बिना वसीयत छोड़े पिता की मृत्यु के बाद संपत्ति का वितरण


सवाल

मेरे पिता का 1974-75 के दौरान निधन हो गया और मेरी मां जीवित है। मैं अकेला बेटा हूं और मेरी दो बड़ी बहनें हैं, जो शादीशुदा हैं। मेरे पिता ने कोई भी वसीयत नहीं बनाई, कृपया मुझे यह बताएँ कि क्या मैं और मेरी मां संपत्ति के कानूनी उत्तराधिकारी हैं या मेरी बहन अपने हिस्से का दावा कर सकती है और क्याक्या मेरी माँ अपनी मर्जी से वसीयत बनाकर मेरी बहनों को हिस्सा दे सकती हैं? कृपया कानूनी सलाह दें।

उत्तर (1)


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अगर आपके पिता का निधन बिना वसीयत के हुआ है, तो उनकी संपत्ति हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 के तहत सभी कानूनी वारिसों में बराबर बंटेगी। इस कानून के मुताबिक, Class-I उत्तराधिकारी में पत्नी (आपकी माँ), बेटा (आप) और बेटियां (आपकी बहनें) शामिल हैं। इसका मतलब यह है कि आपकी माँ, आपकी बहनें और आप, सभी को पिता की संपत्ति में बराबर का हिस्सा मिलेगा।

अब सवाल यह है कि क्या आपकी बहनों का संपत्ति पर अधिकार है? हां, आपकी बहनों का भी पिता की संपत्ति में उतना ही हक है जितना आपका और आपकी माँ का। पहले के समय में बेटियों को पैतृक संपत्ति में हिस्सा नहीं मिलता था, लेकिन 2005 में हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम में बदलाव हुआ, जिसके बाद बेटियों को भी बराबर का अधिकार दिया गया, चाहे उनकी शादी हो गई हो या नहीं। इसलिए आपकी बहनें अपने हिस्से का दावा कर सकती हैं।

अगर आप चाहते हैं कि संपत्ति सिर्फ आपके नाम पर हो, तो क्या कर सकते हैं? इसके लिए आपकी बहनों को अपनी इच्छा से अपने हिस्से को छोड़ना होगा। वे त्याग पत्र (Relinquishment Deed) या गिफ्ट डीड (Gift Deed) के जरिए अपने हिस्से को आपके नाम ट्रांसफर कर सकती हैं। अगर वे तैयार नहीं हैं, तो आपको संपत्ति के बंटवारे के लिए कानूनी प्रक्रिया अपनानी होगी।

आपकी माँ के पास सिर्फ अपने हिस्से की संपत्ति का अधिकार है। वे अपने हिस्से की संपत्ति को वसीयत के जरिए किसी को भी दे सकती हैं, लेकिन पूरी संपत्ति की वसीयत नहीं बना सकतीं, क्योंकि संपत्ति सभी उत्तराधिकारियों में पहले से ही विभाजित हो चुकी होगी।

अगर आप संपत्ति अपने नाम करवाना चाहते हैं, तो आपको क्या करना होगा? सबसे पहले, आपको उत्तराधिकार प्रमाण पत्र (Succession Certificate) के लिए आवेदन करना होगा। यह प्रमाण पत्र साबित करता है कि आप कानूनी वारिस हैं और संपत्ति पर आपका हक है। अगर परिवार के सभी लोग सहमत हों, तो आपसी सहमति से संपत्ति आपके नाम ट्रांसफर हो सकती है। लेकिन अगर कोई सहमत नहीं है, तो आपको बंटवारे के लिए सिविल कोर्ट में मुकदमा दायर करना होगा। इस मामले में किसी अनुभवी वकील की मदद लेना सही रहेगा, ताकि कानूनी प्रक्रिया बिना किसी परेशानी के पूरी हो सके।


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