एक पैतृक अविभाजित जिसका बंटवारा मकान


सवाल

एक पैतृक अविभाजित घर जिसका कोई बंटवारा नहीं हुआ है, मकान स्वामी कुन्दन लाल है, जो कि मरने से पहले कोई वसीयत करके नहीं गए..... कुन्दन लाल के दो पुत्र थे-सीताराम व गौरीशंकर, सीताराम नि:संतान थे, लेकिन गौरीशंकर के चार पुत्र थे, सीताराम की मृत्यु उपरांत उनकी पत्नी लक्षमी देवी ने अपने पति से प्राप्त उक्त मकान के आधे हिस्से की वसीयत गौरीशंकर के सबसे बडे पुत्र के हक मे कर दी, लक्षमी देवी की मृत्यु होने के पश्चात व उनकी वसीयत के तीन साल वाद गौरीशंकर ने भी अपने आधे भाग की वसीयत अपने सबसे छोटे पुत्र के हक मे कर दी, गौरीशंकर के बाकी वचे दो पुत्रों को मकान मे से कोई हिस्सा नहीं मिला 1-क्या लक्षमी देबी व गौरीशंकर दोनों को वसीयत करने का अधिकार है? 2-क्या गौरीशंकर के वाकी वचे दोनो पुत्रों को अभिवाजित मकान से कुछ नहीं मिलेगा समाधान करे

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मकान में हिस्सा मिलने के लिए आपको आपको कानूनी कार्यवाही कानूनी कार्यवाही करनी पड़ेगी तो इसके लिए लिए आपके पास जो पेपर है आपके पास जो पेपर है वह मुझे दिखा कर आगे की कार्रवाई कर सकते हैं कर सकते हैं तो आप मुझे तो आप मुझे फोन पर फोन पर समक्ष समक्ष तुरंत संपर्क करें


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