चेक बाउंस होने पर बैंक का पेनल्टी कितना है

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June 24, 2019
एडवोकेट चिकिशा मोहंती द्वारा



यदि चेक बाउंस होने पर उसे प्राप्त करने वाला व्यक्ति न्यायालय में मुकदमा करना चाहता है, तो इससे चेक जारी करने वाले व्यक्ति को भारी क्षति हो सकती है। केवल यही नहीं, अगर चेक बाउंस हो जाता है, तो बैंक भी उसे जारी करने वाले व्यक्ति से कुछ शुल्क वसूलती है। यह लेख भारत में बैंकों द्वारा चेक के बाउंस होने पर लगाए गए शुल्कों से संबंधित है।

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भारत में विभिन्न बैंकों द्वारा लगाए गए पेनल्टी

जैसा कि पहले कहा गया है, जब कोई चेक बाउंस होता है, तो बैंक खाताधारकों से कुछ शुल्क लेती है। यह पेनल्टी आम तौर पर एक एन. एस. एफ. शुल्क होता है, अर्थात जब खाते में पर्याप्त राशि नहीं होती है, तो बैंक द्वारा चेक बाउंस कर दिया जाता है। सभी प्रकार के बैंक चेक बाउंस होने पर समान राशि नहीं लेते हैं, एक बैंक का शुल्क दूसरी बैंक से भिन्न हो सकता है। शुल्क की राशि चेक बाउंस होने के कारणों और प्रकृति पर निर्भर करती है। यह शुल्क जी. एस. टी. को भी आकर्षित करता है। नीचे कुछ विभिन्न बैंकों द्वारा लगाए गए चेक बाउंस होने पर लिए जाने वाले शुल्क दिए गए हैं, जो कि भारत की विभिन्न बैंकों द्वारा अपनी संबंधित वेबसाइटों और प्लेटफार्मों से लिए गए हैं।
 

आई. सी. आई. सी. आई. बैंक के द्वारा लगाया गया चेक बाउंस पेनल्टी

"चेक बाउंस" होने पर आई. सी. आई. सी. आई. बैंक की नीति इस प्रकार है

  1. ग्राहक द्वारा जमा किया गया स्थानीय चेक

  • वित्तीय कारणों से 100 रुपये प्रति बाउंस चेक के हिसाब से।
     

  1. ग्राहक द्वारा जारी किया गया चेक

  • प्रति माह एक चेक बाउंस के लिए 350 रुपये, इसके बाद, वित्तीय कारणों से उसी महीने में प्रति चेक बाउंस 750 रुपये, हस्ताक्षर सत्यापन को छोड़कर गैर-वित्तीय कारणों के लिए शुल्क 50 रुपये है।

  • वित्तीय कारणों से ट्रांसफर चेक बाउंस होने पर 350 रुपये प्रति चेक लिया जाता है।
     

  1. ग्राहक द्वारा जमा किया गया बाहरी चेक

  • अन्य बैंक के हिसाब से प्रति चेक 150 रुपये अधिक।
     

एस. बी. आई. बैंक के द्वारा लगाया गया चेक बाउंस पेनल्टी

एस. बी. आई. बैंक में चेक बाउंस का पेनल्टी इस प्रकार है

  1. बैंक द्वारा बाउंस किये गए स्थानीय / बाहरी चेक या बिल जिनका भुगतान नहीं हो पाया

  • 1 लाख रुपये तक के चेक / बिल के लिए - 150 रुपये + जी. एस. टी.

  • 1 लाख रुपये से ऊपर के चेक / बिल के लिए - 250 रुपये + जी. एस. टी.
     

  1. एस. बी. आई. से लिए गए चेक के लिए पेनल्टी (केवल अपर्याप्त निधि के लिए)

  • सभी ग्राहकों के लिए - 500 रुपये + जी. एस. टी., राशि चाहे जो भी हो।

  • सभी ग्राहकों के लिए एस. बी. आई. (तकनीकी कारणों से) द्वारा चेक बाउंस के लिए लिया गया शुल्क (आर. बी. आई. के दिशानिर्देशों के अनुसार ग्राहक से गलती नहीं होने पर शुल्क नहीं लिया जाएगा) - 150 रुपये + जी. एस. टी.

