क्या मां की अपनी कमाई से खरीदी गई संपत्ति में बच्चे हिस्सा मांग सकते हैं


सवाल

एक महिला के नाम पर एक पंजीकृत संपत्ति है जिसे उन्होंने अपने पति की मृत्यु से 20 साल पहले अपनी बचत से खरीदा था। वह एक गृहिणी हैं और उनके पति की मृत्यु साल 2015 में बिना कोई वसीयत छोड़े हो गई थी। अब सवाल यह है कि क्या यह संपत्ति पैतृक संपत्ति मानी जाएगी और क्या उनके तीन बच्चे इस जमीन के बंटवारे की मांग कर सकते हैं या फिर यह पूरी तरह से मां की अपनी निजी संपत्ति मानी जाएगी?

उत्तर (4)


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अगर संपत्ति मां ने अपने पैसों या बचत से खरीदी है, तो वह उनकी स्वयं अर्जित संपत्ति (Self-acquired Property) है और बच्चे जीते जी इसमें हिस्सा नहीं मांग सकते।

हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम (Hindu Succession Act) की धारा 14 के अनुसार, एक हिंदू महिला के पास मौजूद कोई भी संपत्ति उसकी पूर्ण संपत्ति होती है। वह उस जमीन या मकान की सीमित मालिक नहीं बल्कि पूर्ण स्वामी (Absolute Owner) होती है। इसका मतलब यह है कि मां अपनी मर्जी से इस संपत्ति को किसी को भी बेच सकती हैं, किसी को उपहार में दे सकती हैं या किसी के भी नाम वसीयत (Will) कर सकती हैं।

यह संपत्ति पैतृक संपत्ति (Ancestral Property) की श्रेणी में नहीं आती है। पैतृक संपत्ति वह होती है जो पिता, दादा या परदादा से विरासत में मिली हो। चूंकि यह मां ने खुद खरीदी है, इसलिए उनके जीवनकाल में बच्चों का इस पर कोई कानूनी अधिकार नहीं बनता है। बच्चे केवल मां की मृत्यु के बाद ही इस पर दावा कर सकते हैं, वह भी तब अगर मां ने अपनी मृत्यु से पहले कोई वसीयत न की हो।

यदि मां की मृत्यु बिना वसीयत (Intestate) किए हो जाती है, तो उनके कानूनी वारिस (Legal Heirs) के रूप में उनके बच्चों को संपत्ति में बराबर का हिस्सा मिलता है। लेकिन जब तक मां जीवित हैं, वह अपनी इस संपत्ति की अकेली मालिक बनी रहेंगी।

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चूंकि संपत्ति मां की स्वयं अर्जित संपत्ति है, इसलिए इसका विभाजन नहीं किया जा सकता है। माता पूर्ण स्वामिनी है और उसके निस्तारण का पूर्ण अधिकार है। हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 14 पढ़ें - एक हिंदू महिला के पास कोई भी संपत्ति उसके पूर्ण मालिक के रूप में होगी न कि सीमित मालिक के रूप में।

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नमस्ते, अपनी माँ के जीवित रहने की अवधि के दौरान आप उनकी स्वअर्जित संपत्ति का विभाजन नहीं कर सकते। यह उसकी अनन्य संपत्ति है। केवल पैतृक संपत्ति के संबंध में आपके पास विभाजन के लिए दावा करने का अधिकार है।

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किसी भी रोजगार, व्यवसाय या व्यापार में उसके द्वारा अर्जित या प्राप्त की गई किसी भी विवाहित महिला की मजदूरी और कमाई और इस तरह के निवेश और मजदूरी और संपत्ति से सभी कमाई को उसकी अलग संपत्ति माना जाता है। वर्तमान मामले के अनुसार, महिला का दावा है कि संपत्ति उसकी अपनी बचत से खरीदी गई थी। यदि बचाया गया पैसा उसके पति की कमाई से था, तो वह उस पैसे का दावा नहीं कर सकती, जिससे उसने संपत्ति खरीदी है, और इसलिए संपत्ति पैतृक संपत्ति के रूप में मानी जाती है और अन्य कानूनी उत्तराधिकारियों के बीच साझा की जाती है।


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