टाम्पिंग की शुरुआत की। ई-स्टाम्पिंग का अर्थ मूल रूप से ऑनलाइन किए गए स्टाम्पिंग से है। यह स्टाम्प ड्यूटी के भुगतान करने का एक अधिक सुविधाजनक तरीका है। ई-स्टाम्पिंग करने के लिए, आपको एस. एच. सी. आई. एल. (स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड) की वेबसाइट पर जाना होगा।

फ्रैन्किंग- फ्रैन्किंग एक अन्य प्रक्रिया है, जहां स्टाम्प ड्यूटी का भुगतान अधिकृत बैंकों को किया जाता है। जिनके पास एक फ्रैन्किंग केंद्र होता है। यहां, आपको पहले दस्तावेजों को तैयार करना होता है, और फिर इसे अधिकृत केंद्र / बैंक में ले जाना होगा, जो स्टाम्प ड्यूटी के भुगतान को स्वीकार करता है। और इसे कानूनी रूप से मौजूदा बनाने के लिए कागज पर शारीरिक रूप से मुहर लगाई जाती है।

प्रमुख शहरों में स्टाम्प ड्यूटी की दरें
स्टाम्प ड्यूटी की दरें राज्य से अलग-अलग होती हैं। यहां कुछ प्रमुख शहरों के लिए स्टाम्प ड्यूटी की दरें दी गयी हैं-

दिल्ली- दिल्ली में स्टाम्प ड्यूटी की दरें पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग हैं। महिलाओं के लिए, संपत्ति के बाजार मूल्य के 4% की दर से स्टाम्प ड्यूटी ली जाती है, और पुरुषों के लिए, दर 6% है। संयुक्त-मालिकों (पुरुषों और महिलाओं) के लिए, दर 5% है।

कोलकाता- जब कोई संपत्ति रक्त रिश्तेदार को गिफ्ट में दी जाती है, तो संपत्ति के बाजार मूल्य के 0.5% की दर से स्टाम्प ड्यूटी देय होती है। जब इसे किसी अन्य व्यक्ति को गिफ्ट में दी जाती है, तो पंचायत क्षेत्रों में स्टाम्प ड्यूटी दर 5% और नगरपालिका क्षेत्रों, निगम क्षेत्रों और शहरी क्षेत्रों में 6% होती है। यदि संपत्ति का बाजार मूल्य 40 लाख रुपये से अधिक है, तो शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में अतिरिक्त 1% स्टाम्प ड्यूटी ली जाती है।

बंगलौर- जब संपत्ति किसी ऐसे व्यक्ति को गिफ्ट में दी जाती है, जो परिवार का सदस्य नहीं है, तो स्टाम्प ड्यूटी, संपत्ति के बाजार मूल्य के 5% की दर से होती है। यदि संपत्ति एक परिवार के सदस्य को गिफ्ट में दी जाती है, तो स्टाम्प ड्यूटी निर्धारित है-

  1. यदि संपत्ति बंगलौर मेट्रोपॉलिटन रीजनल डेवलपमेंट (बी. एम. आर. डी.) अथॉरिटी या ब्रहत बंगलौर महानगर पालिका (बी. बी. एम. पी.) या सिटी कॉर्पोरेशन की सीमा के भीतर स्थित है, तो यह शुल्क 5000 रुपये है।

  2. यदि संपत्ति शहर, टाउन, म्युनिसिपल काउंसिल या टाउन पंचायत क्षेत्र की सीमा के भीतर स्थित है, तो स्टाम्प ड्यूटी 3,000 रुपये है।

  3. यदि संपत्ति अंकों (I) और (II) में निर्दिष्ट सीमाओं के अलावा अन्य सीमाओं के भीतर स्थित है, तो शुल्क 1000 रुपये है।
     

मुंबई- मुंबई में, जिस प्रकार की संपत्ति गिफ्ट की जा रही है, उसके अनुसार स्टाम्प ड्यूटी अलग-अलग है: -

  1. कृषि और आवासीय भूमि के मामले में स्टाम्प शुल्क 100 रुपये है।

  2. किसी भी अचल संपत्ति के मामले में, जो परिवार के किसी सदस्य को दी जाती है, स्टाम्प ड्यूटी, संपत्ति के बाजार मूल्य का 3% है। यदि परिवार के सदस्य के अलावा कोई अन्य व्यक्ति संपत्ति दे रहा है, तो उस स्थिति में, स्टाम्प ड्यूटी 5% होगी।
     

हैदराबाद- हैदराबाद के स्टाम्प ड्यूटी की दरें दाता (संपत्ति को गिफ्ट देने वाला व्यक्ति) और ग्राही (संपत्ति को लेने वाला व्यक्ति) के संबंध के अनुसार भिन्न होती है।

  1. यदि आप संपत्ति को परिवार के सदस्य को गिफ्ट देते हैं, तो स्टाम्प ड्यूटी संपत्ति के बाजार मूल्य का 1% है।

  2. किसी भी अन्य गिफ्ट के मामले में, स्टाम्प ड्यूटी बाजार मूल्य के 4% है।

 
चंडीगढ़- चंडीगढ़ के केंद्र शासित प्रदेश में, संपत्ति के बाजार मूल्य के 6% की दर से स्टाम्प ड्यूटी देय होती है। यदि संपत्ति दाता के जीवनकाल के भीतर किसी भी रक्त रिश्तेदार को हस्तांतरित हो जाती है, तो कोई आवेदन शुल्क नहीं लिया जाएगा।

जयपुर- जयपुर में, उत्पाद के कुल बाजार मूल्य के 5% की दर से परिवार और गैर-परिवार के लिए स्टाम्प ड्यूटी का शुल्क समान रहता है।

चेन्नई- चेन्नई में, परिवार और रक्त संबंधियों के लिए गिफ्ट डीड के लिए स्टाम्प ड्यूटी संपत्ति के बाजार मूल्य की 1% है, जबकि, किसी अन्य व्यक्ति को संपत्ति गिफ्ट किए जाने पर यह दर 5% है।




 

ये गाइड कानूनी सलाह नहीं हैं, न ही एक वकील के लिए एक विकल्प
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