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एच. डी. एफ. सी. बैंक के द्वारा लगाया गया चेक बाउंस पेनल्टी

एच. डी. एफ. सी. बैंक में चेक बाउंस का पेनल्टी कुछ इस प्रकार है

  1. अपर्याप्त धनराशि (स्थानीय) की वजह से चेक बाउंस - 350 रुपये

  2. तकनीकी कारणों के कारण (स्थानीय) चेक बाउंस - कोई शुल्क नहीं

  3. औसत त्रैमासिक शेष राशि (स्थानीय) का गैर-रखरखाव - 400 रुपये

  4. एच. डी. एफ. सी. की अन्य शाखाओं में जमा किए गए चेक बाउंस पर शुल्क- 75 रुपये

  5. भुगतान न होने पर चेक का बाउंस - 100 रुपये प्रति चेक बाउंस
     

पंजाब नेशनल बैंक के द्वारा लगाया गया चेक बाउंस पेनल्टी

पंजाब नेशनल बैंक के मामले में चेक बाउंस पेनल्टी चेक पर लिखी हुई राशि पर निर्भर करती है।

  1. पूंजी या किसी अन्य वजह से पंजाब नेशनल बैंक का चेक बाउंस होना

  • 1 लाख रुपये तक के चेक के लिए - 300 रुपये प्रति चेक बाउंस

  • 1 लाख रुपये से 1 करोड़ रुपये तक के चेक के लिए - 500 रुपये प्रति चेक (जितने दिन तक बैंक में पूंजी नहीं थी, उसके हिसाब से ब्याज लगेगा)

  • 1 करोड़ रुपये से ऊपर के चेक के लिए - पहले चेक के लिए 2000 रुपये और महीने के दूसरे चेक के लिए 2500 रुपये प्रति माह
     

  1. पी. एन. बी. ग्राहकों द्वारा प्राप्त चेक का डिस्ऑनर और क्लियरिंग हाउस (आउटवर्ड क्लियरिंग) में प्रस्तुति के लिए जमा किया गया

  • 1 लाख रुपये तक के चेक के लिए - 100 रुपये प्रति चेक

  • 1 लाख रुपये से ऊपर के चेक के लिए - 200 रुपये प्रति चेक + जेब खर्च में से यदि कोई हो
     

  1. स्थानीय बैंक में सीधे प्रस्तुति के लिए स्थानीय चेक

  • 100 रुपये + जेब खर्च या संग्रह शुल्क का 50% जो भी अधिक हो
     

  1. स्थानीय बैंक में सीधे प्रस्तुति के लिए स्थानीय बिल

  • 200 रुपये + जेब खर्च या संग्रह शुल्क का 50% जो भी अधिक हो
     

  1. बाहरी चेक / बिल के लिए रिटर्निंग चार्ज

  • 1 लाख रुपये तक के चेक के लिए - 100 रुपये प्रति चेक + जेब खर्च

  • 1 लाख रुपये से ऊपर के चेक के लिए - 200 रुपये प्रति चेक + जेब खर्च

  • बिल - 200 रुपये + जेब खर्च या संग्रह शुल्क का 50% जो भी अधिक हो
     

  1. स्थायी निर्देश

  • पंजीकरण - 50 रुपये

  • निष्पादन शुल्क - 35 रुपये + प्रेषण शुल्क + जेब खर्च से बाहर

  • गैर-निष्पादन शुल्क (पूंजी की अपर्याप्तता के कारण)

  1. गैर-व्यक्तियों के लिए 50 रुपये प्रति लेनदेन

  2. अर्ध-शहरी, शहरी और मेट्रो शाखाओं के व्यक्तिगत ग्राहकों के लिए 35 रुपये प्रति लेनदेन

  3. ग्रामीण शाखाओं, सीनियर सिटीजन और पेंशनरों के व्यक्तिगत ग्राहकों के लिए 35 रुपये प्रति लेनदेन (सीनियर सिटीजन और पेंशनरों के लिए शुल्क शाखा के स्थान के बावजूद)

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चेक बाउंस होने के नकारात्मक प्रभाव

  1. सी. आई. बी. आई. एल. स्कोर

चेक बाउंस होने पर वित्तीय क्रेडिट इतिहास भी प्रभावित और बाधित होता है। यहां तक ​​कि चेक बाउंस का सिर्फ एक परिदृश्य आपके सी. आई. बी. आई. एल. स्कोर को इस हद तक नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है, कि आपको ऋण के लिए मना किया जा सकता है। इसलिए यह सुनिश्चित करने के लिए कि सी. आई. बी. आई. एल. स्कोर सक्रिय है, और ऊपर है, आपको यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है, कि चेक कभी भी बाउंस न हो और खाता में पर्याप्त शेष राशि हो।
 

