हमारे गर्मी ऋषि मातापिता विवाद चल मैं


सवाल

हमारे गर्मी ऋषि की माता-पिता के बीच विवाद चल रहा है उसके बीच में मैंने अपनी प्रॉपर्टी के लिए दादा मुझे प्रॉपर्टी नहीं दे रहा है ना वह गेहूं दे रहे हैं खाने के लिए ना और कुछ दे रहे हैं सारे किले उनके नाम में तो मैं उसे पर जमीन पर छुट्टी लेना चाहता हूं

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आपकी स्थिति अत्यंत कठिन है, क्योंकि आपके माता-पिता के बीच चल रहे विवाद के कारण आपके दादा जी आपको आपकी पैतृक संपत्ति का हिस्सा नहीं दे रहे हैं। साथ ही, वे आपको खाने के लिए अनाज या अन्य कोई सामान भी नहीं दे रहे हैं, और सारी उपज अपने नाम पर ही काट रहे हैं। कानून की दृष्टि से, यदि वह भूमि आपके दादा जी की पैतृक संपत्ति (पूर्वजों से मिली हुई संपत्ति) है, तो आपका उस भूमि पर जन्मसिद्ध अधिकार बनता है, चाहे वह अभी आपके दादा जी के नाम पर ही क्यों न हो। पैतृक संपत्ति में हर पीढ़ी का बराबर का हिस्सा होता है, इसलिए आपके दादा जी आपको संपत्ति देने से मना करके आपके कानूनी अधिकार का उल्लंघन कर रहे हैं।

अब आपको सबसे पहले यह समझना होगा कि संपत्ति के बंटवारे के लिए आपको अपने दादा जी की अनुमति या सहमति की आवश्यकता नहीं है। आप अपने कानूनी अधिकार का प्रयोग करते हुए, अपने नाम पर भूमि से छुट्टी (बंटवारा) ले सकते हैं। इसके लिए आपको सबसे पहले अपने गाँव के राजस्व विभाग (तहसील) में जाकर खसरा और खतौनी की प्रति (जिसमें आपके दादा जी का नाम दर्शाया गया हो) प्राप्त करनी होगी। इसके बाद, आपको उसी तहसील में बंटवारे के लिए आवेदन देना होगा। तहसीलदार या राजस्व निरीक्षक आपकी भूमि का सीमांकन करेंगे और आपको आपका कानूनी हिस्सा अलग करके दे देंगे। यदि आपके दादा जी इस प्रक्रिया में बाधा डालते हैं या सहयोग नहीं करते हैं, तो प्रशासन कानूनी रूप से उन्हें बाध्य कर सकता है, और आपको बलपूर्वक भी आपका हिस्सा दिलवाया जा सकता है।

चूंकि आपके दादा जी आपको खाने के लिए अनाज और अन्य आवश्यक वस्तुएं भी नहीं दे रहे हैं, यह एक प्रकार का पारिवारिक उत्पीड़न है। ऐसी स्थिति में, आप अपने आवेदन के साथ राजस्व अधिकारी से यह भी प्रार्थना कर सकते हैं कि जब तक बंटवारा पूरा न हो जाए, तब तक वे आपके दादा जी को निर्देश दें कि वे आपको भरण-पोषण के लिए उचित मात्रा में अनाज और आर्थिक सहायता दें। यदि राजस्व विभाग से आपको उचित समाधान नहीं मिलता है, तो आप अपने वकील के माध्यम से पारिवारिक न्यायालय या सिविल न्यायालय में बंटवारे का वाद (पार्टीशन सूट) दायर कर सकते हैं। अदालत भूमि का सर्वेक्षण करवाएगी और आपके हिस्से को आपको अलग करवा देगी।

आपको अपने माता-पिता के विवाद में पड़ने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि आपका अधिकार भूमि पर व्यक्तिगत रूप से है। बस ध्यान रखें कि बंटवारे के लिए आपको अपनी पूरी पैतृक संपत्ति की जानकारी होनी चाहिए। यदि आपके दादा जी ने कोई संपत्ति किसी और को बेच दी है, तो वह बिक्री भी चुनौती देने लायक हो सकती है, लेकिन बंटवारे की प्रक्रिया वर्तमान में उनके नाम पर मौजूद भूमि के लिए ही होगी। निष्कर्षतः, आप अपने कानूनी अधिकार का प्रयोग करते हुए प्रशासनिक और न्यायिक दोनों मार्गों पर चल सकते हैं, और आपको अपना हिस्सा निश्चित रूप से मिलेगा।


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