1 Mere dadi ke pia ke naam se khaiyani jamin hai ar dadi ke pia ke bee ki vidhwa pani hai ar nke ki


सवाल

1. Mere dadi ke pita ke naam se khatiyani jamin hai aur dadi ke pita ke bete ki vidhwa patni hai aur unke koi varish nhi hai aur dadi 3 behan hai to wo jamin registry (kewala) kaise hoga aur kon sab document lgega. 2. Kya vanshavali lgakar registry hoga ? 3. Dadi ke pita ka mrityu prman patra nhi hai to kya sarpanch dwara pramanit vanshali jisme मृत likhe hone registry kr sakte hai .

उत्तर (2)


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आपके प्रश्नों का उत्तर क्रमबद्ध रूप से इस प्रकार है। सबसे पहले, आपकी दादी के पिता के नाम से खतियानी भूमि है, जिसके पुत्र (आपकी दादी के भाई) की विधवा पत्नी हैं, परंतु उनकी कोई संतान नहीं है। ऐसी स्थिति में, हिंदू उत्तराधिकार कानून के अनुसार, वह विधवा पत्नी उस पुत्र की संपत्ति की पहली उत्तराधिकारी होगी। चूंकि उनकी कोई संतान नहीं है, इसलिए भूमि का अगला हक उन्हीं का बनता है, जब तक कि अन्य कोई विशेष दस्तावेज न हो। आपकी दादी और उनकी तीन बहनें, अपने मृत भाई की विधवा से पहले अधिकार नहीं रखतीं, क्योंकि कानून के अनुसार विधवा को जीवित भाइयों-बहनों से अधिक अधिकार प्राप्त है। अतः इस भूमि की रजिस्ट्री (केवला) आपकी दादी के पिता के उस पुत्र की विधवा के नाम पर ही सबसे पहले होनी चाहिए, क्योंकि वह विधवा ही वैध उत्तराधिकारिणी है।

दूसरे, वंशावली लगाकर रजिस्ट्री हो सकती है, परंतु उसमें वास्तविक उत्तराधिकारी का नाम ही आएगा। यदि विधवा अपनी मर्जी से आपकी दादी या तीनों बहनों को हक देना चाहे, तो वह स्वैच्छिक रजिस्ट्री कर सकती है, अन्यथा कानूनी उत्तराधिकार उसी का होगा। अंत में, यदि मृत्यु प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं है, तो सरपंच द्वारा प्रमाणित वंशावली, जिसमें मृत लिखा हो, का उपयोग राजस्व विभाग में उत्तराधिकार दर्ज कराने के लिए किया जा सकता है। परंतु, ध्यान रखें कि सरपंच का प्रमाण पत्र अंतिम नहीं होता, राजस्व विभाग उसकी जांच करेगा। कानूनी रजिस्ट्री के लिए अक्सर वैध वारिसान प्रमाण पत्र की आवश्यकता होती है, जो तहसीलदार द्वारा जारी किया जाता है। आपको सर्वप्रथम तहसील में वारिसान प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करना चाहिए, वहीं सरपंच के प्रमाण पत्र को भी संलग्न करें। जब विधवा का नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज हो जाएगा, तभी उस नाम से आगे की रजिस्ट्री संभव होगी। बिना मृत्यु प्रमाण पत्र के प्रक्रिया लंबी हो सकती है, परंतु सरपंच और पटवारी के साक्ष्य के आधार पर तहसीलदार इसे स्वीकार कर सकते हैं। इस कार्य के लिए किसी जानकार वकील या राजस्व अधिकारी का सहयोग लेना अत्यंत आवश्यक है।


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