  1. अन्य नकारात्मक प्रभाव

आर. बी. आई. यह भी बताता है, कि एक बैंक को चेक बाउंस करने के उस ग्राहक को जारी करने पर रोक लगाने की अनुमति है, जो व्यक्ति चेक बाउंस करने का अपराध बार-बार कर चुका है। किसी ग्राहक को अधिकतम 1 करोड़ रुपये से अधिक के चेक की पेशकश की जा सकती है। इससे अधिक, यदि किसी ऋण के लिए बैंक के साथ कोई संपार्श्विक प्रतिभूति राशि सुरक्षित की गई है, और यदि ई. एम. आई. चेक बाउंस हो जाता है, तो बैंक के पास कानूनी नोटिस जारी करने का अधिकार भी है, और बैंक आपके सक्रिय खाते से धन भी काट सकती है।
 

चेक बाउंस के कारण और दंड

ऐसे कई कारण हैं, जिनकी वजह से चेक बाउंस हो सकता है, वे निम्न हैं

  1. पूंजी की अपर्याप्तता

  2. 3 महीने के बाद चेक पेश करना

  3. चेक में ओवरराइटिंग या परिवर्तन

  4. खाता संख्या का बेमेल

  5. खाते की लिमिट पार करना

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  6. बंद खाता

  7. ग्राहक की मौत, दिवालिया या पागलपन होना

  8. भुगतान रोकना

  9. हस्ताक्षर आदि का बेमेल।

हालाँकि, चेक बाउंस के लिए “नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881” के तहत अपराध होता है, बैंक द्वारा निम्नलिखित कारणों से चेक वापस कर दिया जाना चाहिए

  1. बैंक खाते में धन की अपर्याप्तता

  2. चेक पर दी गई राशि बैंक के साथ कॉन्ट्रैक्ट में भुगतान की जाने वाली राशि से अधिक है

  3. चेक जारीकर्ता बैंक को चेक भुगतान रोकने का निर्देश देता है

दंड
जैसा कि पहले कहा गया था, “नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881” के सेक्शन 138 के तहत चेक बाउंस एक आपराधिक अपराध है, इसके लिए निम्न सजा का प्रावधान दिया गया है:

  1. 2 साल तक की कैद

  2. आर्थिक दंड, जो चेक पर राशि का दोगुना तक किया जा सकता है, या

  3. ऊपर के दोनों

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कानूनी उपचार उपलब्ध

यदि चेक किसी ऋण या देयता के निर्वहन के लिए जारी किया गया है, और इसे जारी / आहरित होने के 3 महीने के भीतर बैंक को प्रस्तुत किया गया था, और यदि यह चेक बाउंस हो गया है, तो एक व्यक्ति को चेक की राशि के भुगतान के लिए चेक जारीकर्ता को एक कानूनी नोटिस भेजना चाहिए। यदि जारीकर्ता को नोटिस भेजे जाने के बाद भी, वह राशि का भुगतान करने में विफल रहता है, तो चेक के आदाता / प्राप्तकर्ता को एक उचित समय के भीतर चेक बाउंस सम्बंधित वकील की मदद से 30 दिनों की अवधि के अंदर उचित न्यायालय में शिकायत दर्ज करनी चाहिए।




 

ये गाइड कानूनी सलाह नहीं हैं, न ही एक वकील के लिए एक विकल्प
ये लेख सामान्य गाइड के रूप में स्वतंत्र रूप से प्रदान किए जाते हैं। हालांकि हम यह सुनिश्चित करने के लिए अपनी पूरी कोशिश करते हैं कि ये मार्गदर्शिका उपयोगी हैं, हम कोई गारंटी नहीं देते हैं कि वे आपकी स्थिति के लिए सटीक या उपयुक्त हैं, या उनके उपयोग के कारण होने वाले किसी नुकसान के लिए कोई ज़िम्मेदारी लेते हैं। पहले अनुभवी कानूनी सलाह के बिना यहां प्रदान की गई जानकारी पर भरोसा न करें। यदि संदेह है, तो कृपया हमेशा एक वकील से परामर्श लें।

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