लोक अदालत का नोटिस मिलने पर क्या 2000 रुपये का मिनिमम ड्यू भरना काफी है
सवाल
उत्तर (2)
नहीं, आपको इस नोटिस को बिल्कुल भी अनदेखा नहीं करना चाहिए। भले ही आपने न्यूनतम देय राशि (Minimum Due) भर दी है, लेकिन बैंक की नजर में आपका पूरा कर्जा अभी खत्म नहीं हुआ है। लोक अदालत एक ऐसा मंच है जहाँ बैंक और ग्राहक आपस में बैठकर मामला हमेशा के लिए सुलझा लेते हैं।
यहाँ कुछ जरूरी बातें हैं जो आपको समझनी चाहिए:
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लोक अदालत क्यों जाना चाहिए: अगर आप वहां जाते हैं, तो आप बैंक के प्रतिनिधि से बात करके अपना 9000 का बकाया कम करवा सकते हैं (जिसे 'Settlement' कहते हैं)। बैंक अक्सर लोक अदालत में ब्याज और जुर्माना माफ कर देते हैं। वहां जो भी फैसला होता है, वह आखिरी होता है और उसे बाद में बदला नहीं जा सकता।
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अनदेखा करने का नुकसान: अगर आप नहीं जाते हैं, तो बैंक कोर्ट को यह बता सकता है कि आप पैसा नहीं देना चाहते। इससे बैंक को आपके खिलाफ आगे कानूनी कार्रवाई करने या आपका 'सिबिल स्कोर' (CIBIL Score) खराब करने का मौका मिल जाता है।
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मिनिमम ड्यू का सच: क्रेडिट कार्ड में मिनिमम ड्यू भरने से सिर्फ लेट फीस बचती है, लेकिन बाकी बचे पैसे पर भारी ब्याज लगता रहता है। लोक अदालत जाकर आप इस चक्कर से हमेशा के लिए बाहर निकल सकते हैं।
आपको तय तारीख पर लोक अदालत जरूर जाना चाहिए। वहां जाकर जज या सदस्य को बताएं कि आपने 2000 रुपये भर दिए हैं और आप बाकी पैसा भी देना चाहते हैं, लेकिन कुछ छूट चाहते हैं। मुमकिन है कि बैंक 4000-5000 रुपये लेकर आपका पूरा खाता बंद कर दे। वहां जाने के लिए आपको किसी वकील की जरूरत नहीं है, आप खुद भी अपनी बात रख सकते हैं।
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बैंकिंग और वित्त कानून से संबंधित अन्य प्रश्न
- ऋण को एनपीए घोषित कर दिया गया और बैंक ने हमें 13(2) नोटिस दिया। हमने 48 पृष्ठों की पूरी विस्तृत आपत्तियां/अभ्यावेदन दिए। उसी समय मेरी मां गंभीर रूप से बीमार थीं, इसलिए मैंने शाखा अधिकारियों से उनसे मिलने और 48 पृष्ठों की विस्तृत आपत्तियां/अभ्यावेदन एकत्र करने के लिए कहा। शाखा प्रबंधक ने मुझे उचित रिसीविंग दी और मैंने उन्हें सीएमडी के साथ-साथ एओ के लिए भी प्रतियां सौंप दीं। उन्होंने मुझे 13(4) दिया और मामला डीआरटी में है। बैंक के कानूनी वकील ने स्वीकार किया कि आपत्तियां/अभ्यावेदन दिए गए थे और उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि जवाब नहीं दिया गया लेकिन उन्होंने तर्क दिया कि चूंकि यह बीएम को दिया गया था न कि एओ को, इसलिए कोई जवाब नहीं दिया गया। हमने कहा कि SARFAESI अधिनियम 2002 में स्पष्ट रूप से स्पष्ट है कि उधारकर्ताओं द्वारा आपत्तियां/अभ्यावेदन या तो सुरक्षित लेनदार या एओ को दिया जा सकता है, जबकि जवाब केवल एओ द्वारा दिया जाएगा। कृपया अपने विचार रखें.
- मैंने 2005 में 1.5 लाख रुपये का एजुकेशन लोन लिया था और अब तक लगभग 70 हजार रुपये चुका चुका हूं। अब बैंक मुझसे करीब 3 लाख रुपये मांग रहा है, लेकिन मेरी फाइनेंशियल कंडीशन ऐसी नहीं है कि मैं पूरी रकम दे सकूं। मैंने दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलाकर करीब 1.5 लाख रुपये जुटाए हैं। साथ ही मैं उस शहर भी नहीं जा सकता जहां बैंक है। क्या मैं बैंक से लोन सेटलमेंट कर सकता हूं? और ये कैसे होगा?
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